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Uchakka

Uchakka

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  • Pages: 159p
  • Year: 2018, 2nd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183614597
  •  
    1989 के साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित यह आत्मकथा बिना आत्मदया या किसी कि’स्म की आत्मश्लाघा के हमारे सामाजिक यथार्थ को सामने लाती है । दलित लेखकों की परम्परागत कथा से अलग, यह ऐसा आत्म–वृतान्त है जो समाज के छोटे–छोटे अपराधों पर परवरिश पाते एक समूह का प्रतिनिधित्व करता है । ‘‘मैं तब मराठी की पहली कक्षा में ही पढ़ रहा था । तब जिस किसी पुस्तक का पहला पृष्ठ खोलता उस पर लिखा होता, ‘भारत मेरा देश है । सारे भारतीय मेरे बन्धू हैं । मुझे इस देश की परम्परा का अभिमान है ।’ मुझे लगता है कि अगर यह सब कुछ सही–सही है तो फिर हमें बिना अपराध के पीटा क्यों जाता है ? माँ को पुलिस क्यों पीटती है ? उसकी साड़ी खींचकर यह क्यों कहती है ‘चल साड़ी खोल के दिखा, तूने चोरी की है न!’ मुझे लगता है अगर भारत मेरा देश है, तो फिर हमारे साथ ऐसा बर्ताव क्यों किया जाता है ? अगर सभी भारतीय भाई–भाई हैं, तो फिर हम जैसे भाइयों को काम क्यों नहीं दिया जाता ? हमें खेती के लिए ज़मीन क्यों नहीं दी जाती ? रहने के लिए हमें अच्छा मकान क्यों नहीं मिलता ? अगर हम सब भाई हैं, तो मेरे भाइयों को, घर का खर्चा चलाने के लिए या पुलिस को रिश्वत देने के लिए, चोरी क्यों करनी पड़ती है ?’’ ऐसे कई प्रश्न हैं, जिन्हें यूँ ही ख़ारिज नहीं किया जा सकता । बिना किसी दुराव–छुपाव के लेखक सहजतापूर्वक बारी–बारी से कई सवालों से जूझता है । बेबाक और अहम साहित्यिक कृति होने के साथ–साथ यह एक महत्त्वपूर्ण व संग्रहणीय दस्तावेज़ है ।

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    Laxman Gaiakwad

    लक्ष्मण गायकवाड़

    जन्म: 23 जुलाई, 1956 को धनेगाँव-लातूर में।

    ‘उचल्या’ पुस्तक का अनुवाद हिन्दी, अंग्रेजी, कन्नड़, तेलगू, उर्दू, फ्रेंच, बंगाली भाषाओं में। उनकी ‘वडारवेदना’ चर्चित रही। वे राष्ट्रीय साहित्य अकादेमी के भूतपूर्व जूनियर मेम्बर, सोसायटी फॉर कम्यूनल हार्मनी, दिल्ली के भूतपूर्व जूनियर मेम्बर और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य रह चुके हैं।

    सम्मान: राष्ट्रीय साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली का पुरस्कार, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हाथों मिला एक लाख रुपयों का पुरस्कार, पानघंटी, पुणे का समता पुरस्कार, संजीवनी पुरस्कार। शोषित, पीड़ित समाज के लिए किए गए कार्य के लिए पुणे, पिंपरी, चिंचवड़, कोल्हापुर, औरंगाबाद की महानगरपालिकाओं ने आपका नागरिक सत्कार किया। ‘सार्क’ राष्ट्रों द्वारा दिए जानेवाले अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित।

    अन्य महत्त्वपूर्ण कृतियाँ हैं : दुभंग, बुद्धाची विपश्यना, उठाव, चिनी मातीतील दिवस इत्याति |

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      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
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