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Ateet Rag

Ateet Rag

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  • Year: 2009
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126717590
  •  
    ये वृत्तांत किसी भी व्यक्ति के जीवन का विशद ब्यौरा नहीं है; आदि से अंत तक उसे जानने का या उसके जीवन-आवेगों में रहस्यों को किसी मनोचिकित्सक की तरह देखने का। यह सिर्फ़ ज़िन्दगी के उस हिस्से को देखने की कोशिश है जो समाज से जुड़ी है और ‘सामाजिकता’ का बहुमूल्य हिस्सा है। ‘अतीत राग’ समान विचार वाले पड़ोसियों का इलाका है। इसके ज्यादातर पड़ोसी लेखक के समाजवादी साथी और साहित्यकार मित्र हैं जो शोषण-मुक्त समाज-रचना के लिए प्रतिबद्ध हैं। ‘भारतीय समाजवाद’ आज़ादी के बाद वाले दिनों में अपनी थोड़ी-सी क्रांतिकारी पहचान बनाकर विलुप्त हुआ काल-खंड है। बदलाव के इस काल-खंड में कोई विरल सिद्धांतकार नहीं मिला; जो थे वे जयप्रकाश नारायण, डॉ. राममनोहर लोहिया, आचार्य नरेंद्र देव, अशोक मेहता आदि थे। वे कांग्रेस की ‘ढीली चाल’ और पूंजीपतियों के प्रति अनुकूल आचरण से सैद्धांतिक मतभेद रखते थे। लेकिन पार्टी के लिए जैसे संगठित नेतृत्व और बदलाव की दिशा चाहिए थी, उसका विश्वसनीय घोषणा-पत्र तैयार करने में वे कामयाब नहीं हुए। एक अर्थ में समाजवादी पार्टी समाप्त हो गई थी लेकिन एक अदृश्य समाजवादी पार्टी मन में बनी थी, वह बनी रही। वे जो सिर्फ़ पार्टी के उसूलों के लिए नहीं, ज़िंदगी के गंभीर उसूलों के लिए समर्पित थे, अडिग रहे, सब जैसे रिश्तेदार हो गए। वे बड़े लोग नहीं थे। कोई स्टेशन का कुली था, कोई सड़क के किनारे चाय बनाता था या शहर में पार्टी चलाता था, हीरालाल जैन थे या राजेंद्रजी, नरेंद्रजी थे या जयप्रकाश नारायण या फिर राममनोहर लोहिया थे; सब स्मृतियों में बस गए और उनकी ‘करनी की चारुता’ समृद्धि-संपदा की ललक को दोनों हाथों से उलीचकर फेंकने के साहस को मैंने देखा। जो देखा, उसमें से वही चुना, जो ‘लोकार्पित’ था और जो लोक-रचना का भविष्य हो सकता था। वह विशेष, जो उन्होंने जीवन से मृत्यु तक चुना। मैंने भी उनकी स्मृति में उसे ही रेखांकित किया है। - इसी पुस्तक से

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    Nand Chaturvedi

    नन्द चतुर्वेदी

    जन्म : 21 अप्रैल, 1923 को रावजी का पीपत्या (पहले राजस्थान में अब मध्य प्रदेश में)।

    शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी), बी.टी.।

    कर्म-क्षेत्र : 1950 से 1955 तक गोविन्दराम सेकसरिया टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज में प्राध्यापक; 1956 से 1981 तक विद्याभवन रूरल इंस्टीट्यूट में हिन्दी प्राध्यापक।

    लेखन : ब्रजभाषा में कविता लिखना प्रारम्भ किया। कविता के लिए पहला पुरस्कार बारह वर्ष की आयु में। राष्ट्र की स्वाधीनता और सामाजिक-आर्थिक गैर-बराबरियों को रेखांकित करते हुए घनाक्षरी, सवैया, पद, दोहा पदों में रचनाएँ। हिन्दी (खड़ी बोली) में चतुष्पदियों, गीत से लगाकर अतुकान्त-आधुनिक कविताओं का सृजन। 'सप्तकिरण’, 'राजस्थान के कवि’ (भाग 1), 'इस बार’ (अध्यापकों का कविता संग्रह), 'जयहिन्द’ (समाजवादी साप्ताहिक) से लेकर 'जनमन’, 'जन-शिक्षण’, 'मधुमती’ तथा चिन्तन-प्रधान साहित्यिक पत्रिका 'बिन्दु’ का सम्पादन। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की उच्च कक्षाओं के लिए कहानी तथा गद्य की अन्य विधाओं का संग्रह सम्पादन। राजस्थान साहित्य अकादमी के लिए प्रान्त के प्रख्यात रचनाकारों पर 'मोनोग्राफ’ लेखन।

    प्रकाशित कृतियाँ : गा हमारी जिन्दगी कुछ गा, उत्सव का निर्मम समय, जहाँ उजाले की एक रेखा खींची है, यह समय मामूली नहीं, ईमानदार दुनिया के लिए, वे सोये तो नहीं होंगे (कविता संग्रह), शब्द संसार की यायावरी, यह हमारा समय, अतीत राग (गद्य), सुधीन्द्र (व्यक्ति और कविता), राजस्थान साहित्य अकादमी की पुरोधा शृंखला के अन्तर्गत प्रकाशित।

    सम्मान : मीराँ पुरस्कार—राजस्थान साहित्य अकादमी का सर्वोच्च पुरस्कार; बिहारी पुरस्कार—के.के. बिड़ला फाउंडेशन; लोकमंगल, मुम्बई पुरस्कार; अखिल भारतीय आकाशवाणी सम्मान (श्रेष्ठ वार्ताकार) आदि।

    यात्रा : छठे विश्व हिन्दी सम्मेलन, लन्दन में राजस्थान राज्य द्वारा भेजे गए प्रतिनिधि मंडल के सदस्य।

    सम्प्रति : स्वतंत्र लेखन।

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