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Patthar Ke Neeche Dabe Hue Hath

Patthar Ke Neeche Dabe Hue Hath

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  • Pages: 204p
  • Year: 2002
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8126703830
  •  
    पत्थर के नीचे दबे हाथ राजकमल चौधरी की कहानियाँ परमाणु में पर्वत के समावेश की कहानियाँ हैं, जो मानव-जीवन के अनछुए प्रसंगों से उठाकर लाई गई हैं, जिसमें राजकमल की सारी की सारी कहानी-कला मौजूद है और लगता ऐसा है कि इसमें कोई कला नहीं दिखाई गई है। जन-जीवन का सत्य ज्यों का त्यों रख दिया गया है। सच्ची घटनाएँ तो अखबारी रिपोर्टों में बयान होती हैं, कहानी में घटनाएँ सच की तरह आती हैं। घटनाएँ सच हों, इससे ज्यादा जरूरी है कि वे सच लगें भी। राजकमल की कहानियों की यह खास विशेषता है कि वे सारी घटनाएँ सच हों या न हों, सच लगती अवश्य हैं। धर्म, साहित्य, नौकरी, व्यापार, फिल्म, सामाजिक जीवन- यापन...तमाम क्षेत्रों की विकृतियों का इतनी सूक्ष्मता से यहाँ पर्दाफाश किया गया है कि वे अचानक तार-तार हो जाती हैं। छोटे-छोटे स्वार्थों की पूर्ति, क्षणिक मनोवेगों की पुष्टि के लिए मनुष्य किस सीमा तक गिर सकता है; संन्यासी और सिद्ध योगी और यहाँ तक कि देवता की छवि रखनेवाला भी पल-भर में कैसा जानवर हो जाता है; खँूखार जानवर कैसा गऊ हो जाता है; शेर की दहाड़ और आतंक का मालिक पल-भर में कैसे गीदड़, चूहा, केंचुआ, चींटी हो जाता है और रेंगने लगता है- मानव-जीवन की इसी उठा-पटक का एलबम हैं राजकमल की कहानियाँ।

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    Rajkamal Chaudhari

    जन्म: 13 दिसम्बर, 1929 को अपने ननिहाल रामपुर हवेली में। पितृग्राम महिषी (सहरसा-बिहार)। इण्टरमीडिएट आर्ट्स में नामांकन, किन्तु उसे छोड़कर भागलपुर आकर इण्टरमीडिएट कॉमर्स में प्रवेश। मारवाड़ी कॉलेज, भागलपुर से 1955 में आई.कॉम.। 1953 में गया कॉलेज से बी.कॉम। लेखन की शुरुआत भागलपुर से ही हो गई थी। शिक्षा पूरी करने के बाद अधिकतर कलकत्ता में रहे। कई हिन्दी और मैथिली की पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। अन्तिम वर्षों में पूरी तरह स्वतंत्र लेखन। 19 जून, 1967 को पटना के अस्पताल में लम्बी बीमारी के बाद निधन।

    प्रकाशित कृतियाँ: हिन्दी में: अग्निस्नान, शहर था शहर नहीं था, नदी बहती थी, ताश के पत्तों का शहर, मछली मरी हुई (उपन्यास); बीस रानियों के बाइस्कोप, एक अनार: एक बीमार (लघु उपन्यास); मुक्ति प्रसंग, कंकावती, इस अकाल वेला में (कविता-संग्रह); मछली जाल, सामुद्रिक एवं अन्य कहानियाँ (कहानी-संग्रह)।

    मैथिली में: आदि कथा, पाथरफूल, आंदोलन (उपन्यास); स्वरगंधा, कविता राजकमलक (कविता-संग्रह); एकटा चंपाकली विषधर, कृति राजकमलक (कहानी-संग्रह)। अनूदित कृतियाँ: मूल बांग्ला से शंकर के उपन्यास चौरंगी और वाणी राय के उपन्यास चोखे आमार तृष्णा का हिन्दी अनुवाद।

    ‘राजकमल चौधरी रचनावली’ शीघ्र प्रकाश्य।

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      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna

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    Daryaganj, New Delhi-02

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    Fax: +91 11 2327 8144