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Sab Des Paraya

Sab Des Paraya

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  • Pages: 172p
  • Year: 1996
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 8171192513
  •  
    जैसे-जैसे शहर गांवों तक फैल रहा है, वैसे ही वैसे भूमिहीन खेतिहर मजदूरों की समस्याएँ बढ़ती चली जा रही हैं । जब गाँव में पशु चराकर, उन्हीं के सहारे रोजी कमा पाना संभव नहीं रहता और खेती के मशीनीकरण के कारण खेती के काम में मजदूरों की जरूरत कम रह जाती है, तो इस वर्ग के लोग शहरों की ओर चले आते हैं । परंतु क्या शहरी व्यवस्था इन्हें शहरों में रोजगार दे पाती है? विडंबना यह है कि रोजी के लिए शहर आया मेलू, कुछ ही सालों बाद शहरों के मशीनीकरण के कारण भूखों मरता उसी गाँव की शरण में लौटता है जहाँ से आया था, और उधर उसका बूढ़ा बाप अपने इसी बेटे के पास जाकर, अपनी बेटी की शादी तथा छोटे बेटे की पढ़ाई, रोजगार की समस्या लिये, शहर चलने की तैयारी कर रहा है! ऐसे दलित वर्ग का अपना कोई 'देस' नही होता; परंतु इस वर्ग के लोग, पाँव रखने की जगह पाने के लिए, गाँव या शहर में, संघर्षरत हैं । इन लोगों की शक्ति तथा संघर्ष ही इस उपन्यास का केन्द्रबिन्दु है । यथार्थ की धरातल पर लिखा गया उपन्यास 'सब देस पराया' में शोषित-प्रताड़ित खेतिहर मजदूरों की संघर्ष- गाथा को इस कलात्मकता के साथ मार्मिक पुट दिया गया है कि वह आधुनिक भारतीय साहित्य की एक उपलव्धि मानी जायेगी ।

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    Gurdayal Singh

    जन्म: 10 जनवरी 1933। जन्म स्थान:  जैतो, जिला फरीदकोट (पंजाब)। स्नातकोत्तर शिक्षा के बाद जीविका के लिए लगातार अध्यापन-कार्य।

    बाह्य घटनाओं के आन्तरिक अनुभव और आन्तरिक भावजगत के बाह्य अभिव्यक्तिकरण द्वारा पाठक को गहन मानवीय अनुभवों तथा भारतीय जन-जीवन के विभिन्न पहलुओं को उकेरनेवाले सुविख्यात पंजाबी उपन्यास।

    प्रकाशित पुस्तकें:

    उपन्यास: मढ़ी दा दीवा, अणहोये, कुवेला, रेते दी इक्क मुट्ठी, अध चाँदनी रात, आथण, उग्गण, अन्हें घोड़े दा दान, पहुफटाले तों पहलाँ (1922)।

    कहानी-संग्रह: सग्गी फुल्ल, ओपरा घर, चन्न दा बूटा, कुत्ता ते आदमी, मस्ती बोता, बेगाना पिंड, रुखे मिस्से बन्दे, पक्का ठिकाना, करोर दी ढिगरी।

    बालोपयोगी साहित्य: बकलम खुद, टुक खोह लये काँवाँ, बाबा खेमा तथा सात पुस्तकें प्रकाश्य।

    हिन्दी में अनूदित: अध चाँदनी रात, मढ़ी दा दीवा, घर और रास्ता, पाँचवाँ पहर, परमा तथा सब देस पराया (उपन्यास)।

    पुरस्कार: सोवियत लैण्ड नेहरू पुरस्कार - 1986, साहित्य अकादमी पुरस्कार - 1979, नानकसिंह नावलिस्ट पुरस्कार - 1972 (‘अध चाँदनी रात’ के लिए) चार उत्तम गल्प-साहित्य-रचनाओं के लिए भाषा विभाग, पंजाब की ओर से - 1966, 67, 68, 72 पुरस्कार। शिरोमणि साहित्यकार पुरस्कार - 1993।

    सम्प्रति: ब्रजेन्द्र कॉलेज, फरीदकोट में पंजाबी भाषा साहित्य के व्याख्याता।

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