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Ak Naukrani Ki diary

Ak Naukrani Ki diary

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  • Pages: 230p
  • Year: 2011
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126714155
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    प्रख्यात उपन्यासकार कृष्ण बलदेव वैद का यह उपन्यास हमारे नागर–समाज के उस उपेक्षित तबके पर केन्द्रित है जिसकी समस्याआंे पर हम संवेदनशील तरीके से कभी बात नहीं करते मगर जिसके बिना हमारा हमार काम भी नहीं चल पाता । शहरों के घरों में चैका–बरतन और सफाई इत्यादि करनेवाली नौकरानियों कीे रोजमर्रा की जिन्दगी और उनकी मानसिकता इसका केन्द्रीय विषय है । एक युवा होती नौकरानी की मानसिक उथल–पुथल को लेखक ने इस उपन्यास में बड़े ही मार्मिक ढंग से चित्रित किया है तथा डायरी के मा/यम से बड़ी कुशलता पुर्वक से इस उपेक्षित वर्ग के साथ–साथ हमारे कुलीन समाज की विडम्बना को भी पहचानने–परखने का अवसर दिया है । प्रवाहपूर्ण भाषा में लिखित यह उपन्यास फ्रायड के उस उपन्यास की याद दिलाता है जो उन्होंने एक युवा होती लड़की की मानसिकता का चित्रण करने के उद्देश्य से डायरी के रूप में लिखा था । यह उपन्यास आरम्भ से ही पाठक की जिज्ञासा को जगाने में सफल है । उपन्यास की नायिका शानो हिन्दी साहित्य का वह चरित्र है जिसे पाठक हमेशा याद रखेंगे ।

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    Krishna Baldev Vaid

    जन्म: 27 जुलाई, 1927, डिंगा (पंजाब)। शिक्षा: एम.ए. (अंग्रेज़ी), पंजाब विश्वविद्यालय (1949), पी-एच.डी., हार्वर्ड विश्वविद्यालय (1961)।

    अध्यापन: हंसराज कॉलिज, दिल्ली विश्वविद्यालय (1950- 62); अंग्रेज़ी विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ (1962- 66); अंग्रेज़ी विभाग, न्यूयॉर्क स्टेट विश्वविद्यालय (1966- 85); अंग्रेज़ी विभाग, ब्रेंडाइज़ विश्वविद्यालय (1968-69)। अन्य अनुभव: अध्यक्ष, निराला सृजन पीठ, भारत भवन, भोपाल (1985-88)।

    प्रकाशित कृतियाँ: उपन्यास: उसका बचपन, बिमल उपऱ्$ जाएँ तो जाएँ कहाँ, नसरीन, दूसरा न कोई, दर्द ला दवा, गुज़रा हुआ ज़माना, काला कोलाज, नर-नारी, मायालोक, एक नौकरानी की डायरी। कहानी-संग्रह: बीच का दरवाज़ा, मेरा दुश्मन, दूसरे किनारे से, लापता, उसके बयान, मेरी प्रिय कहानियाँ, वह और मैं, ख़ामोशी, आलाप, प्रतिनिधि कहानियाँ, लीला, चर्चित कहानियाँ, पिता की परछाइयाँ, दस प्रतिनिधि कहानियाँ, सम्पूर्ण कहानियाँ (दो जिल्दों में): मेरा दुश्मन, रात की सैर, बोधिसत्व की बीवी, ‘बदचलन’ बीवियों का द्वीप। नाटक: भूख आग है, हमारी बुढ़िया, सवाल और स्वप्न, परिवार अखाड़ा। समीक्षा: टेकनीक इन दि टेल्ज़ ऑफ़ हेनरी जेम्ज़।

    अनुवाद: अंग्रेज़ी में: स्टेप्स इन डार्कनेस (उसका बचपन), बिमल इन बाग (बिमल उपऱ्$ जाएँ तो जाएँ कहाँ), डाइंग अलोन (दूसरा न कोई और दस कहानियाँ), द ब्रोकन मिरर (गुज़रा हुआ ज़माना), सायलेंस (चुनी हुई कहानियाँ), इन द डार्क (मुक्तिबोध: अँधेरे में), फ़ायर इन दि बैली / आवर ओल्ड वोमन (भूख आग है / हमारी बुढ़िया)।

    हिन्दी में: गॉडो के इन्तज़ार में (बेकिट), आखि़री खेल (बेकिट), फ़ेड्रा (रासीन), एलिस अजूबों की दुनिया में (लुईस केरल)।

    अनेक रचनाओं के अनुवाद बंगला, उर्दू, गुजराती, तमिल, मलयाली, मराठी आदि अन्य भारतीय भाषाओं और अंग्रेज़ी के अलावा जर्मन, इतालवी, हिस्पानवी, फ्रांसीसी, नार्विजियन, स्वीडिश और पोलिश में प्रकाशित हो चुके हैं।

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