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Pratinidhi Kahaniyan : Rangeya Raghav

Pratinidhi Kahaniyan : Rangeya Raghav

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  • Pages: 154p
  • Year: 2007
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8171785778
  • ISBN 13: 9788171785773
  •  
    रांगेय राघव के कहानी-लेखन का मुख्य दौर भारतीय इतिहास की दृष्टि से प्त हलचल-भरा विरल कालखंड है, कम मौकों पर भारतीय जनता ने इतने स्वप्न और दुःस्वप्न एक साथ देखे थे-आशा और हताशा ऐसे अड़ोस-पड़ोस में खड़ी देखी थी । और रांगेय राघव की कहानियों की विशेषता यह है कि उस पूरे समय की शायद ही कोई घटना हो जिसकी गूँजे-अनुगूंजें उनमें न सुनी जा सकें । सच तो यह है कि रांगेय राघव ने हिन्दी कहानी को भारतीय समाज के उन धूल-काँटों भरे रास्तों, आवारे-खफंडरों-चरजीवियों की फक्कड़ जिन्दगी, भारतीय गाँवों की कच्ची और कीचड़-भरी पगडंडियों की गश्त करवाई, जिनसे वह भले ही अब तक पूर्णत: अपरिचित न रही हो पर इस तरह हिली-मिली भी नहीं थी; और इन 'दुनियाओं' में से जीवन से लबलबाते ऐसे-ऐसे कद्‌दावर चरित्र प्रकट किए जिन्हें हम विस्मृत नहीं कर सकेंगे । 'गदल' को क्या कोई भूल सकता है!

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    Rangeya Raghav

    जन्म: 17 जनवरी, 1923, आगरा।

    मूल नाम: टी.एन.वी. आचार्य (तिरुमल्लै नंबकम् वीरराघव आचार्य)।

    शिक्षा: आगरा में। सेंट जॉन्स कॉलेज से 1944 में स्नातकोत्तर और 1949 में आगरा विश्वविद्यालय से गुरु गोरखनाथ पर पी-एच.डी.। हिंदी, अंग्रेजी, ब्रज और संस्कृत पर असाधारण अधिकार।

    कृतियाँ: 13 वर्ष की आयु में लिखना शुरू किया। 1942 में अकालग्रस्त बंगाल की यात्रा के बाद एक रिपोर्ताज लिखा - तूफानों के बीच। यह रिपोर्ताज हिन्दी में चर्चा का विषय बना।

    मात्र 30 वर्ष की आयु में कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, रिपोर्ताज के अतिरिक्त आलोचना, संस्कृति और सभ्यता पर कुल मिलाकर 150 से अधिक पुस्तकें लिखीं।

    साहित्य के अतिरिक्त चित्रकला, संगीत और पुरातत्त्व में विशेष रुचि। अनेक रचनाओं का हिंदीतर भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद।

    सम्मान: हिंदुस्तानी अकादमी पुस्कार (1947), डालमिया पुरस्कार (1954), उत्तरप्रदेश शासन पुरस्कार (1957 तथा 1959) और मरणोपरांत महात्मा गांधी पुरस्कार (1966) से सम्मानित।

    निधन: लंबी बीमारी के बाद 12 सितंबर, 1962 को बंबई में।

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