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Adab Mein Baaeen Pasli : Bhartiya Urdu Kahaniyan : Vol. 5

Adab Mein Baaeen Pasli : Bhartiya Urdu Kahaniyan : Vol. 5

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  • Pages: 342
  • Year: 2017, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789386863102
  •  
    Digital Edition Available Instantly on Pajkamal Books Library on
    उर्दू भाषा का जन्म हिंदुस्तान में हुआ। मातृभाषा जो भी हो मगर लिखनेवाले उर्दू में लिखते रहे। इसलिए जहाँ उर्दू का विस्तार बढ़ा, वहीं पर उसके पढऩेवालों की दिमागी फिज़ा भी रौशन और खुली बनी। भाषा पर किसी धर्म और विचारधारा की हुकूमत नहीं हो सकती है, जो ऐसा सोचते हैं वे अपना ही नहीं अपनी भाषा के विकास का भारी नुकसान करते हैं। अपनी ऐतिहासिक धरोहर को वक्ती सियासी मुनाफे का मोहरा बनाकर उनका व्यक्तिगत लाभ हो सकता है, मगर बड़े पैमाने पर हम उर्दू साहित्य का खजाना, खो बैठेंगे और साथ ही हिंदी भाषा साहित्य का भी नुकसान करेंगे। अनेक लेखकों की हिंदी भाषा लिपि में लिखी कहानियों में उर्दू शब्द नगीने की तरह जड़े नज़र आते हैं, जो भाषा को नया सौंदर्य देते हैं। उनको हटाकर वहाँ हिंदी भाषा के खालिस शब्द लगाने की मुहिम चलाएँगे तो उस गद्य का क्या बनेगा? हमारे बुजुर्गों ने औरतों के इतने शानदार चरित्र गढ़े हैं, जो आज भी जि़ंदा महसूस होते हैं जिनमें जि़ंदगी अपने सारे परिवेश के साथ धड़कती है और हर रंग में हमारे सामने अहसास का पिटारा खोलती है और इस विचार को पूर्ण रूप से रद्द कर देती है कि औरत के बारे में सिर्फ औरत ही ईमानदारी से लिख सकती है। यह सौ फीसदी सच है मगर कला इस तथ्य से आगे निकल कर हमें यह बताती है कि फन की दुनिया औरत-मर्द के इस फर्क को न मानती है न स्वीकार करती है। सबूत इन कहानियों के रूप में सामने है। इन कहानियों मेंं पूरी एक सदी का समय कैद है, जो हमारे बदलते खयालात, समाज, माहौल और इंसान को हमारे सामने एक सनद की शक्ल में पेश करते हैं। यह अलग बात है कि कुछ किरदार हमें बिल्कुल नए और वर्तमान में साँस लेते लगें।

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    Nasira Sharma

    नासिरा शर्मा

    नासिरा शर्मा का जन्म सन् 1948 में इलाहाबाद में हुआ। उन्होंने फारसी भाषा और साहित्य में एम.ए. किया। हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी, पश्तो एवं फारसी पर उनकी गहरी पकड़ है। वह ईरानी समाज और राजनीति के अतिरिक्त साहित्य, कला व संस्कृति विषयों की विशेषज्ञ हैं। इराक अफगानिस्तान, पाकिस्तान व भारत के राजनीतिज्ञों तथा प्रसिद्ध बुद्धिजीवियों के साथ उन्होंने साक्षात्कार किए, जो बहुचर्चित हुए। ईरानी बुद्धिजीवियों पर जर्मन व फ्रांसीसी दूरदर्शन के लिए बनी फिल्म में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। सर्जनात्मक लेखन में प्रतिष्ठा प्राप्त करने के साथ ही स्वतंत्र पत्रकारिता में भी उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया है।

    प्रकाशन

    उपन्यास : ‘सात नदियाँ एक समन्दर’, ‘शाल्मली’, ‘ठीकरे की मंगनी’,‘जि़ंदा मुहावरे’, ‘कुइयाँ जान’, ‘ज़ीरो रोड’, ‘अक्षयवट’, ‘अजनबी ज़जीरा’, ‘पारिजात’, ‘कागज़ की नाव’, ‘शब्द पखेरु’, ‘दूसरी जन्नत’।

    कहानी-संग्रह : ‘शामी कागज़’, ‘पत्थर गली’, ‘संगसार’, ‘इब्ने मरियम’, ‘सबीना के चालीस चोर’,  ‘खुदा की वापसी’, ‘बुतखाना’, ‘दूसरा ताजमहल’, ‘इनसानी नस्ल’।

    ‘अफगानिस्तान : बुज़कशी का मैदान’ (संपूर्ण अध्ययन दो खंडों में), ‘मरजीना का देश इराक’।

    लेख-संग्रह : ‘राष्ट्र और मुसलमान’, ‘औरत के लिए औरत’, ‘औरत की दुनिया’, ‘वो एक कुमारबाज़ थी’, ‘औरत की आवाज़’।

    रिपोर्ताज : ‘जहाँ फौव्वारे लहू रोते हैं’।

    संस्मरण : ‘यादों के गलियारे’।

    अनुवाद : ‘शहनामा फिरदौसी’, ‘गलिस्तान-ए-सादी’, ‘किस्सा जाम का’, ‘काली छोटी मछली’, ‘पोयम ऑफ परोटेस्ट’, ‘बर्निंग पायर’, ‘अदब में बायीं पसली’।

    आलोचना : ‘किताब के बहाने’, ‘सबसे पुराना दरख्त’।

    विविध : ‘जब समय बदल रहा हो इतिहास’।

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