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Apna Vajood

Apna Vajood

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  • Pages: 83p
  • Year: 2003
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 8171198325
  •  
    श्यामपलट पांडेय का यह तीसरा कविता-संग्रह है। पांडेय वर्तमान समय और उससे जन्मे प्रत्यक्ष आवेग के कवि हैं। हमारा सामाजिक परिवेश जीवन-मूल्यों की टूटन और त्रासद स्थितियों के तनाव से भरा हुआ है। एक संवेदन- शील कवि के लिए हमारे इस वर्तमान की कोई भी शक्ल अनिवार्यतः एक विडम्बना-बोध से ही जन्म लेती है। इन कविताओं में रोजमर्रा के जीवन के संदर्भ हैं, छोटे-बड़े प्रसंग और परिस्थितियाँ हैं। पांडेय जीवन के विद्रूप से सीधे मुठभेड़ करते हैं। कहीं इन कविताओं में एक विकलता है तो कहीं एक प्रश्नाकुलता। कहीं अपने रचना-कर्म के प्रति ही एक बुनियादी संशय का भाव भी। दरअसल यही हमारे समय के अनुभव के विभिन्न शेड्स हैं। विसंगतियों के चित्रों के साथ इन कविताओं में परिवर्तन की एक बुनियादी कामना भी है। तिक्त अनुभवों के बीच से उठी ये कविताएँ जीवन के किसी बेशकीमती तत्त्व को बचाए रखने की विकलता की कविताएँ हैं। महत्त्वपूर्ण यह भी है कि श्यामपलट पांडेय का कवि-मन अपने जातीय अनुभव-बोध की जमीन से गहरा जुड़ा हुआ है। विडम्बनाओं के चक्रव्यूह में फँसे हुए रचनाकार की अपनी जड़ों की ओर लौटने की एक बेचैनी इन कविताओं में दिखाई पड़ती है। इसीलिए आस-पास की दुनिया और घर-परिवार की अंतरंगता के अनेक चित्र इन कविताओं में मौजूद हैं। कहना न होगा कि कुटुम्ब से जुड़ी संवेदना हमारे समय में अमानवीय ताकतों के बरक्स एक नया अर्थ ग्रहण करती है। उसके नये सामाजिक-मनोवैज्ञानिक आशय बनते हैं। अपने पास-पड़ोस से यह लगाव इस दौर में या शायद किसी भी दौर में कविता को हमेशा आत्मीय और प्रामाणिक बनाता रहा है। पांडेय की ये कविताएँ वादों और मुहावरों के शोर-गुल से दूर अपनी नैसर्गिक ऊर्जा, जीवन राग और सहज अनुभूति के बल पर ‘अपने वजूद’ का एहसास कराती हैं। - कवि एवं आलोचक विजय कुमार

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    Shyampalat Pandey

    जन्म: 15 फरवरी, 1949, जामों, सुलतानपुर (उ.प्र.)

    शिक्षा: एम.ए. (हिन्दी साहित्य), 1969, लखनऊ विश्व- विद्यालय, लखनऊ, प्रथम श्रेणी तथा प्रथम स्थान के साथ, एल.एल.बी., 2007, गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद।

    विशेष रुचि: सम्पूर्ण भारत का कई बार भ्रमण। गढ़वाल, कुमाऊँ (उत्तरांचल), हिमाचल प्रदेश तथा गुजरात के अपरिचित आदिवासी अंचलों में दूर-दूर तक कई बार भ्रमण।

    व्यवसाय: 1969 से 1972 तक शिक्षण कार्य, 1974: उत्तर प्रदेश सिविल सेवा में डिप्टी कलेक्टर, 1974 से भारतीय राजस्व सेवा में।

    प्रकाशित कृतियाँ: अँधेरे से अँधेरा काटता हूँ, 1987; धूप आज फिर उतरी है, 1995; ज्ीम श्रनदहसम व िैबतमंउे ंदक व्जीमत च्वमउेए (काव्य संग्रह); 35 हिन्दी कविताओं का अंग्रेजी अनुवाद, 2001; पूर्वोत्तर भारत में बहुचर्चित एवं हिन्दी तथा अंग्रेजी के वरिष्ठ कथाशिल्पी, समीक्षक, निबन्धकार एवं अनुवादक प्रो. उदयभानु पांडेय द्वारा अनूदित सेउरर अरन्य; (काव्य संग्रह); 45 हिन्दी कविताओं का पूर्वांचल के अग्रगण्य अनुवादक, सुपरिचित पत्रकार, कवि, जीवनीकार एवं कथाकार श्री दिनकर कुमार द्वारा असमिया भाषा में अनुवाद; अपना वजूद, 39 हिन्दी कविताओं का तीसरा संग्रह, 2003

    सम्मान: अपना वजूद के लिए ‘घनश्यामदास सर्राफ साहित्य पुरस्कार’ योजना के अन्तर्गत हिन्दी भाषा के प्रतिष्ठित सम्मान ‘सर्वोत्तम साहित्य पुरस्कार-2003’ से सम्मानित।

    संपर्क: 907, पंचतीर्थ अपार्टमेंट, जोधपुर चार रास्ता, सेटेलाइट, अहमदाबाद-380015; फोन-9427310604

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