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Bandi Jeevan Aur Anya Kavitayen (Raza Pustak Mala)

Bandi Jeevan Aur Anya Kavitayen (Raza Pustak Mala)

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  • Pages: 118p
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9789388933728
  •  
    कई महीनों से इन कविताओं की पाण्डुलिपि मुझे लगातार अपने वादे की याद दिलाती हुई मेरे पास थी कि मुझे भूमिका के रूप में कुछ लिखना है। इस दौरान मैंने कई विषयों पर लिखा है, लेकिन यह भूमिका लिखना मेरे लिए अजीब तरह से मुश्किल रहा। मैं कविता का निर्णायक अथवा आलोचक नहीं हूँ, इसलिये कुछ हिचकिचाहट थी। लेकिन मैं कविता से प्यार करता हूँ और इन छोटी कविताओं में से कई ने मुझे बहुत प्रभावित किया। वे मेरी स्मृति में अटक गयीं और उन्होंने मेरे जेल-जीवन की यादें ताज़ा कर दीं—और उस अजीब और भुतही दुनिया की भी, जिसमें समाज द्वारा अपराधी मानकर बहिष्कृत लोग अपनी तंग और सीमित जि़न्दगी को प्यार करते थे। वहाँ हत्यारे थे, डाकू और चोर भी थे, लेकिन हम सब जेल की उस दु:खभरी दुनिया में साथ-साथ थे, हमारे बीच एक जज़्बाती रिश्ता था। अपनी एकाकी कोठरियों में ही हम चहलकदमी करते—पाँच नपे-तुले कदम इस तरफ और पाँच नपे-तुले कदम वापस, और दु:ख से संवाद करते रहते। दोस्त-अहबाब और आसरा खयालों में ही मिलता और कल्पना के जादुई कालीन पर ही हम अपने माहौल से उड़ पाते। हम दोहरी जि़न्दगी जी रहे थे—जेल की ज़ेरेहुक्म और तंग, बन्द और वर्जित जि़न्दगी और जज़्बात की, अपने सपनों और कल्पनाओं, उम्मीदों और अरमानों की आज़ाद दुनिया। उन सपनों का बहुत-सा इन कविताओं में है, उस ललक का जब बाँहें उसके लिये फैलती हैं जो नहीं है और एक खालीपन हाथ आता है। कुछ वह शान्ति और तसल्ली जिन्हें हम उस दु:खभरी दुनिया में भी किसी तरह पा लेते थे। कल की उम्मीद हमेशा थी, कल जो शायद हमें आज़ादी दे। इसलिये मैं इन कविताओं को पढऩे की सलाह देता हूँ और शायद वे मेरी ही तरह दूसरों को भी प्रभावित करेंगी। —जवाहरलाल नेहरू

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    Agyey

    अज्ञेय

    अज्ञेय—एक ऐसा नाम—जिससे न सिर्फ हिन्दी साहित्य बल्कि पूरा भारतीय साहित्य समृद्ध होता है। बीसवीं शताब्दी के एक ऐसे कालजयी रचनाकार जिन्होंने अपने युग की प्रवृत्तियों को अपने 'विजन’ से सम्पूर्णता में प्रभावित किया।

    'भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार’, 'साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ सहित कई अन्य पुरस्कारों से सम्मानित अज्ञेय ने कविता, कहानी, उपन्यास, यात्रा-वृत्तान्त, आलोचना, निबन्ध, संस्मरण, डायरी, नाटक, चिन्तन आदि विधाओं में प्रचुर लेखन किया है। उन्होंने कई समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं और पुस्तकों का सम्पादन कर $कलम और कला का एक श्रेष्ठ मानदण्ड भी स्थापित किया।

    जन्म : 7 मार्च, 1911

    निधन : 4 अप्रैल, 1987

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