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Gandhi Aur Unke 'Satyagrah' Ki Yatra

Gandhi Aur Unke 'Satyagrah' Ki Yatra

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  • Pages: 187p
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788194272915
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    जब तक मानव सभ्यता का अस्तित्व है तब तक गॉधी की प्रासंगिकता बनी रहेगी, क्योकिं गॉधी ने मानवता के साथ मानव सभ्यता के मौलिक मूल्यों और मानवता के आदर्शों, प्रतिमानों पर ही अपना दर्शन आधारित किया और उसे क्रियान्वित करते हुए अपना जीवन भी जी कर दिखा दिया । जब तक विश्व में युद्ध और युद्धपरक परिस्थितियाँ बनी रहेंगी, मानव-समाज और विश्व में उनके दर्शन का महत्व सदैव बना रहेगा । गॉधी मानवता, शान्ति, शान्तिपूर्ण-अस्तित्व के साथ विकास के समर्थक थे और सत्य के शाश्वत मूल्य अधारित हो अर्थात सृष्टि, विश्व और समाज के मध्य भी सामंजस्य, संतुलन और सहभाग का भाव स्थायी हो, इसके लिए इच्छुक थे । इसलिए किसी एक आयाम को लेकर गाँधी को समझने के लिए अध्ययन करना खतरा मोल लेना ही है । उनके व्यक्तित्व के समस्त आयामों के बिना उनका समावेशी अध्ययन सम्भव नहीं है । अत: गाँधीजी का हर अध्ययन उनकी जीवन यात्रा का ही अध्ययन हो जाता है और इसलिए उन 'संस्कारों' और उनके व्यक्तित्व के मनोवैज्ञानिक विकास-लम को भी विश्लेषित करना पड़ेगा तब हम उनको एवं उनके विचारों को समझ सकेगे । बिना वांग्मय के अध्ययन के किसी लेखक, विचारक, ऐतिहासिक व्यक्तित्व को पूर्णत: में समझा ही नहीं जा सकता। अत: गॉधी के 'सत्याग्रह' की यात्रा भी उनकी जीवन-यात्रा ही हो जाती हैं ।

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    Heramb Chaturvedi

    हेरम्ब चतुर्वेदी

    निवासी (होलीपुरा, आगरा); जन्म : दिसम्बर 31, 1955, इंदौर म.प्र.

    अध्यापन : जनवरी 14, 1980 से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में अध्यापन ।

    सम्प्रति : इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में 2001 से प्रोफ्रेसंर एवं पूर्व अध्यक्ष ।

    कृतित्व : सल्तनत-कालीन प्रमुख इतिहासकार, (1987), अभिव्यक्ति (1990), फ्रान्स का इतिहास (1999), मध्यकालीन इतिहास के स्रोत, (वर्ष 2003 का उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का आचार्य नरेन्द्रदेव पुरस्कार), मध्यकालीन भारत में राज्य एवं राजनीति, (वर्ष 2005 का उत्तर प्रदेश हिंन्दी संस्थान का आचार्य नरेन्द्र देव पुररकार, दास्तान मुगल महिलाओं की (मुगल महिलाओँ पर आधारित कहानी-संकलन), लोकभारती, इलाहाबाद, 2013)बी.बी.सी. लन्दन द्वारा 2013 क्री सर्वश्रेष्ठ हिंन्दी पुस्तकों की सूची में स्थान, हिन्दी के बहाने, (2014), एक दौर यह भी (काव्य-संकलन, 2014), दो सुल्तान, दो बादशाह (ऐतिहासिक कहानियों का संकलन, 2016), मुगल शहजादा खुसरू (ऐतिहासिक उपन्यासं (2016), द इलाहाबाद स्कूल आँफ हिस्ट्री, (2016), चतुर्वेदीज़  आँफ इण्डिया : द मथुरा क्लान (2017 ), लाला सीताराम ‘भूप (2017), दास्तान मुगल बादशाहों की, लोकभारती, इलाहाबाद (2019), शोध-पत्रिकाओं मे लगभग 75 शोध पत्र प्रकाशित, कादम्बिनी, साहित्य अमृत, संडे ऑबजर्बर, दिनमान टाइम्स, नया ज्ञानोदय, मनोरमा में लेख आदि प्रकाशित, रेडियों दूरदर्शन के नियमित वार्ताकार ।

     

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