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Sirhane Gramshi

Sirhane Gramshi

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  • Pages: 168p
  • Year: 2014
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126726523
  •  
    फासिस्टों के नर-मेघी यातना और मृत्यु शिविरों से लेकर साइबेरिया के निर्वासन शिविरों और अमेरिकी जेल-औद्योगिक गठजोड़ वाले कैदखानों तक की कमोबेश एक ही कहानी है ! नागरिक स्वतंत्रता की प्रमुख अमेरिकी कार्यकर्ता एंजिला डेविस की शब्दावली में-आज भी जारी दास प्रथा की कहानी ! सुधारगृह कहे जाने वाले भारतीय जेल इनसे शायद ही अलग हैं ! इटली में फासिस्टों के जेल में बीस साल के लिए सजायाफ्ता मार्क्सवादी विचारक और कम्युनिस्ट नेता अन्तोनिओ ग्राम्शी ने सजा के दस साल भी पुरे नहीं किये कि उनके शरीर ने जवाब दे दिया ! मृत्यु के एक महीना पहले उन्हें रिहा किया गया था ! लेकिन जेल में बिताए इन चाँद सालों के आरोपित एकांत का उन्होंने इटली के इतिहास, उसकी संस्कृति, मार्क्सवादी दर्शन तथा कम्युनिस्ट पार्टी के बारे में गहरे विवेचन के लिए जैसा इस्तेमाल किया उसने उनकी जेल डायरी को दुनिया के श्रेष्ठतम जेल-लेखन के समकक्ष रख दिया ! खास तौर पर कम्युनिस्ट पार्टियों में शामिल लोगों के लिए तो इसने जैसे सोच-विचार के एक पुरे नये क्षेत्र को खोल दिया ! ग्राम्शी का यह पूरा लेखन कम्युनिस्टों को, किसी भी मार्क्सवादी के लिए अपेक्षित, तमाम वैचारिक जड़ताओं से मानसिक तौर पर उन्मुक्त करने का एक चुनौती भरा लेखन है ! एक ऐसे विचारक के साथ जेल में बिताए चंद दिनों की यह डायरी किसी भी पाठक के लिए, खास तौर पर राजनितिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए बहुत उपयोगी अनुभव साबित हो सकती है ! इसकी पारदर्शी भाषा, अंतस्थित सूक्ष्म वेदना और स्वच्छंद विचार-प्रवाह ने इस पुस्तक को अपने प्रकार की एक अनूठी कृति का रूप दिया है !

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    Arun Maheshwari

    मार्क्सवादी आलोचक, सामाजिक-आर्थिक विषयों के टिप्पणीकार एवं पत्रकार।

    जन्म: 4 जून, 1951; विज्ञान में स्नातक के बाद दो वर्षों तक कोलकाता विश्वविद्यालय की सीढ़ियों पर कानून की पढ़ाई के लिए टहलकदमी। छात्र जीवन से ही मार्क्सवादी राजनीति और साहित्य-आन्दोलन से जुड़ाव और सी.पी.आई.(एम.) के मुखपत्र ‘स्वाधीनता’ से सम्बद्ध। साहित्यिक पत्रिका ‘कलम’ का सम्पादन। जनवादी लेखक संघ के केन्द्रीय सचिव एवं पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव।

    प्रकाशित कृतियाँ: साहित्य में यथार्थ: सिद्धान्त और व्यवहार; आर.एस.एस. और उसकी विचारधारा; नई आर्थिक नीति: कितनी नई; कला और साहित्य के सौन्दर्यशास्त्रीय मानदंड; जगन्नाथ (अनूदित नाटक); जनतंत्र और समाजवाद की समस्याएँ (यंत्रस्थ); मानव विकास के दस विषय (यंत्रस्थ)।

    सम्पर्क: सीएफ-204, साल्टलेक, कोलकाता-700064

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