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Sahitya Aur Bhartiya Ekta

Sahitya Aur Bhartiya Ekta

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  • Pages: 388p
  • Year: 2001
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8126702067
  •  
    साहित्य और भारतीय एकता (निट् इंडिया थ्रू लिटरेचर) एक वृहत् आयोजन है जिसमें सुप्रसिद्ध तमिल लेखिका शिवशंकरी पिछले पाँच सालों से संलग्न हैं। यह इस आयोजन का प्रथम खंड है, जिसे तमिल और अंग्रेजी के बाद अब हिन्दी पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत किया जा रहा है। आशा है कि आगामी तीन सालों में इसके बाकी तीन खंड भी प्रकाशित हो जाएँगे। साहित्य और भारतीय एकता के माध्यम से लेखिका शिवशंकरी भारतीय संस्कृति तथा साहित्य के आधार पर देशवासियों को आपस में जोड़ना चाहती है। इस महान उद्यम की सफलता के लिए उन्होंने देश के अनेक प्रांतों का भ्रमण किया, अनेक कलात्मक और सांस्कृतियों रूपों का अध्ययन किया, सम्बद्ध भारतीय भाषाओं के समृद्ध साहित्य का गहन अनुसंधान भी किया,ख् साथ ही प्रत्येक भाषा से संबद्ध अनेक प्रमुख लेखक-लेखिकाओं के साथ साक्षात्कार भी किए, हर भाषा की उत्कृष्ट प्रतिनिधि साहित्यिक रचनाओं का चयन किया और इनका अति उत्तम भाषान्तर भी करवाया। लेखिका के यात्रा-संस्मरणों, साक्षात्कारों और प्रत्येक भाषा से सम्बद्ध साहित्यिक विचारों के इस समायोजन से प्रकट होती है एक अखंड एकता, साथ ही हमारे लेखकों और कवियों के द्वारा अपनी रचनाओं में अभिव्यक्त किए जाने वाले वह विचार भी इसमें शामिल हैं जो हमारे देश के सामने स्थित उग्र समस्याओं को रेखांकित करते हैं, जैसे—गरीबी, अज्ञान, वर्ग, वर्ण एवं स्त्री-पुरुष का भेदभाव, आधुनिकता की चुनौतियाँ, धार्मिक पुनरुत्थान, कट्टरवाद, अंधविश्वास तथा असहिष्णुता, नैतिकता के प्रति अनादर, हिंसा एवं गांधीजी के मूल्यों का क्षरण। लेखिका का विश्वास है कि इस आयोजन के द्वारा लेखक अपनी रचनाओं के साथ वृहत् पाठक-समुदाय तक पहुँचकर इन समस्याओं के उन्मूलन में अपना योगदान कर पाएँगे। इस खंड में शिवशंकरी ने दक्षिण भारत पर ध्यान केन्द्रित करते हुए करेल, कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश एवं तमिलनाडु राज्यों एवं उनके साहित्य का अवलोकन किया है। इस खंड में समाहित 27 साक्षात्कार, लेखकों की साहित्यिक कृतियों के 25 उत्कृष्ट उद्धरण और उनमें व्यक्त विचार दक्षिण भारत में सृजनरत मनीषा का एक विश्वसनीय ब्यौरा हिन्दी पाठकों के सम्मुख उपलब्ध कराएँगे।

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    Shivshankari

    तमिल लेखिका शिवशंकरी साहित्य के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं, इसीलिए उनके लेखन में उनके सामाजिक सरोकार गहराई से गुँथे होते हैं। नशीली दवाओं के सेवन, शराबखोरी और वरिष्ठ नागरिकों की समस्या पर उनके अनेक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं।

    अभी तक उनके खाते में लगभग 150 कहानियाँ, 30 उपन्यास, 13 यात्रा-वृत्तांत और श्रीमती इंदिरा गांधी तथा जी.डी. नायडू की जीवनियाँ दर्ज हो चुकी हैं। आजकल वे ‘निट इंडिया थ्रो लिटरेचर’ शीर्षक परियोजना में व्यस्त हैं। देश की मान्यता-प्राप्त अठारहों भाषाओं के रचनाकारों के साक्षात्कारों पर आधारित इस परियोजना का पहला खंड (दक्षिण भारत पर केन्द्रित) अंग्रेजी, तमिल व हिन्दी में प्रकाशित हो चुका है।

    लेखन के अलावा ऑडियो कैसेट और टेलीविजन के लिए भी काम।

    विभिन्न साहित्यिक व कला संस्थानों, पत्रिकाओं और संगठनों द्वारा अनेक पुरस्कारों और उपाधियों से सम्मानित, जिनमें प्रमुख हैं - कस्तूरी श्रीनिवासन अवार्ड, डॉ. राजा सर अन्नामलाई चेट्टियार अवार्ड, राजीव विरुदु, तमिल अन्नाई अवार्ड, मेल्विन जोंस अवार्ड, राजीव गांधी नेशनल इंटीग्रेशन अवार्ड, तेलुगु आर्ट्स अकादमी अवार्ड, स्त्री रत्न अवार्ड, मनुश्री व मानद नागरिक सम्मान, आदि।

    अनेक सामाजिक व साहित्यिक संस्थाओं में सम्मानित पदों पर कार्य। दक्षिण भारतीय शास्त्रीय संगीत व भरतनाट्यम में भी पारंगत।

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