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Dhatu Shilpi Dr. Jaidev Baghel Ek Shikhar Yatra

Dhatu Shilpi Dr. Jaidev Baghel Ek Shikhar Yatra

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  • Pages: 180p
  • Year: 2014, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183616829
  •  
    छत्तीसगढ़ का बस्तर अंचल देशवासियों को ही नहीं अपितु विदेशियों को भी अपनी विशिष्ट एवं समृद्ध आदिवासी एवं लोक-संस्कृति के कारण आरम्भ से ही आकर्षित करता रहा है। यहाँ की आदिवासी एवं लोक-संस्कृति में साहित्य कला के अन्तर्गत वाचिक परम्परा के सहारे न जाने कब से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक संचरित होती आ रही लोककथाएँ, गीति कथाएँ, गाथाएँ, महागाथा, लोक गीत, कहावतें, मुहावरे, पहेलियाँ, मिथ-कथाएँ आदि लोक-साहित्य एवं प्रदर्शनकारी कलाओं के अन्तर्गत नृत्य, संगीत, नाट्य तथा रूपंकर कलाओं के अन्तर्गत मूर्ति-कला, लोकचित्र-कला एवं वास्तु-कला का भी प्रमुख स्थान रहा है। कोंडागाँव, बस्तर (छत्तीसगढ़) के धातु-शिल्पी श्री जयदेव बघेल का सम्बन्ध इन्हीं में से एक, मूर्ति कला से है। पारम्परिक मूर्ति-कला से, जो 'घड़वा कला' के नाम से विख्यात है और शासकीय तौर पर 'ढोकरा कला' के नाम से जानी जाती है। इस विशुद्ध लोक-कला को बस्तर जैसे अंचल, जो सदा से पिछड़ा कहे जाने के लिए अभिशप्त रहा है, से उठा कर देश ही नहीं अपितु विदेशों में भी लोक-कला के साथ-साथ समकालीन कला के समतुल्य सम्मानजनक स्थान दिलाने में श्री जयदेव बघेल का योगदान अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। यह कहने में कोई संशय नहीं कि 'घड़वा-कला' और श्री जयदेव बघेल एक-दूसरे के पर्याय हैं। इतना ही नहीं, श्री बघेल के ही प्रयासों से कोंडागाँव और इसके आसपास न केवल 'घड़वा-कला' अपितु अन्य आदिवासी एवं लोक-कलाओं का भी विस्तार एवं विकास हुआ। यही कारण है कि पहले से ही बस्तर सम्भाग की 'संस्कार-धानी' के नाम से अभिहित कोंडागांव को अब 'शिल्प-नगरी' भी कहा जाता है। श्री जयदेव बघेल का यह प्रामाणिक जीवन वृत्त पठनीय बन पड़ा है। उम्मीद है पाठकों को यह पुस्तक रुचिकर लगेगी।

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    Harihar Vaishnav

    हरिहर वैष्णव

    19 जनवरी, 1955 को दन्तेवाड़ा (बस्तर-छ.ग.) में जन्म। सम्पूर्ण लेखन-कर्म बस्तर पर केन्द्रित। अब तक कुल 24 पुस्तकें प्रकाशित। कुछ प्रकाशनाधीन। हिन्दी के साथ-साथ बस्तर की भाषाओं—हल्बी, भतरी, बस्तरी और छत्तीसगढ़ी में भी समान लेखन-प्रकाशन। अनेक पुरस्कार/सम्मान प्राप्त। उल्लेखनीय सम्मानों में छत्तीसगढ़ हिन्दी साहित्य परिषद् का 'उमेश शर्मा साहित्य सम्मान, 2009', दुष्यंत कुमार स्मारक संग्रहालय का 'आंचलिक साहित्यकार सम्मान, 2009', छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण 'पं. सुन्दरलाल शर्मा साहित्य सम्मान, 2015, 'वेरियर एल्विन प्रतिष्ठा अलंकरण, 2015', 'साहित्य अकादेमी का भाषा सम्मान; 2015'। सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत 1991 में ऑस्ट्रेलिया, 2000 में स्विट्जरलैंड और 2002 में इटली प्रवास। बस्तर की भाषा हल्बी में 5 एनीमेशन फिल्मों का स्कॉटलैंड की संस्था 'वेस्ट हाईलैंड एनीमेशन' कम्पनी के साथ मिलकर निर्माण।

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