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Yadon Ka Laal Galiyara : Dantewara

Yadon Ka Laal Galiyara : Dantewara

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  • Pages: 202p
  • Year: 2017, 2nd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126727827
  •  
    यादों का लाल गलियारा : दंतेवाडा रामशरण जोशी की यह पुस्तक जिन्दा यादों की एक विरल गाथा है! उन जिन्दा यादों की जिनमें हरे-भरे कैनवस पर खून के छींटे दूर-दूर तक सवालों की तरह दिखाई देते हैं! ऐसे सवालों की तरह एक देश के पूरे नक़्शे पर, जिन्हें राजसत्ता ने अपने आन्तरिक साम्राज्यवाद प्रेरित विकास और विस्तार के लिए कभी सुलझाने का न्यायोचित प्रयास नहीं किया, बल्कि 'ग्रीन हंट' और 'सलवा जुडूम' के नाम पर रह में आड़े आनेवाले 'लोग और लोक' दोनों को ही अपराधी बना दिया! और यातनाओं को ऐसे द्स्वप्न में बदला कि दुनिया-भर के इतिहासों के साक्ष्य के बावजूद छत्तीसगढ़, झारखण्ड, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान आदि के वनांचलों का भविष्य अपने आगमन से पहले लहकता रहा, 'लाल गलियारा' बनता रहा! यह पुस्तक राजसत्ता और वश्विक नव उपनिवेशवादी चरित्र से n सिर्फ नकाब हटाती है बल्कि आदिवासियों यानि हाशिए के संघर्ष का वैज्ञानिक विश्लेषण भी करती है! रेखानिक करती है कि 'हाशिए के जन का अपराध केवल यही रहा है कि प्रकृति ने उन्हें सोना, चंडी, लोहा, मेंगनीज, तम्बा, एलुमिनियम,कोयला, तेल, हीरे-जवाहरात, अनंत जल-जंगल-जमीन का स्वाभाविक स्वामी बना दिया; समता, स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता और न्याय पूर्ण जीवन की संरचना से समृद्ध किया ! इसलिए इस जन ने अन्य की व्यवस्था में हस्तक्षेप नहीं किया! यदि अन्यों ने किया तो इस जन ने उसका प्रतिरोध भी जरूर किया! इस आत्म-रक्षात्मक प्रतिरोद्क का मूल्य इस जन को पलायन, पतंत्रता, शोषण और उत्पीडन और उत्पीडन के रूप में अदा करना पड़ा! अपने काल-परिप्रेक्ष्य में 'यादों का लाल गलियारा : दतेवाडा' पुस्तक bastar, जसपुर, पलामू, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, कालाहांडी, उदयपुर, बैलाडीला, अबूझमाड़, दतेवाडा सहित कई वनांचलों के जमीनी अध्ययन और अनुभवों के विस्फोटक अंतरविरोधो की इबारत लिखती है! लेखक ने इन क्षेत्रो में अपने पड़ावों की जिन्दा यादों की जमीन पर अवलोकन-पुनरवलोकन से जिस विवेक और दृष्टि का परिचय दिया है, उससे नै रह को एक नै दिशा की प्रतीति होती है! यह पुस्तक हाशिए का विमर्श ही नहीं, हाशिए का विकल्प-पाठ भी प्रस्तुत करती है!

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    Ramsharan Joshi

    रामशरण जोशी
    मार्च, 1944 में अलवर (राजस्थान) में जन्मे रामशरण जोशी पेशे से पत्रकार, सम्पादक, समाजविज्ञानी और मीडिया के अध्यापक रहे हैं। भारतीय जनसंचार संस्थान में विजिटिंग प्रोफेसर। 1999 से 2004 तक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में पूर्णकालिक प्रोफेसर और कार्यपालक निदेशक के पद पर कार्यरत रहे। आप राष्ट्रीय बाल भवन के अध्यक्ष और केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के उपाध्यक्ष भी रहे हैं। महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा में विजिटिंग प्रोफेसर रहे हैं। आपकी प्रमुख कृतियाँ हैं—'आदमी, बैल और सपने', 'आदिवासी समाज और विमर्श', '21वीं सदी के संकट', 'मीडिया विमर्श' आदि।
    आपको बिहार सरकार द्वारा 'राजेन्द्र माथुर राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार', मध्य प्रदेश सरकार का 'राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान', हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा 'पत्रकारिता सम्मान', 'गणेश शंकर विद्यार्थी साम्प्रदायिक सौहार्द पुरस्कार' से सम्मानित किया जा चुका है। आप फिलहाल नई दिल्ली में परिवार के साथ रहते हुए स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं।
    joshisharan1@gmail.com

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