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Elan Gali Zinda Hai

Elan Gali Zinda Hai

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  • Pages: 164p
  • Year: 2004
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8126709006
  •  
    ऐलान गली धरती का स्वर्ग कहलानेवाले कश्मीर की एक ऐसी गली - जहाँ दरिद्रता, अज्ञान और अशिक्षा से त्रस्त लोग बसे हुए हैं। ऐलान गली में अभावग्रस्त लोगों की संस्कृति और जीवन संघर्षों का ऐसा चित्र उभरता है जहाँ यह कल्पना सम्भव नहीं कि यह स्वर्ग कहे जानेवाले कश्मीर का ही कोई हिस्सा है। ‘ऐलान गली ज़िन्दा है’ एक ऐसा उपन्यास है जिसमें साम्प्रदायिक-सौहार्द्र, सामाजिक साहचर्य, सहिष्णुता और सहजीवन के आदर्शों के नए-नए बिम्ब उभरते हैं। चन्द्रकान्ता को इस उपन्यास से चर्चाओं का एक ऐसा आयाम मिला जिसकी तलाश प्रायः हर मसिजीवी को रहती है। ‘ऐलान गली ज़िन्दा है’ के अनवर मियाँ, दयाराम मास्टर, संसार चन्द आदि कुछ ऐसे पात्र हैं जिनके चरित्र में साम्प्रदायिक सौहार्द्र के गुण परिलक्षित होते हैं। इस उपन्यास का एक युवक अवतारा जब आजीविका की खोज में मुम्बई आता है तब उसे ‘ऐलान गली’ की वास्तविकता का अहसास होता है कि वहाँ के लोगों के हृदय में प्यार का समुद्र ऐसे कुलांचें भरता है जिसकी कल्पना ‘मुम्बई’ की चमक-दमक और सम्पन्नता में भी नहीं की जा सकती। आपसी सम्बन्धों की मर्मस्पर्शी कथा ‘ऐलान गली ज़िन्दा है’ ने ही चन्द्रकांता को औपन्यासिक परिवेश में पहचान दिलाई।

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    Chandrakanta

    जन्म: 3 सितम्बर, 1938 में (प्रोफेसर रामचन्द्र पंडित की पुत्री; पति डॉ. एम.एल. बिशिन) श्रीनगर (कश्मीर)

    शिक्षा: एम.ए., बी.एड.; बी.ए. (गर्ल्स कॉलेज) एवं हिन्दी प्रभाकर (ओरियंटल कॉलेज); बी.एड. (गांधी मेमोरियल कॉलेज), श्रीनगर, कश्मीर; बी.एड. में जम्मू-कश्मीर यूनिवर्सिटी में प्रथम स्थान और एम.ए. (हिन्दी), बिड़ला आर्ट्स कॉलेज, पिलानी, राजस्थान यूनिवर्सिटी; एम.ए. (हिन्दी), बिड़ला आर्ट्स कॉलेज में द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

    प्रकाशित रचनाएँ: कहानी-संग्रह - सलाख़ों के पीछे: 1975; ग़लत लोगों के बीच: 1984; पोशनूल की वापसी: 1988; दहलीज़ पर न्याय: 1989; ओ सोनकिसरी!: 1991; कोठे पर कागा: 1993; सूरज उगने तक: 1994; काली बर्फ: 1996;  प्रेम कहानियाँ: 1996; चर्चित कहानियाँ: 1997; कथा नगर: 2001; बदलते हालात में:  2002; आंचलिक कहानियाँ: 2004; अब्बू ने कहा था: 2005; तैंती बाई: 2006;  कथा संग्रह (‘वितस्ता दा जहर’ शीर्षक से पंजाबी भाषा में अनूदित; अनुवादकः श्री हर्षकुमार हर्ष): 2007; रात में सागर 2008। उपन्यास - बाक़ी सब ख़ैरियत है (उड़िया भाषा में अनूदित; अनुवादक: प्रवासिनी तिवारी): 1983; ऐलान गली ज़िन्दा है (अंग्रेजी भाषा में अनूदित; अनुवादक: मनीषा चौधरी): 1984; अपने-अपने कोणार्क: 1995; कथा सतीसर: 2001; अन्तिम साक्ष्य और अर्थान्तर (उड़िया भाषा में अनूदित; अनुवादक: श्रीनिवास उद्गाता): 2006;  यहाँ वितस्ता बहती है: 2008। अन्य कृतियाँ - यहीं कहीं आसपास: 1999 (कविता संग्रह); मेरे भोजपत्र: 2008 (संस्मरण एवं आलेख)।

    सम्मान: जम्मू-कश्मीर कल्याण अकादमी; हरियाणा साहित्य अकादमी; मानव संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार; हिन्दी अकादमी, दिल्ली; व्यास सम्मान (के.के. बिड़ला फाउंडेशन दिल्ली), चन्द्रावती शुक्ल सम्मान; कल्पना चावला सम्मान; ऋचा लेखिका रत्न; वाग्मणि सम्मान; राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान; ऑल इंडिया कश्मीरी समाज द्वारा कम्यूनिटी आइकॉन एवार्ड, आदि।

     

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