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Patanjali Aur Ayurvedic Yoga

Patanjali Aur Ayurvedic Yoga

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  • Pages: 260
  • Year: 2018, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183618748
  •  
    आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धान्तों के अनुसार बात, पित्त और कफ में से किसी एक के असन्तुलन से मानसिक अवस्था में तो परिवर्तन आता ही है, उससे शरीर पर कई बुरे प्रभाव पड़ते हैं। पतंजलि योग में वर्णित अष्टांग योग के प्रथम तीन अंगोंµयम, नियम और आसन से त्रिदोष सन्तुलन में बड़ी सहायता मिलती है। योग और आयुर्वेद दोनों ही मूल रूप से शरीर से सम्बन्धित हैं। इनके आधारभूत सिद्धान्त सांख्य पर आधारित हैं आयुर्वेदिक योग पतंजलि के अष्टांग योग से ही ग्रहण किया गया है। इसका आधारभूत उद्देश्य है-अच्छा स्वास्थ्य, शारीरिक-मानसिक सन्तुलन और जीवन का सम्पूर्ण आनन्द। डॉ. विनोद वर्मा की इस पुस्तक का उद्देश्य योग और आयुर्वेद दोनों के माध्यम से शरीर को स्वस्थ रखना है। दूसरा उद्देश्य प्राचीन ज्ञान सागर से ऐसी नई एवं सरल विधियों का विकास करना है जिनसे मानव स्वास्थ्य, शान्ति और सोमनस्य प्राप्त कर सके। इस पुस्तक को पाँच खंडों में विभाजित किया गया है। पहले खंड में भारतीय परम्परा: योग और आयुर्वेद पर प्रकाश डाला गया है। दूसरे खंड में पतंजलि के योग सूत्रों की व्याख्या की गई है और तीसरे खंड में आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धान्त तथा चौथे खंड में योग और आयुर्वेद का एकीकरण एवं पाँचवें खंड में आयुर्वेद योग पर विस्तृत चर्चा की गई है।

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    Vinod Verma

    डॉ. विनोद वर्मा

    डॉ. वर्मा का जन्म और पालन-पोषण एक ऐसे परिवार में हुआ जिसके हर रोज के क्रियाकलाप में ‘योग’ और ‘आयुर्वेद’ की बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने अपने पिता से यौगिक प्रक्रियाओं की शिक्षा प्राप्त की और अपनी दादी माँ द्वारा उनके जीवन में आयुर्वेद का आत्मसात् हुआ। डॉ. वर्मा की दादी माँ को स्त्रिायों और बच्चों के उपचार की स्वाभाविक योग्यता प्राप्त थी। पारिवारिक परंपरा के बावजूद डॉ. वर्मा ने आधुनिक चिकित्साशास्त्रा के अध्ययन का निश्चय किया और डॉक्टर की दो उपाधियाँ अर्जित कींµपंजाब विश्वविद्यालय से प्रजनन जीव विज्ञान (Reproduction Biology) में और पेरिस की Universite de Pierre et Marie Curie से तंत्रिका जीव विज्ञान (Neurobiology) में। तंत्रिका जीव विज्ञान के क्षेत्रा में डॉ. वर्मा ने उन्नतिशील शोधकार्य किया-पहले National Institute of Health, Bethesda (USA) में और फिर Max-Planck Institute, Germany में। जर्मनी की एक औषधीय कंपनी में चिकित्सा संबंधी शोध के दौरान डॉ. वर्मा ने स्पष्ट अनुभव किया कि निरोग अवधान संबंधी नवीनतम दृष्टिकोण विखंडित है, फिर भी हम लोग स्वास्थ्य-संपोषण को छोड़कर केवल बीमारियों के इलाज पर ही अपने सारे साधन और प्रयास लगाये जा रहे हैं। इस उद्देश्य के लिए डॉ. वर्मा ने Now (The New Way Health Organization) की स्थापना की ताकि इसके द्वारा वह स्वास्थ्यप्रद पवित्रा जीवन-शैली, स्वास्थ्य की देखभाल के लिए निरोधी उपायों और दूसरे स्वावलंबी तरीकों के विषय में जानकारी लोगों तक पहुँचा सकें।

    पिछले कई वर्षों से डॉ. वर्मा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के आचार्य प्रियव्रत शर्मा के साथ प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा के अनुसार आयुर्वेदिक ग्रंथों का अध्ययन कर रही हैं। इसके अलावा वह मानव जातीय और लोक-साहित्यिक आयुर्वेदिक परंपरा के क्षेत्रा में शोध करती रही हैं ताकि साधारण आयुर्वेदिक उपचार के घरेलू नुस्खों का पता लगाया जा सके।

    डॉ. वर्मा के अनेक वैज्ञानिक शोध-लेख अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। आयुर्वेद एवं योग आदि पर उनके पाँच ग्रंथ भी विभिन्न यूरोपीय भाषाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।

    डॉ. वर्मा हर वर्ष कुछ महीने विदेश में बिताती हैं जहाँ आयुर्वेद और योग द्वारा स्वास्थ्य तथा दीर्घायु जैसे विषयों पर उनके भाषण, कार्य-शिविर तथा अन्य कार्यक्रम अत्यंत लोकप्रिय हैं।

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