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Soochana Praudyogikee Aur Samachar Patra

Soochana Praudyogikee Aur Samachar Patra

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Special Price Rs. 58

11%

  • Pages: 131p
  • Year: 2008
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183612333
  •  
    आधुनिक कम्प्यूटर के सहारे परवान चढ़ा सूचना युग आज सर्वव्यापी है। सूचना प्रौद्योगिकी और उसका इंटरनेट- महाजाल आज समाज के बड़े भाग की रोजमर्रा जिन्दगी को प्रभावित कर रहे हैं। अनेक चिंतकों ने इसकी भविष्य- वाणी दशकों पहले ही कर दी थी, पर जो सामने आया वह भविष्यवाणियों से कहीं ज्यादा था। इंटरनेट, जो नए मीडिया के रूप में उभरा, पुराने प्रिंट मीडिया के लिए खतरे की घंटी के रूप में देखा जाने लगा। एक समय में अखबारों के प्रसार और विज्ञापन में लगभग स्थिरता से प्रिंट मीडिया में चिंता की लहरें छा गईं किन्तु उनसे उबरते देर भी नहीं लगी क्योंकि एक सार्वजनिक मीडिया के रूप में इंटरनेट जन-जन में ग्राह्य नहीं हो पाया और छपे हुए शब्द की महत्ता बनी रही। यह पुस्तक इन तथ्यों और विषय-उपविषयों को वर्णनात्मक और विश्लेषणात्मक रूप में अध्याय-दर-अध्याय रखते हुए अपने निष्कर्ष की ओर बढ़ती है। इसमें सूचना क्रान्ति और सूचना युग की विशेषता और कतिपय जरूरी तकनीकी शब्दों से परिचित कराते हुए देश-विदेश में इंटरनेट के विकास का जायजा लिया गया है। पुराने (प्रिंट) और (इंटरनेट) मीडिया की तुलना है तो यह भी शामिल है कि इंटरनेट पर भारतीय अखबार और पत्रिकाओं का पदार्पण कैसे हुआ, इसमें भाषा की समस्या क्या थी और उसे सुलझाने के क्या उपाय हुए। पहले-पहल जो अखबार और पत्रिकाएँ इंटरनेट पर आए, उनकी एक सूची और हिन्दी के कुछ अखबारों के इंटरनेट संस्करणों के नमूने भी इसमें हैं। इंटरनेट बनाम अखबार के तहत जहाँ एक तुलनात्मक अध्ययन किया गया है, वहीं इंटरनेट और बाजारवाद के दोहरे प्रहारों के चलते अखबारों के विज्ञापन, प्रसार और विषय-वस्तु में आ रहे बदलावों का भी विश्लेषण है। इसके अलावा यह पुस्तक इंटरनेट और लोगों के प्रजातांत्रिक अधिकारों के अन्तर्संबंधों पर भी दृष्टिपात करती है। कई लब्धप्रतिष्ठ पत्रकारों के साक्षात्कारों, विभिन्न रिपोर्टों और कृतियों से लिए गए उद्धरणों और सांख्यिकी के जरिए विवेचना को पुष्ट बनाया गया है, जिसका निष्कर्ष कुछ रोचक दृष्टांतों के साथ मंथन में है। इसका सार वरिष्ठ पत्रकार प्रभाष जोशी की इस समापन टिप्पणी में है कि ‘जब तक मनुष्य की लिखने-पढ़ने में रुचि रहेगी तब तक कागज और कलम से उसका जुड़ाव रहेगा और तब तक अखबारों को भी कोई समाप्त नहीं कर सकेगा।’

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    Ravinder Shukla

    जन्म: अप्रैल, 1950। शिक्षा: बी.टेक.एड्।

    पत्रकारिता: आरम्भ 1968 में दैनिक ‘मध्यप्रदेश’ भोपाल से। 1970 में ‘नई दुनिया’ इंदौर में सह-सम्पादक। 33 वर्षों तक वहीं समाचार तथा विचार प्रभागों के विभिन्न उत्तरदायित्व सँभाले। देश के अग्रणी विकासीय पत्रकारों में गणना। विशेषकर पर्यावरण, कृषि, जल-प्रबंधन, स्कूली शिक्षा, पंचायत और वंचित तबकों पर लेखन। सैकड़ों रपटें, आलेख, इंटरव्यू तथा अग्रलेख प्रकाशित। विभिन्न राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय अध्येतावृत्तियों के तहत - 1979 में प्रेस इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की फीचर सेवा ‘डेप्थ न्यूज’ के लिए विकासीय विषयों पर लेखन; 1983 में मनीला (फिलीपीन्स) में ग्रामीण पत्रकारिता का विशेष अध्ययन; 1987 में मध्यप्रदेश के आदिवासीबहुल झाबुआ जिले में पर्यावरणीय Ðास पर विशेष अध्ययन तथा 1999 में शहडोल और रीवा जिलों में मध्यप्रदेश शासन के जल संग्रहण तथा शिक्षा मिशन कार्यक्रमों के अमल की समीक्षा। आकाशवाणी के इंदौर केन्द्र से वार्ताएँ प्रसारित। बी.बी.सी. के लंदन स्थित मुख्यालय से 1999 तथा 2000 में जल प्रबंधन पर इंटरव्यू प्रसारित। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय तथा प्रशासन अकादमी, भोपाल में क्रमशः पत्रकारिता तथा जल-प्रबंधन पर व्याख्यान।

    विभिन्न विषयों पर दर्जनों राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों  व कार्यशालाओं में भागीदारी। जल-प्रबंधन में विशेष अभिरुचि। तेहरान (ईरान), ओत्सू (जापान) तथा स्टॉकहोम (स्वीडन) में आलेख वाचन। वर्ष 2003 में क्योटो (जापान) में विश्व जल महासम्मेलन में ‘जल प्रबंधन तथा पत्रकारिता’ पर सत्र का आयोजन। सामाजिक कार्यों में गहरी अभिरुचि। 1976 से 1980 तक राष्ट्रीय नेत्र सुरक्षा संस्था, नई दिल्ली के मुखपत्र ‘हमारी आँखें’ का मानसेवी संपादन। स्वैच्छिक संस्था ‘नवदीप’ के अध्यक्ष तथा शिक्षा क्षेत्रीय जल सहभागिता के समन्वयक। भारतीय जल सहभागिता, नई दिल्ली के संयुक्त सचिव।

    प्रकाशित कृतियाँ: ‘मध्यप्रदेश संदर्भ 2003’ (संपादन) तथा समन्वित जल संसाधन प्रबंधन (अनुवाद)। पुरस्कार: रोटरी क्लब ऑफ इंदौर सम्मान (1986) तथा गणेश शंकर विद्यार्थी राज्य स्तरीय सम्मान (2001)। विदेश यात्राएँ: फिलीपीन्स तथा हांगकांग, स्वीडन, यू.के. नीदरलैंड्स, ईरान, जापान, थाईलैंड, मलयेशिया तथा फ्रांस।

    सम्प्रति: समाचार सम्पादक, राष्ट्रीय हिन्दी समाचार, ई.टी.वी. (मुख्यालय हैदराबाद)।

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