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Benipuri Granthawali : Vols. 1-8

Benipuri Granthawali : Vols. 1-8

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Special Price Rs. 6,480

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  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788171194247
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    श्रीरामवृक्ष बेनीपुरी बीसवीं सदी के उन हिंदी लेखकों में हैं जिन्होंने साहित्य और पत्रकारिता को नई दिशा दी । साहित्य की विभिन्न विधाओं में उन्होंने श्रेष्ठतम लेखन किया । कथा-साहित्य और नाटक में नए प्रयोग किए और कालजयी कृतियों की रचना की । इसी तरह राजनैतिक और साहित्यिक दोनों ही तरह की पत्रकारिता को उन्होंने अपनी सशक्त लेखनी से नया रूप दिया । स्वाधीनता सेनानी बेनीपुरी समाजवाद की राजनीति के आरंभकर्ताओं में रहे हैं । उनका यह बहुमुखी व्यक्तित्व उन्हें २०वीं सदी के महानायकों की कतार में खड़ा करता है । जिंदगी की बहुस्तरीय व्यस्तताओं के बावजूद उन्होंने अनवरत साहित्य-लेखन किया और महान साहित्य की रचना की । उनका संपूर्ण लेखन अग्रगामी मनुष्य के लिए बहुमूल्य. पाथेय है । बेनीपुरी ग्रंथावली के आठ खंडों में हम यह दुर्लभ पाथेय प्रस्तुत कर रहे हैं । ग्रंथावली के पहले खंड में उनकी कहानियाँ, शब्दचित्र, उपन्यास, ललित निबंध, स्मृति चित्र और कविताएँ संकलित हैं । 'चिता के फूल' कहानी-सग्रह में शोषित समाज की पीड़ा को अभिव्यक्ति मिली है । 'लाल तारा', 'माटी की मूरतें' तथा 'गेहूँ और गुलाब' नामक शब्द-चित्र संग्रहों की रचनाओं में उन्होंने भारतीय गाँव के किसान-जीवन को संपूर्णता में अभिव्यक्त किया है । अपने उपन्यास 'पतितों के देश में' के अंतर्गत उन्होंने भारतीय जेल-जीवन के नरक से साक्षात्कार कराया है । 'कैदी की पत्नी' में एक स्वाधीनता सेनानी के उपेक्षित परिवार की कहानी कही है । ललित निबंध-संग्रह 'सतरंगा इंद्रधनुष' में उन्होंने लोक-संस्कृति के मानवीय स्वरूप और प्रकृति के सौंदर्य का दिलचस्प चित्रण किया है । 'गाँधीनामा' में दिवंगत पुत्र के लिए कैदी पिता की संवेदनात्मक यादें हैं । इस खंड की एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि बेनीपुरी की कविताएँ हैं जिनके अप्रकाशित होने की वजह से आलोचकों का ध्यान इस ओर नहीं गया । परिशिष्ट में बेनीपुरी का विस्तृत परिचय तथा उनके गाँव बेनीपुर का वृत्तांत भी शामिल है । जावर संयोजन : हरीश आनंद । कवर पर बेनीपुरी के गाँव स्थित घर का छायांकन : सुरेश शर्मा । बेनीपुरी का चित्र : 1951 ई. ।

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    Ramvriksha Benipuri

    रामवृक्ष बेनीपुरी

    जन्म: 23 दिसंबर 1899 ई., बेनीपुर, मुजफ्फरपुर (बिहार)। साधारण किसान परिवार। बचपन में ही माता-पिता का निधन। मैट्रिक की पढ़ाई के लिए मुजफ्फरपुर गए। उन्हीं दिनों 1920 के असहयोग आंदोलन में स्कूली शिक्षा छोड़ दी। साहित्य सम्मेलन से विशारद। स्वाधीनता सेनानी के रूप में लगभग नौ साल जेल में रहे। कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार के रूप में बिहार विधान सभा के लिए चुने गए। दिसंबर 1959 में पक्षाघात। लंबी बीमारी। अंततः 6 सितंबर 1968 को निधन।

    संपादित पत्र: तरुण भारत, किसान मित्र, गोलमाल, बालक, युवक, कैदी, लोक-संग्रह, कर्मवीर, योगी, जनता, तूफान, हिमालय, जनवाणी, चुन्नू-मुन्नू तथा नई धारा।

    कृतियाँ: कहानी संग्रह: चिता के फूल। शब्दचित्र-संग्रह: लाल तारा, माटी की मूरतें, गेहँू और गुलाब। उपन्यास: पतितों के देश में, कैदी की पत्नी। ललित-निबंध: सतरंगा इन्द्रधनुष। स्मृति-चित्र: गांधीनामा। कविताएँ: नया आदमी। नाटक: अम्बपाली, सीता की माँ, संघमित्रा, अमर ज्योति, ततागत, सिंहल विजय, शकुंतला, रामराजय, नेत्रदान, गांव का देवता, नया समाज और विजेता। निबंध: हवा पर, नई नारी, वंदे वाणी विनायकौ, अत्र तत्र। आत्मकथात्मक संस्मरण: मुझे याद है, जंजीरें और दीवारें, कुछ मैं कुछ वे। यात्रा साहित्य: पैरों में पंख बाँधकर, उड़ते चलो उड़ते चलो। जीवनी: शिवाजी, विद्यापति, लंगट सिंह, गुरु गोविंद सिंह, रोज लग्ज़ेम्बर्ग, जयप्रकाश, कार्ल मार्क्स। राजनीति: लाल चीन, लाल रूस, रूसी क्रांति।

    इसके अलावा बाल साहित्य की दर्जनों पुस्तकें तथा विद्यापति पदावली और बिहारी सतसई की टीका।

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