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Goswami Tulsidas Ki Jiwangatha

Goswami Tulsidas Ki Jiwangatha

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  • Pages: 200p
  • Year: 2008
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180312724
  •  
    गोस्वामी तुलसीदास का जीवन चरित प्राय: उनके जीवनकाल से ही लिखा जाता रहा है । इसमें संदेह नहीं कि उन्होंने अपनी दीर्घायु के बीच पर्याप्त ख्याति अर्जित कर ली थी और मुराल सम्राट अकबर, राजा मानसिंह, अछल रहीम खानखाना, मीराबाई, राजा टोडर आदि ने उनकी' श्रीरामभक्ति के प्रति पर्याप्त श्रद्धा और सम्मान अर्पित किया था । साहित्य की परम्परा में उनकी कालजयी कृति श्रीरामचरित-मानस की चर्चा भक्ति एवं रीतिकाल से ही बराबर होती चली रही है । गोस्वामी तुलसीदास की जीवनगाथा की मूल समस्या है कि इन पाँच सौ वर्षों के अवशेषों में बाबा को कहाँ खोजा जाए? यहाँ बाबा तुलसीदास की खोज का आधार उनकी कृतियाँ तथा पाठ हैं । प्रत्येक सर्जक अपनी कृति के पाठ में वर्ण से लेकर उसकी समग्र प्रबन्ध रचना तक व्याप्त रहता है- कण-कण में व्याप्त निर्गुण ब्रह्म की भांति । साधक के लिए, अणु- अणु में व्याप्त ब्रह्म से आत्मसाक्षात्कार करके, उसे समाधि चित्त में उतारना बड़ी दुर्लभ समस्या है । ठीक उसी प्रकार, तुलसी की कृतियों में सर्वत्र व्याप्त महात्मा तुलसीदास का आत्मसाक्षात्कार करके उन्हें स्वानुभूति एवं सृजन के स्तर पर उतारना लेखक की वर्षपर्यन्त तक की चेष्टा रही है । इसे औपन्यासिक कृति का रूप देने के लिए 'क्वचिदन्यतोपुपि' का भी उसे आधार लेना पड़ा है- किन्तु चेष्टा यही रही है- कि कृतियों का सृजन करके उन्हीं में विलीन गोस्वामी तुलसीदास को शब्दों से कैसे रेखांकित किया जाए । जो बन पड़ा, वह सामने है । अन्त में, एक आभार पुन: प्रकाशक की ओर से । इस कृति के प्रकाशन में आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए अयोध्या शोध-संस्थान, अयोध्या-फैजाबाद के निदेशक डी. योगेन्द्र प्रताप सिंह तथा रजिस्ट्रीकरण अधिकारी व विशेष कार्याधिकारी डी. ए. पी. गौड़ का प्रकाशक हृदय से आभार व्यक्त करता है ।

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    Yogendra Pratap Singh

    पूर्व प्रोफेसर तथा अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय।

    पूर्व निदेशक, पत्राचार संस्थान, इलाहाबाद विश्वविद्यालय।

    पूर्व अध्यक्ष, हिन्दुस्तानी एकेडेमी,  इलाहाबाद।

    अध्यक्ष, भारतीय हिन्दी परिषद्, हिन्दी विभाग इलाहाबाद विश्वविद्यालय।

    आलोचनात्मक साहित्य—हिन्दी वैष्णव भक्तिकाव्य में निहित काव्यादर्श एवं काव्यशास्त्रीय सिद्धान्त, भारतीय काव्यशास्त्र, भारतीय काव्यशास्त्र की रूपरेखा, भारतीय काव्यशास्त्र और पाश्चात्य काव्यशास्त्र का तुलनात्मक अध्ययन, भारतीय एवं पाश्चात्य काव्यशास्त्र तथा हिन्दी आलोचना, काव्यांग परिचय, रामचरित मानस के रचनाशिल्प का विश्लेषण, तुलसी के रचना सामथ्र्य का विवेचन, तुलसी : रचना सन्दर्भ का वैविध्य, गोस्वामी तुलसीदास की जीवनगाथा, कबीर की कविता, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, निबन्ध संरचना और काव्य चिंतन, कबीर सूर तुलसी, इतिहास दर्शन एवं हिन्दी साहित्य की समस्याएँ, भारतीय काव्यशास्त्र की भूमिका, सर्जन और रसास्वादन : भारतीय पक्ष, हिन्दी आलोचना : सिद्धान्त और इतिहास, जन-जन के कवि तुलसीदास, हिन्दी साहित्य के इतिहास की समस्याएँ, काव्यभाषा भारतीय पक्ष, हिन्दी काव्यशास्त्र के मूलाधार।

    रचनात्मक साहित्य : गीति अर्धशती (गीतिकाव्य), बीती शती के नाम, उर्वशी (गाथा गीति), गाधि पुत्र, सागर गाथा (नाट्य काव्य), टूटते गाँव बनते रिश्ते (उपन्यास), देवकी का आठवाँ बेटा (उपन्यास), पहला कदम (उपन्यास), अंधी गली की रोशनी (उपन्यास)

    सम्पादन : श्रीरामचरितमानस (सम्पूर्ण), बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड, उत्तरकाण्ड, विनयपत्रिका, कवितावली (समग्र सम्पादन-टीका तथा भूमिका सहित), जोरावर प्रकाश, कृष्ण चन्द्रिका, करुणाभरण नाटक (प्राचीन हस्तलिखित प्रतियों के आधार पर), घट रामायण तुलसी साहब हाथरस वाले, प्रयाग की रामलीला, भारतीय भाषाओं में रामकथा, Ramkatha in Indian Languages, रामसाहित्य कोश दो खण्डों में।

    संयुक्त लेखन : हिन्दी साहित्य, भाग-३, हिन्दी साहित्य कोश भाग-१ तथा २, काव्यभाषा : भारतीय पक्ष, काव्य भाषा : अलंकार रचना तथा अन्य समस्याएँ।

    यथा समय पत्रिकाओं का सम्पादन—अनुसंधान, विकल्प, हिन्दी अनुशीलन तथा हिन्दुस्तानी।

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