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Bhartiya Sahitya Mein Musalmanon ka Avdan

Bhartiya Sahitya Mein Musalmanon ka Avdan

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  • Pages: 276p
  • Year: 2012
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180314025
  •  
    ' भारतीय साहित्य में मुसलमानों का अवदान ', एक अत्यन्त महत्वपूर्ण अन्य है, जिसमें 29 भारतीय भाषाओं की एक साथ चर्चा की गयी है । इसके पूर्व ऐसा नहीं हो सका था । इन समस्त भाषाओं के विकास-क्रम तथा साहित्य-रचना में मुसलमानों का यथेष्ट अवदान रहा है । भारतीय साहित्य की मूल आत्मा अनेकता में एकता के रूप में ही प्रदर्शित हुई है । असंख्य परम्पराएँ, अनेकानेक बोलियाँ-भाषाएँ, विविध धार्मिक मान्यताएँ, फिर भी भारतीय जन एक सूत्र में बँधे हुए हैं । इस सूत्र को खोजने की प्रक्रिया में केके-बिरला फाउण्डेशन के एक उपयोगी परियोजना के अन्तर्गत प्रस्तुत अन्य की रचना हुई है । इस परियोजना का उद्देश्य विभिन्न भारतीय भाषाओं के बीच समन्वय स्थापित करना था । खेद है कि वर्तमान में यह परियोजना समाप्त की जा चुकी है, अन्यथा ऐसे ही कितने ग्रंथ अस्तित्व में आते । प्रख्यात् साहित्यकार प्रो. जाफर रजा बिरला फाउण्डेशन की उर्दू समिति के संयोजक तथा चयन परिषद् के सदस्य थे । उन्हें अपनी 'फेलोशिप' प्रदान करके फाउण्डेशन ने उपर्युक्त परियोजना स्वीकार करने का अनुरोध किया, जिसको उन्होंने समय-सीमा के भीतर ही सम्पन्न कर दिया । प्रो. जाफर रजा की प्रस्तुत पुस्तक हिन्दी-जगत् के लिए एक मूल्यवान् उपहार है । भारतीय साहित्य के अध्ययन में यह बुनियादी दस्तावेज है । नोएडा बिशन टंडन जनवरी

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    Jafar Reja

    जाफ़र रज़ा

    प्रख्यात विद्वान, साहित्यकार एवं चिन्तक प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा का जन्म 1 दिसम्बर, 1939 ई. को इलाहबाद में गंगा पार के उतराँव में हुआ । ये स्वतंत्रता-सेनानी एवं लेखक स्वर्गीय सैय्यद खैरात हसन के सुपुत्र हैं । इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उर्दू तथा हिंदी में दो बार 'डॉक्टर ऑफ़ फिलॉसफी' की उपाधियाँ प्राप्त कीं तथा कश्मीर विश्वविद्यालय, श्रीनगर ने प्रकाशित शोधग्रंथों की मान्यतारूपेण 'डॉक्टर ऑफ़ लेटर्स' की उपाधि प्रदान की ।

    इलाहबाद विश्वविद्यालय के गौरवपात्रिक प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा 35 वर्षों तक अध्यापन कर प्रेमचंद पीठाचार्य एवं उर्दू विभागाध्यक्ष पद से 2000 ई. में सेवानिवृत्त हुए ।

    प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा का व्यक्तित्व बहुआयामी है । हिंदी तथा उर्दू भाषाओँ एवं साहित्य के अतिरिक्त संस्कृति, इतिहास, दर्शन, इस्लाम धर्म आदि विषयों पर लगभग तीन दर्जन प्रकाशित ग्रन्थ हैं । अनेक बार राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत एवं अलंकृत हुए ।

    कुछेक महत्त्वपूर्ण हिंदी पुस्तकों में भारतीय इस्लामी संस्कृति, इस्लाम का सैद्धान्तिक परिवेश, इस्लाम के धार्मिक आयाम : हुसैनी क्रान्ति के परिप्रेक्ष्य में, भारतीय साहित्य में मुसलमानों का अवदान, कथाकार प्रेमचंद, प्रेमचन्द कहानी का रहनुमा, उर्दू शायरी आज़ादी के बाद, हिंदी-उर्दू शब्दकोश आदि उल्लेखनीय हैं ।

    प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा की भारतभूमि के प्रति समर्पण, मानवप्रेम में ईशप्रेम की सहज अनुभूति, बरबस भारतेंदु के शब्द स्मृति में गूँजते हैं--इन मुसलमान भक्तजनन पर कोटिन हिन्दू वारिये !

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