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Swarg Yatra (Ek Lok Se Doosare Lok)

Swarg Yatra (Ek Lok Se Doosare Lok)

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  • Pages: 120
  • Year: 2015
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183617932
  •  
    प्रकृति में पर्वत मुझे विशेष रूप से आकर्षित करते हैं ! और सौभाग्य से हिमालय हमारे पास है ! फिर और क्या चाहिए ! यह कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक न जाने किस-किस नाम और रूप में फैला हुआ है ! मध्य में स्थित हिमाचल प्रदेश में कुछ एक साल रहने का अवसर मिला था तो उस दौरान किन्नोर से लेकर लाहौल स्पती, रोहतांग पास की यात्रा का चूका हूँ ! यहाँ लद्दाख के बारे में बहुत कुछ सुनने को मिला था ! कुछ ऐसे तथ्यों की जानकारी हुई कि उत्सुकतावश वहां जाने की इच्छा हुई थी ! लद्दाख वो क्षेत्र है जो आज भी दुर्गम है ! आम भारतीय पर्यटक की कल्पना और चाहत से बाहर ! मगर इस क्षेत्र में सदियों से विदेशी आ रहे हैं ! खासकर यह जानकर अचम्भा होता है कि यूरोप के कई विद्वान यहाँ तब से आ रहे हैं जब यहाँ कोई भी साधन नहीं था ! हजारों साल से यह पश्चिम एशिया से लेकर मध्य एशिया और आगे यारकंड व् तिब्बत के बीच व्यापार का एक प्रमुख मार्ग रहा है ! बौद्ध भिक्षु इसा पूर्व इस क्षेत्र में आने लगे थे ! और यही नहीं, इस क्षेत्र को उन्होंने बुद्धमय कर दिया था ! सोचिए, एक ऐसा प्रदेश जो आज भी दूर दिखाई देता है वहां शताब्दियों से बोद्ध-दर्म विराजमान है ! इन सब धार्मिक व् बौद्धिकजनों के साथ-साथ व्यापारियों और सेनाओं का काफिला, कश्मीर से होता हुआ ही आता-जाता रहा ! कश्मीर और लद्दाख, हिमालय की दो विशिष्ट घाटियाँ हैं ! दो पारंपरिक व् समृद्ध सभ्यताएं ! प्राचीन संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य के दो अति महत्तपूर्ण केंद्र, इतने नजदीक !!! इसे प्रकृति और मानवीय इतिहास का संयोग ही कहेंगे ! संक्षेप में कहूं तो यह यात्रा प्रकृति के बीच कदमताल करने जैसी थी ! मुश्कलों से सामना हुआ, तो क्या !! प्रकृति भी तो अपने नग्न रूप में उपस्थित हुई ! मूल रंग में ! पूरे वैभव के साथ ! विराट ! मुश्किल इस बात की हुई है कि सौंदर्य को देखते ही मन-मस्तिष्क स्थिर हो गया ! उठ रहे विचारों का अहसास तो हुआ मगर व्यक्त कर पाना मुमकिन न हो सका ! विस्तार इतना कि वर्णन संभव नहीं ! असल में आँखे ही देख सकती हैं, कैमरे व्यर्थ हो जाते हैं !

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    Manoj Singh

    मनोज सिंह

    जन्म: 1 सितम्बर, 1964, आगरा (उ.प्र.)

    शिक्षा: बी.ई. इलेक्ट्रॉनिक्स, एम.बी.ए. (मानव संसाधन विकास)।

    प्रकाशित पुस्तकें: चन्द्रिकोत्सव (खंड काव्य); बन्धन, कशमकश (उपन्यास); मेरी पहचान (कहानी संग्रह); व्यक्तित्व का प्रभाव (आलेख संकलन); हॉस्टल के पन्नों से (उपन्यास) शीघ्र प्रकाश्य।

    अन्य: कई समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में लेखों का नियमित प्रकाशन। पत्रिकाओं का सम्पादन। www.manojsingh.com एवं कई अन्य हिन्दी वेबसाइटों पर नियमित साप्ताहिक कॉलम का लेखन। विभिन्न विश्वविद्यालयों, इंजीनियिरिंग कॉलेज, मैनेजमेंट कोर्स एवं मास-कम्युनिकेशन से सम्बन्धित शिक्षण संस्थानों में विशेषज्ञ व्याख्यान। चंद्रिकोत्सव पर आधारित नृत्यनाटिका का दूरदर्शन पर प्रसारण। ‘बंधन’ उपन्यास पंजाबी भाषा में प्रकाशित और बांग्ला तथा तमिल में शीघ्र प्रकाश्य।

    सम्प्रति: उप महानिदेशक विजीलेंस एवं टेलीकॉम मॉनिटरिंग (पंजाब व चंडीगढ़), दूरसंचार मंत्रालय, भारत सरकार।

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