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Ant Ka Ujala

Ant Ka Ujala

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  • Pages: 112
  • Year: 2012, 1st Ed
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126722945
  •  
    यह वाक्य प्रायः सुनने को मिलता है कि हिंदी में मौलिक नाट्यालेखों का अभाव है | इस अभाव को कृष्ण बलदेव वैद सरीखे वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित रचनाकार काफी हद तक दूर करते हैं | भूख आग है, हमारी बुढिया, सवाल और स्वप्न एवं परिवार अखाड़ा जैसे उनके उल्लेखनीय नाटकों ने हिंदी रंगकर्म को पर्याप्त समृद्ध किया | इसी क्रम में कृष्ण बलदेव वैद का नया नाटक 'अंत का उजाला' कुछ नए रचनात्मक प्रयोगों के साथ उपस्थित है | यह विदित है कि वैद भाषा में निहित अर्थों व् ध्वनियों के साथ मानीखेज खिलवाड़ करते हैं | कथ्य और शिल्प में नए प्रयोग करते हुए वे किसी बड़े जीवन सत्य को रेखांकित करते हैं 'अंत का उजाला' जीवन की वृद्धावस्था में ठहरे पति-पत्नी की मनोदशा को एक 'अनौपचारिक भाषिक उपक्रम' में व्यक्त करता है | सावधानी से पढ़े/अनुभव करें तो पूरा नाटक प्रतीकों से भरा है | लेखक एक स्थान पर कहता है, 'एक आदर्श प्रतीक की तरह उसे याद भर किया है | खाने और पीने को भी एक प्रतीक ही समझो |' नाटक बड़े सलीके से जीवनान्त के उजाले को संवादों में शामिल करता है | दो पात्रों के सुदीर्घ साहचर्य से उत्पन्न जीवन रस पाठकों को अभिभूत करता है | प्रयोगात्मकता और प्रतीकधर्मिता के कारण 'अंत का उजाला' नाटक महत्त्पूर्ण हो उठता है |

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    Krishna Baldev Vaid

    जन्म: 27 जुलाई, 1927, डिंगा (पंजाब)। शिक्षा: एम.ए. (अंग्रेज़ी), पंजाब विश्वविद्यालय (1949), पी-एच.डी., हार्वर्ड विश्वविद्यालय (1961)।

    अध्यापन: हंसराज कॉलिज, दिल्ली विश्वविद्यालय (1950- 62); अंग्रेज़ी विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ (1962- 66); अंग्रेज़ी विभाग, न्यूयॉर्क स्टेट विश्वविद्यालय (1966- 85); अंग्रेज़ी विभाग, ब्रेंडाइज़ विश्वविद्यालय (1968-69)। अन्य अनुभव: अध्यक्ष, निराला सृजन पीठ, भारत भवन, भोपाल (1985-88)।

    प्रकाशित कृतियाँ: उपन्यास: उसका बचपन, बिमल उपऱ्$ जाएँ तो जाएँ कहाँ, नसरीन, दूसरा न कोई, दर्द ला दवा, गुज़रा हुआ ज़माना, काला कोलाज, नर-नारी, मायालोक, एक नौकरानी की डायरी। कहानी-संग्रह: बीच का दरवाज़ा, मेरा दुश्मन, दूसरे किनारे से, लापता, उसके बयान, मेरी प्रिय कहानियाँ, वह और मैं, ख़ामोशी, आलाप, प्रतिनिधि कहानियाँ, लीला, चर्चित कहानियाँ, पिता की परछाइयाँ, दस प्रतिनिधि कहानियाँ, सम्पूर्ण कहानियाँ (दो जिल्दों में): मेरा दुश्मन, रात की सैर, बोधिसत्व की बीवी, ‘बदचलन’ बीवियों का द्वीप। नाटक: भूख आग है, हमारी बुढ़िया, सवाल और स्वप्न, परिवार अखाड़ा। समीक्षा: टेकनीक इन दि टेल्ज़ ऑफ़ हेनरी जेम्ज़।

    अनुवाद: अंग्रेज़ी में: स्टेप्स इन डार्कनेस (उसका बचपन), बिमल इन बाग (बिमल उपऱ्$ जाएँ तो जाएँ कहाँ), डाइंग अलोन (दूसरा न कोई और दस कहानियाँ), द ब्रोकन मिरर (गुज़रा हुआ ज़माना), सायलेंस (चुनी हुई कहानियाँ), इन द डार्क (मुक्तिबोध: अँधेरे में), फ़ायर इन दि बैली / आवर ओल्ड वोमन (भूख आग है / हमारी बुढ़िया)।

    हिन्दी में: गॉडो के इन्तज़ार में (बेकिट), आखि़री खेल (बेकिट), फ़ेड्रा (रासीन), एलिस अजूबों की दुनिया में (लुईस केरल)।

    अनेक रचनाओं के अनुवाद बंगला, उर्दू, गुजराती, तमिल, मलयाली, मराठी आदि अन्य भारतीय भाषाओं और अंग्रेज़ी के अलावा जर्मन, इतालवी, हिस्पानवी, फ्रांसीसी, नार्विजियन, स्वीडिश और पोलिश में प्रकाशित हो चुके हैं।

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