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Paraspar : Bhasha-Sahitya-Andolan (Raza Pustak Mala)

Paraspar : Bhasha-Sahitya-Andolan (Raza Pustak Mala)

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  • Pages: 208
  • Year: 2018, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126730872
  •  
    कलाओं में भारतीय आधुनिकता के एक मूर्धन्य सैयद हैदर रज़ा एक अथक और अनोखे चित्रकार तो थे ही उनकी अन्य कलाओं में भी गहरी दिलचस्पी थी। विशेषत: कविता और विचार में। वे हिन्दी को अपनी मातृभाषा मानते थे और हालाँकि उनका फ्रेंच और अँग्रेज़ी का ज्ञान और उन पर अधिकार गहरा था, वे, फ्रांस में साठ वर्ष बिताने के बाद भी, हिन्दी में रमे रहे। यह आकस्मिक नहीं है कि अपने कला-जीवन के उत्तरार्द्ध में उनके सभी चित्रों के शीर्षक हिन्दी में होते थे। वे संसार के श्रेष्ठ चित्रकारों में, २०-२१वीं सदियों में, शायद अकेले हैं जिन्होंने अपने सौ से अधिक चित्रों में देवनागरी में संस्कृत, हिन्दी और उर्दू कविता में पंक्तियाँ अंकित कीं। बरसों तक मैं जब उनके साथ कुछ समय पेरिस में बिताने जाता था तो उनके इसरार पर अपने साथ नवप्रकाशित हिन्दी कविता की पुस्तकें ले जाता था : उनके पुस्तक-संग्रह में, जो अब दिल्ली स्थित रज़ा अभिलेखागार का एक हिस्सा है, हिन्दी कविता का एक बड़ा संग्रह शामिल था। रज़ा की एक चिन्ता यह भी थी कि हिन्दी में कई विषयों में अच्छी पुस्तकों की कमी है। विशेषत: कलाओं और विचार आदि को लेकर। वे चाहते थे कि हमें कुछ पहल करना चाहिये। २०१६ में साढ़े चौरानवे वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु के बाद रज़ा फाउण्डेशन ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए हिन्दी में कुछ नये किस्म की पुस्तकें प्रकाशित करने की पहल रज़ा पुस्तक माला के रूप में की है, जिनमें कुछ अप्राप्य पूर्व प्रकाशित पुस्तकों का पुनर्प्रकाशन भी शामिल है। उनमें गांधी, संस्कृति-चिन्तन, संवाद, भारतीय भाषाओं से विशेषत: कला-चिन्तन के हिन्दी अनुवाद, कविता आदि की पुस्तकें शामिल की जा रही हैं। —'आमुख' से

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    Rajeev Ranjan Giri

    बिहार के एक गाँव भादा (पूर्वी चम्पारण) में 

    १९ दिसम्बर १९७८ को जन्म। शुरुआती शिक्षा गाँव में। जेएनयू नयी दिल्ली से हिन्दी साहित्य मेें एम.ए. एवं एम.फिल.। एम.ए. में सर्वोच्च स्थान। दिल्ली विश्वविद्यालय से पी-एच. डी.।

    तद्भव, आलोचना, प्रतिमान, वाक्, वागर्थ, हंस, अकार इत्यादि पत्र-पत्रिकाओं में आलोचनात्मक निबन्ध व अनुवाद प्रकाशित। कुछेक निबन्ध संस्कृत, उर्दू, उड़िया, अँग्रेज़ी और जर्मन में अनूदित। संवेद के पचास से अधिक अंकों का सह-सम्पादन। वर्तमान सन्दर्भ के 'स्त्री मुक्ति : यथार्थ और यूटोपिया' विशेषांक का अतिथि सम्पादन। गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, राजघाट, नयी दिल्ली के हिन्दी-अँग्रेज़ी जर्नल अनासक्ति दर्शन  के 'भूदान विशेषांक' का सम्पादन। तीन वर्षों तक साहित्यिक मासिक पत्रिका पाखी में 'अदबी हयात' स्तम्भ लेखन। गांधी दर्शन की मासिक पत्रिका अन्तिम जन का तीन वर्षों तक सम्पादन। अभिधा  व स्त्री काल  के सम्पादन से सम्बद्ध। नेशनल बुक ट्रस्ट की पत्रिका पुस्तक संस्कृति  के सलाहकार। आलोचनात्मक लेखन के लिए विद्यापति सम्मान।

    प्रकाशित कृतियाँ 

    अथ-साहित्य : पाठ और प्रसंग, संविधान सभा और भाषा विमर्श, लघु पत्रिका आन्दोलन, सामन्ती ज़माने में भक्ति आन्दोलन; १८५७ : विरासत से जिरह, प्रेमचन्द : सम्पूर्ण बाल साहित्य, गांधीवाद रहे न रहे एवं पुरुषार्थ, त्याग और स्वराज सहित पाँच सम्पादित पुस्तकें। 

    कुछेक साल सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली में अध्यापन के बाद फिलहाल राजधानी कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) नयी दिल्ली में अध्यापन।

     सम्पर्क : rajiv.giri19@gmail.com

                twitter : @rajivgiri2015

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