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Saman Nagarik Sanhita

Saman Nagarik Sanhita

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  • Pages: 124p
  • Year: 2004
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 8171193102
  •  
    समान नागरिक संहिता सरला माहेश्वरी की पुस्तक का एक महत्त्वपूर्ण योगदान यह है कि इसमें बहुत ही स्पष्ट रूप से समान नागरिक संहिता के लिए माँग के इतिहास के जरिए नारियों के संघर्ष के साथ राजनीतिक विचारधारा, शासक, कुलीन वर्गों के हितों आदि के सम्बन्ध में बताया गया है। भारत के महिला आन्दोलन में इस प्रकार का एक रुझान देखा जाता रहा है, जो पितृसत्तात्मक समाज के संकीर्ण सोच की पैरवी करता है। इसकी प्रतिक्रिया में कुछ इस प्रकार का संकीर्णतावादी नजरिया भी पैदा हुआ है, जो महिलाओं के संघर्ष को स्वतन्त्रता के लिए अन्य उत्पीड़ितजनों के संघर्ष से अलग करके देखता है। यह रुझान खुद महिलाओं के अन्दर पाए जानेवाले भेदों को नजरंदाज करता है।... भारत में संगठित नारी आन्दोलन देश में नारियों की आबादी तथा साथ ही साथ नारियों के सम्मुख उपस्थित चुनौतियों और समस्याओं को देखते हुए बहुत ही छोटा है। लेकिन अपनी कमजोरियों और कठिनाइयों के बावजूद वह लगातार तथा अक्सर सफलता के साथ चुनौतियों से टकराता और उन पर विजय प्राप्त करता रहा है। साम्प्रदायिकता के विरुद्ध संघर्ष आज एक महत्त्वपूर्ण लड़ाई है तथा इस लड़ाई में जीत पर देश का भविष्य निर्भर करता है। एक नागरिक के नाते तथा साम्प्रदायिक हिंसा की बर्बरता और अमानवीयता का विशेष तौर पर शिकार होने के नाते धर्मनिरपेक्षता और जनतन्त्र की लड़ाई में महिलाओं का बहुत कुछ दाँव पर लगा हुआ है। यह पुस्तक निःसन्देह इस आन्दोलन में एक योगदान है।

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    Sarla Maheshwari

    राजस्थान के बीकानेर में हरीश भादानी और जमुना भादानी की पुत्री के रूप में जन्म। साहित्यिक-राजनीतिक परिवार में पोषित। बचपन के ये संस्कार परिपक्व हुए कलकत्ता के एक और मार्क्सवादी राजनीतिक-साहित्यिक परिवार के साथ जुड़कर। कलकत्ता में ही सक्रिय राजनीतिक जीवन की शुरुआत। कई चुनाव लड़े। सांसद बनीं। ‘कलम’ पत्रिका के प्रकाशन के साथ जुड़ीं। ‘स्वाधीनता’ साप्ताहिक के सम्पादकीय विभाग से सम्बद्ध तथा सामयिक राजनीतिक-सामाजिक प्रश्नों पर नियमित लेखन। महिला आन्दोलन के साथ घनिष्ठ रूप से सम्पृक्त। महिलाओं की पत्रिका ‘साम्या’ से सम्बद्ध।

    इस बीच ‘महिलाओं की स्थिति,’ ‘विकास और पर्यावरण,’ ‘नई आर्थिक नीति,’ ‘महँगाई और उपभोक्ता संरक्षण,’ ‘शेयर घोटाला,’ ‘हवाला कांड’ पर पुस्तिकाएँ प्रकाशित। विभिन्न साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में लगातार लेखन। कई पुस्तकों का अनुवाद।

    जनवादी लेखक संघ की केन्द्रीय कार्यकारिणी की सदस्य, जनवादी लेखक संघ, कलकत्ता की अध्यक्ष। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की कार्यकारिणी और उसकी पश्चिम बंगाल इकाई के राज्य सचिव-मंडल की सदस्य।

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