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Sahitya Vigyan

Sahitya Vigyan

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  • Pages: 445p
  • Year: 1992
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: SV282
  •  
    ' 'साहित्य विज्ञान' ' या साहित्य का वैज्ञानिक विवेचन : सम्मतियाँ ''मैंने डॉ० गणपतिचन्द्र गुप्त के नये ग्रन्थ ''साहित्य विज्ञान'' का अध्ययन रुचिपूर्वक किया है । यह वस्तुत: गम्भीर अध्ययन और मौलिक दृष्टि पर आधारित ठोस कार्य है । लेखक ने साहित्य के आधारभूत तत्वों की व्याख्या अत्यन्त विशद रूप में करते हुए साहित्यालोचन के क्षेत्र में अत्यन्त महत्वपूर्ण योग दिया है ।.... '' -डॉ० नगेन्द्र, डी लिट् ''प्रस्तुत ग्रन्थ में लेखक ने साहित्य के सिद्धान्तों का वैज्ञानिक विवेचन भारतीय साहित्य-शास्त्र, पाश्चात्य काव्य- शास्त्र, सौन्दर्य-शास्त्र, मनोविज्ञान एवं विज्ञान के आधार पर प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया है ।....आज आवश्यकता इस बात की है कि विश्व-साहित्य के सामान्य निष्कर्षों का वैज्ञानिक अनुशीलन कर उसे वैज्ञानिक विधि से प्रस्तुत किया जाये । प्रसन्नता का विषय है कि प्रस्तुत ग्रन्थ इस दिशा में एक श्लाघनीय प्रयत्न है ।'' -साप्ताहिक हिन्दुस्तान ''समग्रत: आलोच्य ग्रन्थ के अनुशीलन के पश्चात् यह स्पष्ट हो जाता है कि विद्वान् लेखक ने सर्वथा नवीन और अब तक अछूते विषय पर ऐसा पांडित्यपूर्ण ग्रन्थ लिखकर एक ओर बंजर भूमि को तोड़ा है तो दूसरी ओर झाडू- झंखाड़ भी साफ किये हैं । ....दूसरी विशेषता है परम्परागत सिद्धान्तों के विवेचन में उन सिद्धान्तों के प्रवर्तक एवं व्याख्याकार आचार्यों की असंगतियों की ओर संकेत करके उस स्तर अंश को ग्रहण किया गया है जिसमें न अव्याप्ति है और न अतिव्याप्ति ।....तीसरी बात है भाषा-शैली की । एक भी शब्द-एक भी वाक्य ऐसा नहीं जो फालतू कहा जा सके ।....हिन्दी में प्रथम बार साहित्य का वैज्ञानिक विवेचन 'साहित्य-विज्ञान' के रूप में प्रस्तुत करने का श्रेय डॉ० गणपतिचन्द्र गुप्त को मिलेगा....।'' -नई धारा : अप्रैल १९६२

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    Ganpati Chandra gupt

    डॉ. गणपतिचन्द्र गुप्त

     जन्म : १५ जुलाई सन् १९२८ ई. मंढ़ा (सुरेरा) राजस्थान में।

    शिक्षा : पंजाब विश्वविद्यालय से एम.ए. (हिन्दी) पी-एच.डी. एवं डी. लिट् की उपाधियाँ प्राप्त कीं।

    गतिविधियाँ : पंजाब विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, रोहतक विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय एवं आगरा विश्वविद्यालय में प्रोफेसर, और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में कुलपति के पद पर भी कार्य किया।

    प्रकाशित रचनाएँ : ‘साहित्य-विज्ञान’, ‘हिन्दी साहित्य का वैज्ञानिक इतिहास’, ‘रस-सिद्धान्त का पुनर्विवेचन’, ‘साहित्यिक निबन्ध’, ‘हिन्दी-काव्य में शृंगार-परम्परा’, ‘महाकवि बिहारी’, ‘श्री सत्य साईं बाबा : व्यक्तित्व एवं संदेश’, ‘शिरडी साईं बाबा : दिव्य महिमा’ आदि। 

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