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Sarfaroshi Ki Tamanna

Sarfaroshi Ki Tamanna

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  • Pages: 223
  • Year: 2016, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126729050
  •  
    भगत सिंह (1907-1931) का समय वही समय था जब भारत का स्वतंत्रता संग्राम अपने उरूज की तरफ बढ़ रहा था और जिस समय आंशिक आजादी के लिए महात्मा गांधी के अहिंसात्मक, निष्क्रिय प्रतिरोध ने लोगों के धैर्य की परीक्षा लेना शुरू कर दिया था। भारत का युवा वर्ग भगत सिंह के सशस्त्र विरोध के आह्नान और हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के आर्मी विंग की अवज्ञापूर्ण साहसिकता से प्रेरणा ग्रहण कर रहा था, जिससे भगत सिंह और उनके साथी सुखदेव और राजगुरु जुड़े थे। ‘इंकिलाब ज़िन्दाबाद’ का उनका नारा स्वतंत्रता-संघर्ष का उद्घोष बन गया था। लाहौर षड्यंत्र मामले में एक दिखावटी मुकदमा चलाकर ब्रिटिश सरकार द्वारा भगत सिंह को मात्र 23 साल की आयु में फांसी पर चढ़ा दिए जाने के बाद भारतवासियों ने उन्हें, उनके युवकोचित साहस, नायकत्व और मौत के प्रति निडरता को देखते हुए शहीद का दर्जा दे दिया। जेल में लिखी हुई उनकी चीजें तो अनेक वर्ष उपरान्त, आजादी के बाद सामने आईं। आज इसी सामग्री के आधार पर उन्हें देश की आजादी के लिए जान देने वाले अन्य शहीदों से अलग माना जाता है। उनका यह लेखन उन्हें सिर्फ एक भावप्रवण स्वतंत्रता सेनानी से कहीं ज्यादा एक ऐसे अध्यवसायी बुद्धिजीवी के रूप में सामने लाता है जिसकी प्रेरणा के स्रोत, अन्य विचारकों के साथ, मार्क्स, लेनिन, बर्ट्रेंड रसेल और विक्टर ह्यूगो थे और जिसका क्रान्ति-स्वप्न अंग्रेजों को देश से निकाल देने भर तक सीमित नहीं था, बल्कि वह उससे कहीं आगे एक धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी भारत का सपना सँजो रहा था। इसी असाधारण युवक की सौवीं जन्मशती के अवसर पर कुलदीप नैयर इस पुस्तक में उस शहीद के पीछे छिपे आदमी, उसके विश्वासों, उसके बौद्धिक रुझानों और निराशाओं पर प्रकाश डाल रहे हैं। यह पुस्तक पहली बार स्पष्ट करती है कि हंसराज वोहरा ने भगत सिंह के साथ धोखा क्यों किया, साथ ही इसमें सुखदेव के ऊपर भी नई रोशनी में विचार किया गया है जिनकी वफादारी पर कुछ इतिहासकारों ने सवाल उठाए हैं। लेकिन इसके केन्द्र में भगत सिंह का हिंसा का प्रयोग ही है जिसकी गांधी जी समेत अन्य अनेक लोगों ने इतनी कड़ी आलोचना की है। भगत सिंह की मंशा अधिक से अधिक लोगों की हत्या करके या अपने हमलों की भयावहता से अंग्रेजों के दिल में आतंक पैदा करना नहीं था, न उनकी निर्भयता का उत्स सिर्फ बन्दूकों और जवानी के साहस में था। यह उनके अध्ययन से उपजी बौद्धिकता और उनके विश्वासों की दृढ़ता का मिला-जुला परिणाम था।

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    Kuldeep Nayar

    जन्म: 14 अगस्त, 1924, सियालकोट, पाकिस्तान।

    शिक्षा: बी.ए. (ऑनर्स); एल.एल.बी., एम.एस-सी. (जर्नलिज्म) यू.एस.ए.; पी-एच.डी. (दर्शन शास्त्र)।

    कार्य: उर्दू समाचारपत्र ‘अंजान’ से पत्रकारिता की शुरुआत, लालबहादुर शास्त्री तथा गोविन्द बल्लभ पंत के कार्यकाल में अमेरिका में सूचना अधिकारी। अंग्रेजी समाचार पत्र ‘द स्टेट्समैन’ के सम्पादक। अंग्रेजी समाचार न्यूज एजेंसी के प्रबन्ध सम्पादक। 25 वर्ष तक पत्रिका ‘टाइम्स’ के संवाददाता। अमेरिका में भारतीय उच्चायुक्त रहे। इमरजेंसी के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष, जेल भी गए। पाकिस्तान और भारत के रिश्ते मधुर बनाने में उल्लेखनीय योगदान। मानवाधिकार के लिए एक समर्पित कार्यकर्ता।

    सदस्य: इंडियन डेलीगेशन टू द यूनाइटेड नेशन्स (1989); सीनेट ऑफ गुरुनानक यूनिवर्सिटी, अमृतसर (1990); सीनेट एंड सिंडीकेट ऑफ पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला, जेमिनी न्यूज सर्विस, लन्दन; फैकल्टी ऑफ सोशल साइंस, मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़।

    चेयरमैन, सिटीजन ऑफ डेमोक्रेसी; ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (इंडिया)। पुणे की इमेरिट्स यूनिवर्सिटी के मास कम्यूनिकेशन विभाग में प्रोफेसर।

    प्रमुख प्रकाशन: बिटवीन द लाइंस; इंडिया, द क्रिटिकल इयर्स; डिस्टेंट नेबर्स (ए टेल ऑफ सबकोन्टिनेंट); सप्रेसन ऑफ जजेज़; इंडिया आफ्टर नेहरू; द जजमेंट (जेल में बन्दी के दौरान); रिपोर्ट ऑन अफ़गानिस्तान; ट्रेजिडी ऑफ पंजाब; इंडिया हाऊस; द मार्टअर: भगत सिंह एक्सपेरीमेंट्स इन रिवोल्यूशन; वॉल एट वाघा (इंडो-पाक रिलेशनन्स)।

    प्रमुख सम्मान: हल्दी घाटी अवार्ड, फ्रीडम ऑफ इनफॉरमेशन, भाई वीर सिंह, प्राइड ऑफ इंडिया, मेवाड़ फाउंडेशन, ऑल इंडिया आर्टिस्ट्स एसोसियेशन, यू.के. सिक्ख फोरम, शिरोमणि गुरुद्वारा अमृतसर, फेडरेशन ऑफ इंडियन मुस्लिम अमेरिका/कनाडा, अब्दुल सलाम इंटरनेशनल इंडो-कनेडियन टाइम्स ट्रस्ट, नॉर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी एलूमनी एसोसियेशन, लाहौर हाईकोर्ट बार एसोसियेशन, गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी, शहीद नियोगी मेमोरियल लाइफ-टाइम अचीवमेंट अवार्ड इन जर्नलिज्म। अमेरिका में ‘उच्च आयुक्त कार्यकाल’ में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मानित।

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