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Sawdhan ! Neeche Aag Hai

Sawdhan ! Neeche Aag Hai

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  • Pages: 256
  • Year: 2018, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183618922
  •  
    चन्दनपुर के नीचे आग धधक रही है । लोगों में आग है, उनकी नसों के बिलकुल करीब...आग ही आग...लाल-सुर्ख. ..तपती हुई... । यह आग हो सकता है कि कभी किसी बड़े परिवर्तन का सूत्रपात करे लेकिन अभी तो वह सिर्फ लोगों को जला रही है । तिल-तिल करके जल रहे हैं वे, अपनी छोटी-छोटी अपूर्ण इच्छाओं के साथ । जिन्दगी बीभत्सता की हद तक सड़ी हुई...नर्क. .. । दलालों, सूदखोरों और गुंडों के बीच पिसते, कोयले की गर्द फाँकते, चन्दनपुर के खदान मजूदूर यह अच्छी तरह जानते हैं कि उनके बजाय उनकी औरतों को ही पहले काम क्यों दिया जाता है । ' 'सच तो यह है कि जिनके हाथ में कानून और पावर है, सब चोर हैं । मेहनत, ईमानदारी की कोई कदर नहीं । जो लूट रहा है, लूट रहा है, जो बिला रहा है, बिला रहा है.. .यह समूचा इलाका ही बैठ जाएगा एक दिन जल-जल कर' ' -मेवा के इस कथन में आक्रोश के साथ लाचारी है, खीज है । संजीव की कहानियों में शुगरकोटेड यथार्थ नहीं होता और न ही मनोरंजन । समाज के जिस वर्ग की जिंदगी के बारे में वे लिखते हैं, उसकी पीड़ाओं की तह तक उतर जाते हैं । अब तक दर्जनों चर्चित कहानियों के लेखक संजीव के इस उपन्यास में विषय की गहराई, उसकी समझ और पकड़, शैली और शिल्प के अतिरिक्त जो प्रतिबद्धता है, हर पाठक को उसका कायल होना पड़ेगा ।

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    Sanjeev

    जन्म: 6 जुलाई, 1947 को बांगर कलाँ गाँव, सुलतानपुर (उ.प्र.)।

    सनदों में नाम: राम सजीवन प्रसाद।

    शिक्षा: बी.एस-सी., ए.आई.सी. (भारत); शिक्षा-दीक्षा और नौकरी पश्चिम बंगाल में।

    प्रकाशित रचनाएँ: कहानी-संग्रह: तीस साल का सफरनामा, आप यहाँ हैं, भूमिका और अन्य कहानियाँ, प्रेतमुक्ति, दुनिया की सबसे हसीन औरत, ब्लैक होल, खोज, गति का पहला सिद्धान्त, गुफा का आदमी, दस कहानियाँ, गली के मोड़ पर सूना-सा कोई दरवाजा, संजीव की कथायात्रा: पड़ाव: 1,2,3; उपन्यास: किशनगढ़ के अहेरी, सर्कस, सावधान! नीचे आग है, धार, पाँव तले की दूब, जंगल जहाँ शुरू होता है, सूत्रधार, आकाश चम्पा, रह गईं दिशाएँ इसी पार; बाल उपन्यास: रानी की सराय, डायन।

    कृतियों पर फिल्में: सावधान! नीचे आग है उपन्यास पर काला हीरा नामक टेलीफिल्म, ‘प्रकाश झा प्रोडक्शन’ द्वारा हिमरेखा कहानी पर फिल्म निर्माणाधीन; श्याम बेनेगल द्वारा निर्देशित फिल्म वेल डन अब्बा कहानी फुलवा का पुल पर आधारित।

    सम्मान: प्रथम पुरस्कार: सारिका: सर्वभाषा कथा प्रतियोगिता, 1980; प्रथम कथाक्रम सम्मान लखनऊ, 1997; इंदु शर्मा स्मृति अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान, 2001; भिखारी ठाकुर लोक सम्मान, 2005; ‘पहल’ सम्मान, 2006; सुधा स्मृति सम्मान, 2008।

    सम्प्रति: राइटर इन रेजीडेंस, महात्मा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा (महाराष्ट्र)।

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