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Apne Gireban Mein

Apne Gireban Mein

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  • Pages: 247p
  • Year: 1999
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 10: 8171194419
  •  
    अपने गिरेबान में कोई ज़माना था जब दिल्ली से निकलने वाले अख़बार राष्ट्रीय और लखनऊ-लुधियाना से निकलने वाले अख़बार क्षेत्रीय कहे जाते थे। हिंदी अख़बारों की दुनिया इस बीच बहुत बदल चुकी हैै। सैटेलाइट संस्करणों ने जो महादृश्य उपस्थित किया है उसने हिंदी अख़बारों की बाज़ार शक्ति की नए सिरे से पहचान कराई है। पारंपरिक अर्थ में गढ़ कहे जाने वाले, ध्वस्त हो रहे हैं। संपादक और स्वामी के पारस्परिक रिश्तों ने नई शक्ल ले ली है। ज़बर्दस्त पूँजी निवेश, आक्रामक बाज़ार नीति तथा पत्रकारिक फ़ैशन परेड का नया पैकेज सामने आ रहा है। प्रसार की उछाल में पाठक के लिए नए विकल्प खुले हैं। लेकिन क्या यह नई दुनिया सचमुच एक अद्भुत दुनिया है। एक रचनाकार होने के साथ-साथ, पत्रकारिता की उसी बदलती हुई दुनिया के अनुभव का हिस्सा होते हुए यशवंत व्यास जब क्षेत्रीय पत्रकारिता में बदलाव को आँकते हैं तो उनकी दृष्टि गहरी संवेदना से युक्त होती है। वे निरंतर हो रहे परिवर्तनों को गहन अनुभूतियों तथा स्पष्ट तथ्यों के बीच दर्ज करते हैं। इसके लिए वे न सिर्फ़ भाषा के स्तर पर बल्कि प्रस्तुति पर भी शोध को नया, ताज़गीभरा आकार देते हैं। अंतर्विरोधों की पहचान के प्रति पैनी दृष्टि तथा क्षेत्रीय पत्रकारिता में सफलता-असफलता की गंभीर पड़ताल करने की कोशिशों जैसी खूबियों के चलते अपने गिरेेबान में समकालीन क्षेत्रीय हिंदी पत्रकारिता पर एक विशिष्ट और महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ है।

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    Yashwant Vyas

    जन्म : 1964। पहली नौकरी नईदुनिया में। इसके बाद अलग-अलग जगह संपादक और सलाहकार। शुरूआत मध्यप्रदेश से, लंबा वक्त राजस्थान में। नवज्योति, दैनिक भास्कर और एक पोर्टल में प्रमुख  रहने के अलावा अपने किस्म की पहली पत्रिका 'अहा जि़न्दगी’ के संस्थापक संपादक। पत्रकारिता के लिए बिड़ला फेलोशिप। यारी दुश्मनी, तथास्तु, रसभंग और नमस्कार सहित कई लोकप्रिय कॉलम। अब तक करीब दस किताबें, जिसमें पत्रकारिता पर 'अपने गिरेबान में’ और 'कल की ताजा खबर’ शामिल। दो उपन्यास 'चिंताघर’ और 'कॉमरेड गोडसे’, दोनों पुरस्कृत। व्यंग्य संग्रह 'जो सहमत हैं सुनें’, 'इन दिनों प्रेम उर्फ लौट आओ नीलकमल’, 'यारी दुश्मनी’ और 'अब तक छप्पन’ प्रकाशित। अमिताभ बच्चन के ब्रांड विश्लेषण पर 'अमिताभ का अ’ और कॉरपोरेट मैनेजमेंट पर हिन्दी-अंग्रेजी में 'द बुक ऑफ रेज़र मैनेजमेंट : हिट उपदेश’ भी। कई पुरस्कार। फिलहाल दिल्ली में अमर उजाला समूह के सलाहकार।

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