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Pratinidhi Kahaniyan : Shani

Pratinidhi Kahaniyan : Shani

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  • Pages: 159
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9789388183833
  •  
    शानी हिन्दी साहित्य के एक विरल कथाकार हैं। अनछुए-अनदेखे यथार्थ को एक बड़े कैनवस पर रचने के लिए शानी के पास जो विज़न था, वह विघटन के इस दौर में आज भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है। उसे प्रस्तुत संग्रह की इन प्रतिनिधि कहानियों में भी सा$फ देखा जा सकता है। इसमें एक तर$फ उन्होंने ‘जनाज़ा’, ‘युद्ध’, ‘जली हुई रस्सी’ सरीखी रचनाओं के ज़रिये, विभाजन के बाद से अपने में बन्द मुस्लिम समाज के बहुत सारे डर, असमंजस और विरोधाभास हमारे सामने रखे हैं, तो दूसरी ओर ‘जहाँपनाह जंगल’ जैसी दुनिया उद्घाटित की है और ‘परस्त्रीगमन’ जैसा नज़रिया पेश किया है। उनकी कहानियों में हमें अपने भीतर की वह दबी हुई ची$ख सुनाई पड़ती है, जिसे हम रोज़ मुल्तवी करते चलते थे। साथ ही, उनकी दूरबीनी नज़र के सामने हम अपने कार्यकलापों को बौना, व्यर्थ और क्षणभंगुर होता हुआ भी पाते हैं। संक्षेप में, उनके पाठकों को कहीं छुटकारा नहीं है—हर हालत में वे पात्रों की नियति के सहभोगी हैं—उसमें विद्रूप हो, व्यंग्य हो या कभी न भुलाया जानेवाला अपमान। शानी के रचना-संसार से अपरिचित पाठकों के लिए यह संकलन य$कीनन प्रतिनिधि सिद्ध होगा।

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    Shani

    शानी

    जन्म : 16 मई, 1933, जगदलपुर (मध्यप्रदेश)।

    पूरा नाम : गुलशेर खान शानी। समकालीन कथाकारों में विशेष रूप से समादृत।

    शिक्षा पूरी करने के बाद वर्षों तक मध्यप्रदेश शासन के अन्तर्गत कार्य। मध्यप्रदेश साहित्य परिषद, भोपाल के सचिव पद पर रहे। ‘साक्षात्कार’ के संस्थापक-सम्पादक। तत्पश्चात दिल्ली आकर ‘नवभारत टाइम्स’ में सहायक सम्पादक रहे। बाद में साहित्य अकादमी, नई दिल्ली से सम्बद्ध। अकादमी से प्रकाशित ‘समकालीन भारतीय साहित्य’ के संस्थापक-सम्पादक।

    अनेक भारतीय भाषाओं के अलावा रूसी तथा लिथुवानी भाषा में रचनाएँ अनूदित।

    प्रकाशित पुस्तकें : साँप और सीढ़ी, फूल तोडऩा मना है, एक लडक़ी की डायरी, काला जल (उपन्यास); बबूल की छाँव, डाली नहीं फूलती, छोटे घेरे का विद्रोह, एक-से मकानों का नगर, युद्ध, शर्त का क्या हुआ?, बिरादरी, सडक़ पार करते हुए (कहानी-संग्रह) तथा शालवनों का द्वीप (संस्मरण)।

    निधन : 10 फरवरी, 1995

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