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Sanskrit Vangmai Kosh (l to lV)

Sanskrit Vangmai Kosh (l to lV)

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10%

  • Year: 2010
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180314766
  •  
    प्रस्तुत संस्कृत वाङ्‌मय 'कोश में संस्कृत वाङ्‌मय की प्राय: सभी शाखाओं में योगदान करनेवाले ग्रन्थ एवं ग्रंथकारों का एकत्र संकलन है । इस प्रकार का ' सर्वंकष ' संस्कृत वाङ्‌मय कोश करने का प्रयास अभी तक कहीं नहीं हुआ । हस कोश के ग्रंथकार खण्ड में केवल संस्कृत भाषा के ही अन्धकारों का उल्लेख है । फिर भी हिन्दी, मराठी, बँगला, तमिल, तेलुगु इत्यादि प्रादेशिक भाषाओं के जिन प्रख्यात लेखकों ने संस्कृत में र्भा? कुछ वाङ्‌मय सेवा की है, .उनका भी उल्लेख. यथावसर ग्र-धकार खण्ड में हुआ है । 'प्रथम खंड में अन्धकारों का और द्वितीय खण्ड में अन्यों का परिचय वर्णानुक्रम से ग्रथित है । किन्तु इस सामग्री के साथ- और भी कुछ अत्यावश्यक सामग्री का चयन दोनों खण्डों में किया है । प्रथम खण्ड के प्रारम्भिक विभाग के अन्तर्गत ' संस्कृत वाङ्‌मय दर्शन ' का समावेश हुआ है। संस्कृत वाङ्‌मय के अन्तर्गत, सैकड़ों लेखका ने जो मौलिक विचारधन विद्यारसिकों को समर्पण किया, उसका समेकित परिचय विषयानुक्रम से देना यही इस विभाग का उद्‌देश्य है । पुराण-इतिहास विषयक प्रकरण में अठारह पुराणों -श्रेय साथ रामायण और महाभारत इन इतिहास-ग्रंथों के अन्तरंग का एवं तद्‌विषयक कुछ विवादों का स्वरूप कथन किया है । महाभारत की सम्पूर्ण कथा पर्वानुक्रम से दी है । दार्शनिक वाङ्‌मय के विचारों का परिचय न्याय-वैशेषिक, सांख्य-योग, तन्त्र और मीमांसा-वेदान्त विभागों के अनुसार दिया है । इसमें न्याय के अन्तर्गत बौद्ध और जैन न्याय का विहंगावलोकन किया है। योग विषय के अन्तर्गत पातंजल योगसूत्रोक्‍त विचारों के साथ हठयोग, बौद्धयोग, भक्तियोग, कर्मयोग और ज्ञानयोग का भी- परिणा दिया -है । वेदान्त परिचय के अन्तर्गत शंकर, रामानुज, वल्लभ, मध्व और चैतन्य-जैसे महान् तत्त्वदर्शी -सारियों के निष्‍कर्षभूत द्वैत- अद्वैत सिद्धान्तों का विवेचन किया है।

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    श्रीधर भास्कर वर्णेकर

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