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Dhuno Ki Yatra

Dhuno Ki Yatra

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  • Pages: 767p
  • Year: 2017, 4th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126711697
  •  
    ‘धुनों की यात्रा’ हिन्दी फ़िल्म के संगीतकारों पर केन्द्रित ऐसी पहली मुकम्मिल और प्रामाणिक पुस्तक है, जिसमें सन् 1931 से लेकर 2005 तक के सभी संगीतकारों का श्लाघनीय समावेश किया गया है। संगीतकारों के विवरण और विश्लेषण के साथ उनकी सृजनात्मकता को सन्दर्भ सहित संगीत, समाज और जनाकांक्षाओं की प्रवृत्तियों को पहली बार इस पुस्तक के माध्यम से रेखांकित किया गया है। धुनों की यात्रा में मात्र संगीत की सांख्यिकी को ही नहीं देखा गया है, वरन् संगीत रचनाओं के तत्कालीन जैविक और भौतिक अनुभूतियों के साथ ही संगीत के राग, ताल, प्रभाव, बारीकी और उसकी विशिष्टताओं के साथ सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवेश, चेतना और उसके पुराने एवं नये, ढहते और बनते नये रूपाकारों को, उसके उल्लास, आवेश-आवेग, संघर्षों और संयोजनों को भी सूक्ष्मता के साथ विवेचित किया गया है। आमतौर पर फ़िल्मी संगीत के बारे में धारणा और प्रारंभिक आकर्षण रोमान का ही होता है। ‘धुनों की यात्रा’ इस मिथकीय भ्रम को तोड़ती है। स्वातंत्रय चेतना के प्रादुर्भाव, स्वतन्त्रता आन्दोलन, रूढ़ सामाजिक विसंगतियों के प्रति अलगाव, विभिन्नता, बहुलता और बहुमत के प्रति लगाव, जनाकांक्षा की तीव्र अभिव्यक्ति, धर्म और बाज़ार के खंड-खंड पाखंड, युवा और युवतर चेतना की सशक्त वैश्विक दृष्टि, उनकी शैलियों और उनके समय की पड़ताल के संदर्भ में यह पुस्तक फ़िल्मी संगीत पर सर्वथा नए दृष्टि पथ का निर्माण करती है। स्वतन्त्रता के पूर्व की चेतना से लेकर आज के भूमंडलीकरण के दौर तक, संगीत की सन्दर्भों के साथ बदलती प्रवृत्तियों की यह यात्रा आम पाठकों और संगीत रसिकों के लिए तो उपयोगी है ही; साथ ही भारतीय फ़िल्म संगीत के इतिहास, सांगीतिक धुनों की छवि और छाप, शैलियों की विविधता और विशिष्टता, राग और तालों के विवरण और विस्तार तथा फ़िल्म संगीत के क्रमिक विस्तार के तत्त्वों और सन्दर्भों के कारण फ़िल्म संगीत के विद्यार्थियों के लिए भी यह अनिवार्य संदर्भ पुस्तक के रूप में महत्त्वपूर्ण और उपयोगी होगी।

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    Pankaj Rag

    पंकज राग

    मुज़फ्फरपुर (बिहार) में जन्मे पंकज राग ने सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली से इतिहास विषय में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। तत्पश्चात् उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से आधुनिक भारतीय इतिहास में एम.फिल. की उपाधि प्राप्त की तथा दिल्ली विश्वविद्यालय में लगभग डेढ़ वर्ष तक अध्यापन किया। 1990 में वे भारतीय प्रशासनिक सेवा (मध्य प्रदेश संवर्ग) में आए।

    पंकज राग ने पुरातत्त्वविज्ञान, अभिलेखागार एवं संग्रहालय आयुक्त, मध्य प्रदेश सरकार के रूप में भी अपनी सेवा प्रदान की है। उन्होंने निदेशक, भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान, पुणे तथा मध्य प्रदेश सरकार में अन्य महत्त्वपूर्ण पदों को सुशोभित

    किया है।

    एक संगीत विशेषज्ञ के रूप में, पंकज राग ने फिल्मों और संस्कृति पर गहन शोध किया है और सन् 1931 से 2005 तक के फिल्म संगीत निर्देशकों पर आधारित उनकी पुस्तक धुनों की यात्रा बहुचर्चित रही है। वे प्रख्यात हिन्दी कवि हैं। उनके कविता-संग्रह यह भूमंडल की रात है पर उन्हें प्रतिष्ठित केदार सम्मान, मीरा स्मृति सम्मान और स्पन्दन कृति सम्मान प्राप्त हुआ है। रूपा एंड कम्पनी से प्रकाशित अपनी कृति 1857 : दी ओरल ट्रैडिशन में उन्होंने लोकगीतों एवं लोककथाओं के माध्यम से प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को पुनर्सृजित किया है।

    उनकी अन्य कृतियाँ हैं—विन्टेज मध्य प्रदेश, भोपाल 50 इयर्स, मास्टर पीसेज ऑफ मध्य प्रदेश, राग-रागिनी फोलियो, रायसेन का पुरातत्त्व, राजगढ़ का पुरातत्त्व, मंदसौर का पुरातत्त्व, नोन एंड अननोन : एन इंसाइक्लोपीडिया ऑफ मॉन्यूमेंट्स ऑफ मध्य प्रदेश आदि। फिलहाल वे भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय में संयुक्त सचिव एवं महानिदेशक, राष्ट्रीय अभिलेखागार के पद पर कार्यरत हैं।

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