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Bazar Ke Bazigar

Bazar Ke Bazigar

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  • Pages: 167p
  • Year: 2007
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126714032
  •  
    कहिये कि हिंदी सिनेमा का नया सुनहरा दौर शुरू हो चुका है । एक बिलकुल नई जगमगाती पीढ़ी समूचे परिदृश्य पर कब्जा जमा चुकी है । उसने तमाम शक-शुब्‍हा नेस्तनाबूत कर अपनी फिल्मों में लोकप्रिय चरित्रों की ऐसी बुनियादें डाली हैं जिसने बीसवीं शताब्दी के तमाम प्रतिमानों की चूलें हिला दी हैं । स्थापित प्रतिमानों को खारिज करने की जहमत उठाने में इसकी कोई रुचि नहीं है । वह उन प्रतिमानों को अपने दौर के साथ खड़ा करती है । और उनसे एक कदम. आगे जाकर । कई मायनों में सौ कदम पीछे रहते हुए भी । वह जिसे प्रथम पुरुष कहा जाता है, कोई चालीस साल बाद अपनी किताबी जुबान की चौहद्दी से बाहर निकला है । आज आशुतोष गोवारीकर, संजय लीला भंसाली, मधुर भंडारकर, राजकुमार हीरानी, करन जौहर और आदित्य चोपड़ा उन फिल्मकारों के नाम हैं जिनकी फिल्में सिर्फ सितारों के नाम से नहीं पहचानी जातीं । आज फिर परिदृश्य सुनहरे दौर की तरह ही भरा-पूरा है । इसमें कोई शक नहीं कि यह एक नए सुनहरे दौर की शुरुआत है । लेकिन बस शुरुआत ।

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    Prahlad Agarwal

    प्रह्लाद अग्रवाल

    यायावर, आवारामिज़ाज। संगीत, साहित्य और सिनेमा से गहरी आशि$की। पिछले तीन दशकों में बहुआयामी लेखन। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरन्तर प्रकाशन।

    शासकीय स्वशासी महाविद्यालय में प्राध्यापक-पद से सेवानिवृत्त।

    प्रकाशित पुस्तकें :

    हिन्दी कहानी : सातवाँ दशक (आलोचना); तानाशाह (उपन्यास); राजकपूर : आधी हकीकत आधा फसाना, प्यासा : चिर अतृप्त गुरुदत्त, कवि शैलेन्द्र : जि़न्दगी की जीत में यकीन, उत्ताल उमंग : सुभाष घई की फिल्मकला, बाज़ार के बाजीगर : इक्कीसवीं सदी का सिनेमा, ओ रे मांझी... : बिमलराय का सिनेमा, जुग जुग जिए मुन्नाभाई : छवियों का मायाजाल, रेशमी ख़्वाबों की धूप-छाँव : यश चोपड़ा का सिनेमा, महाबाज़ार के महानायक (सिनेमा)।

    ‘प्रगतिशील वसुधा’ के बहुचर्चित फिल्म विशेषांक ‘हिन्दी सिनेमा : बीसवीं से इक्कीसवीं सदी तक’ का सम्पादन एवं कई पुस्तकों के सहयोगी लेखक।

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