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Punjabi Natak Aur Rangmanch Ki Ek Sadi

Punjabi Natak Aur Rangmanch Ki Ek Sadi

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  • Pages: 132p
  • Year: 2009
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788181970244
  •  
    किसी भी भाषा में नाट्‌यकला का विकास उस भाषा एवं क्षेत्र की रंगमंचीय स्थिति के परिप्रेक्ष्य में ही का जा सकता है । यह एक दोधारी प्रक्रिया है । रंगमंच की बुनियादी जरूरत नाटक यानी आलेख हे जिसके बिना रंगमंच नहीं हो सकता । दूसरी तरफ रंगमंचीय परिदृश्य नाटक यानी आलेख को प्रभावित करता है । मूलत: किसी भाषा एवं क्षेत्र का रंगमंच ही नाट्‌यलेखन की प्रेरक भूमि है क्योंकि उसी के लिए नाटक लिखा जाता- है । इसे यूँ कहा जाए कि नाटक से रंगमंच जन्म लेता है और रंगमंच से नाटक जन्म लेता हे तो अतिशयोक्ति नहीं होगी । जाहिर है कि किसी भी भाषा के नाटक राव रंगमंच का अलग-अलग अध्ययन सम्पूर्ण अध्ययन नहीं हो सकता । इसलिए किसी भाषा के नाटक का अध्ययन करने हेतु आदर्श विधि यही होनी चाहिए कि उस भाषा के नाटक एवं रंगमंच को सम्मिलित रूप से का जाए । इसी दृष्टि से लिखी गई यह पुस्तक 'पंजाबी नाटक और रंगमंच की एक सदी' की यात्रा को परिलक्षित करने का सतत प्रयास है । पंजाबी नाटक एवं रंगमंच की सम्मिलित धारा निरन्तर बह रही है । इस पुस्तक में पंजाबी नाटक और रंगमंच की एक सदी का रेखांकन व मूल्यांकन किया गया है जिसका उद्देश्य यह जानना है कि साहित्य और कला की इन सशक्त विधाओं अर्थात् नाटक एवं रंगमंच ने किस तरह एक ओर पंजाबी भाषा में अपनी जड़ें जमाई व पंजाबी नाट्‌य-मंच एक परम्परा में तब्दील होने में समर्थ हुआ और दूसरी तरफ कैसे पंजाबी नाट्‌य-मंच ने पंजाब के जनजीवन को प्रभावित किया तथा पंजाब के सामाजिक, मनोवैज्ञानिक व राजनीतिक सरोकारों से वाबस्ता होकर जनचेतना जगाने में एक निर्णायक भूमिका निभा सका ।

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    Satish Kumar Verma

    डॉ. सतीश कुमार वर्मा पंजाबी भाषा के चर्चित नाटककार, रंगकर्मी एवं समीक्षक हैं। उनके द्वारा लिखे गए नाटक अलग-अलग विश्वविद्यालयों एवं स्कूल बोर्डों के पाठ्यक्रम में शामिल किए गए हैं। नाटक ‘दायरे’ को साहित्य कला परिषद् का प्रथम पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है। रंगकर्म के क्षेत्र में पंजाबी अकादेमी, दिल्ली की ओर से सर्वोत्तम निर्देशक का पुरस्कार प्राप्त कर चुके डॉ. वर्मा ने भारत के अलग-अलग प्रान्तों के अलावा नार्वे, स्वीडन, डेनमार्क सरीखे देशों में भी थियेटर किया है।

    डॉ. वर्मा द्वारा रचित पंजाबी पुस्तकंे ‘रंगकर्मीयां नाल संवाद’ एवं ‘पंजाबी नाटक दा इतिहास’ को पंजाब सरकार द्वारा क्रमशः प्रिंसिपल तेजा सिंह सम्पादन पुरस्कार एवं डॉ. अतर सिंह समीक्षा पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने नाट्य शोध एवं अध्यापन के क्षेत्र में ‘नाटक का रंगमंचीय अध्ययन’ नाम से एक नई समीक्षा विधि को भी सिद्धान्तबद्ध किया है।

    नाटक एवं रंगमंच के अलावा डॉ. वर्मा रेडियो, टीवी एवं सिनेमा के क्षेत्र का भी जाना-पहचाना नाम हैं। पंजाबी के अलावा उनकी हिन्दी, अंग्रेजी एवं उर्दू भाषा पर भी पकड़ है और वे चारों भाषाओं के पेशेवर अनुवादक एवं मंच संचालक के तौर पर भी जाने जाते हैं। पंजाबी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के प्रसार एवं प्रचार को पूर्णतः समर्पित डॉ. वर्मा पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला (पंजाब) के पंजाबी विभाग के प्रोफेसर एवं युवक भलाई विभाग के डायरेक्टर के पदों पर आसीन हैं।

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