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Sach Pyar Aur Thodi Si Shararat

Sach Pyar Aur Thodi Si Shararat

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  • Pages: 387p
  • Year: 2017, 6th Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126714841
  •  
    अंग्रेज़ी के प्रसिद्ध पत्रकार, स्तम्भकार और कथाकार खुशवंत सिंह की आत्मकथा सिर्फ़ आत्मकथा नहीं, अपने समय का बयान है। एक पत्रकार की हैसियत से उनके सम्पर्कों का दायरा बहुत बड़ा रहा है। इस आत्मकथा के माध्यम से उन्होंने अपने जीवन के राजनीतिक, सामाजिक माहौल की पुनर्रचना तो की ही है, पत्रकारिता की दुनिया में झाँकने का मौका भी मुहैया किया है। भारत के इतिहास में यह दौर हर दृष्टि से निर्णायक रहा है। इस प्रक्रिया में न जाने कितनी जानी-मानी हस्तियाँ बेनकाब हुई हैं और न जाने कितनी घटनाओं पर से पर्दा उठा है। ऐसा करते हुए खुशवंत सिंह ने हैरत में डालनेवाली साहसिकता का परिचय दिया है। खुशवंत सिंह यह काम बड़ी निर्ममता और बेबाकी के साथ करते हैं। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में औरों के साथ उन्होंने खुद को भी नहीं बख़्शा है। वक्त के सामने खड़े होकर वे उसे पूरी तटस्थता से देखने की कामयाब कोशिश करते हैं। इस कोशिश में वे एक हद तक खुद अपने सामने भी खड़े हैं - ठीक उसी शरारत-भरी शैली में जिससे ‘मैलिस’ स्तम्भ के पाठक बखूबी परिचित हैं, जिसमें न मुरौवत है और न संकोच। उनकी जिंदगी और उनके वक्त की इस दास्तान में ‘थोड़ी-सी गप है, कुछ गुदगुदाने की कोशिश है, कुछ मशहूर हस्तियों की चीर-फाड़ और कुछ मनोरंजन’ के साथ बहुत-कुछ जानकारी भी।

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    Khushwant Singh

    जन्म: 15 अगस्त, 1915, हडाली (संप्रति, पाकिस्तान में)।

    शिक्षा: लाहौर से स्नातक तथा किंग्स कॉलेज, लंदन से एल.एल.बी.।

    उपलब्धियाँ: 1939 से 1947 तक लाहौर हाईकोर्ट में वकालत की। विभाजन के बाद भारत की ‘राजनयिक सेवा’ के अंतर्गत कनाडा में ‘इन्प़$ॉर्मेशन अफ़सर’ तथा इंग्लैंड में भारतीय उच्चायुक्त के ‘प्रेस अटैची’ रहे। कुछ वर्षों तक प्रिंस्टन तथा स्वार्थमोर विश्वविद्यालयों में अध्यापन भी किया।

    भारत लौटकर नौ वर्षों तक इलस्ट्रेटेड वीकली तथा तीन वर्षों तक हिंदुस्तान टाइम्स का कुशल संपादन किया। 1980 में राज्यसभा के सदस्य मनोनीत हुए। 1974 में पर्भिंूषण की उपाधि मिली, जिसे ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के खिलाफ गुस्सा जताते हुए लौटा दिया।

    तीस से अधिक पुस्तकें लिख चुके हैं, जिनमें प्रमुख हैं: ट्रेन टु पाकिस्तान, हिस्ट्री ऑफ सिख्स के दो खंड तथा रंजीत सिंह। एक और उपन्यास, चार कहानी-संग्रहों तथा अनेक लेखमालाओं के अतिरिक्त उर्दू और पंजाबी में कई अनुवाद भी किए।

    संप्रति: हिंदुस्तान टाइम्स तथा संडे के लिए नियमित रूप से क्रमशः ‘विद मैलिस टुवर्ड्स वन एंड ऑल’ एवं ‘गॉसिप, स्वीट एंड सॉर’ लिखते हैं तथा ‘पेंगुइन बुक्स कंपनी इंडिया’ में सलाहकार संपादक के पद पर कार्यरत हैं।

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