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Suraj Sabka Hai

Suraj Sabka Hai

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  • Pages: 139p
  • Year: 1997
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 8171193226
  •  
    सूरज सबका है ऐतिहासिक कृति से अधिक लोक मानस की कृति है । कथा की शुरुआत 1 8०4- 15 में गोरख्याणी-गढ़वाल पर गोरखों के आक्रमण से होती है जो बीच-बीच में क्‍लेश' की तरह सोनी गाँव की दादी की जीवेष्णा, गढ़वाल की तत्कालीन राजधानी श्रीनगर में रानी कर्णावती के साहस, बुद्धि-चातुर्य, दिल्ली की मुगल सल्लनत के मनसबदार नजावतखाँ की मूर्खतापूर्ण लोलुपता, ईस्ट इंडिया कंपनी की धूर्तता से गुजरते हुए, आजाद भारत के शुरुआती दिनों में परगनाधिकारी देवीदत्त की सहृदयता को लक्षित कुरते हुए सोनी गाँव पर ही समाप्त हो जाती है । औपन्यासिक भाषिक संरचना की दृष्टि से विद्यासागर नौटियाल का समूचा कथा संसार, विशेषकर सूरज सबका है अद्वितीय, अप्रतिम है । -मुहम्मद हम्माद फारूखी

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    Vidya Sagar Nautiyal

    विद्यासागर नौटियाल

    29 सितम्बर 1933 को उत्तर भारत के एक सामन्ती राज्य टिहरी-गढ़वाल में भागीरथी के तट पर बसे प्रसिद्ध गाँव मालीदेवल में वन-अधिकारी पिता नारायणदत्त तथा माता रत्ना के द्वितीय पुत्र तथा तृतीय संतान के रूप में जन्म। इस गाँव ने प्रसिद्ध सन्त स्वामी रामतीर्थ को अपनी ओर आकर्षित किया था और उन्होंने अपने स्थायी निवास के लिए यहाँ कुटिया का निर्माण करवाया था। बाद में स्वतंत्रता सेनानी काका कालेलकर ने भी अपने भूमिगत जीवन के छः माह इसी गाँव में बिताए थे।

    शिक्षा: प्राथमिक शिक्षा माता-पिता से, रियासत के विद्यालयविहीन सुदूर जंगलों में अपने घर पर। बाद में टिहरी, देहरादून तथा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में।

    प्रजामंडल के सामंतविरोधी आंदोलन में सक्रियता के कारण भारत की आज़ादी के बाद पहली गिरफ्तारी 18 अगस्त, 1947 को टिहरी रियासत में। पचास वर्षों में फैला हुआ रचना-कर्म और जन-आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी। 1958 में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के उदयपुर अधिवेशन में राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित। 1980 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी के रूप में देवप्रयाग टिहरी-गढ़वाल से उत्तर प्रदेश विधानसभा सदस्य। 1969 से 1995 तक वकालत।

    कृतियाँ: पहली कहानी मूक बलिदान 1949 में लिखी। भैंस का कट्या 1954 में कल्पना में प्रकाशित। उपन्यास:  उलझे रिश्ते 1958, भीम अकेला 1995, सूरज सबका है 1997 तथा उत्तर बायाँ है 2003 में प्रकाशित। कथा-संग्रह: टिहरी की कहानियाँ 1984 में, टिहरी की कहानियाँ 2000 में तथा सुच्ची डोर 2003 में प्रकाशित। यात्रा-वृत्तांत, संस्मरण, डायरी अंश तथा वैचारिक लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित।

    सम्प्रति: स्वतंत्र रचना-कर्म।

    सम्पर्क: डी-8, नेहरू कालोनी, धर्मपुर, देहरादून, उत्तराखंड-248 001

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