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Ba Se Bank

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  • Pages: 87p
  • Year: 2003
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 812670652x
  •  
    हिन्दी के सुपरिचित कथाकार-व्यंग्यकार सुरेश कांत का यह व्यंग्य-उपन्यास एक बैंक की अंदरूनी कहानी कहता है, जिसके माध्यम से बैंक-कर्मचारियों के दैनंदिन क्रियाकलापों का जायजा लिया गया है । इसमें एक तरफ बैंक-मैनेजर के अंधविश्वासों पर चुटीली टिप्पणी है तो दूसरी ओर कर्मचारियों की कामचोरी के साथ ही उनकी समस्या और उनके सुख-दुख को भी लेखक ने अनदेखा नहीं किया है और बैंक का सारा कारोबार जिन ग्राहकों के बिना अधूरा है, उनकी परेशानियाँ और शिकायतें भी यहाँ मौजूद हैं । लेकिन सबकुछ इतना पूर्वग्रहमुक्‍त और सहज- स्फूर्त है कि व्यंग्य में कहीं कटुता नहीं आती, वह मीठी मार से अपना काम करता चलता है । सुरेश कांत बैंक में कार्यरत हैं, इसलिए स्वभावत: जिन घटनाओं उघैर प्रसंगों का चित्रण उन्होंने यहाँ किया है, वे प्रामाणिक और विश्वसनीय तो हैं ही, लेखक की मानवीय दृष्टि का स्पर्श पाकर प्रभावोत्पादक भी हो गए हैं ।

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    Suresh Kant

    चर्चित हिंदी-लेखक सुरेश कांत ने प्रायः सभी विधाओं में अपनी 25 से भी अधिक कृतियों द्वारा हिंदी-साहित्य को एक नई ताजगी दी है। उनकी अनेक कृतियाँ साहित्य कला परिषद (दिल्ली), हिंदी अकादमी (दिल्ली), उ.प्र. हिंदी संस्थान (लखनऊ) आदि द्वारा पुरस्कृत की जा चुकी हैं। उनके नुक्कड़ व्यंग्य-नाटक ‘विदेशी आया’ के 100 से भी ज्यादा प्रदर्शन हो चुके हैं। दैनिक ‘अमर उजाला कारोबार’ में हर रविवार को प्रकाशित होने वाला उनका साप्ताहिक व्यंग्य-कॉलम ‘अर्थसत्य’ और हर मंगलवार को प्रकाशित होने वाला उनका साप्ताहिक प्रबंधन-कॉलम बहुत चर्चित हुए हैं। उनकी प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ इस प्रकार हैं:

    व्यंग्य: ब से बैंक (पुरस्कृत), अफसर गए विदेश (पुरस्कृत), पड़ोसियों का दर्द, बलिहारी गुरु (पुरस्कृत), अर्थसत्य।

    उपन्यास: धम्मं शरणम् (पुरस्कृत), युद्ध, जीनियस, नवाब साहब, कनीज।

    कहानी: उत्तराधिकारी, गिद्ध, क्या आप एस.पी. दीक्षित को जानते हैं ?

    नाटक: रजिया, प्रतिशोध, विदेशी आया, गवाही, कौन ?

    बाल-साहित्य: कुट्टी, रोटी कौन खाएगा, चलो चाँद पर घूमें, भाषण बाबू, भैंस का अंडा, विश्वप्रसिद्ध बाल कहानियाँ (पाँच भाग)।

    अन्य: प्रबंधन के गुरुमंत्र, कुशल प्रबंधन के सूत्र, बैंकों में हिंदी का प्रयोग, इन्साइक्लोपीडिक डिक्शनरी ऑफ बैंकिंग एंड रिलेटिड टर्म्स (शीघ्र प्रकाश्य) आदि।

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      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
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