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Guzara Hua Zamana

Guzara Hua Zamana

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  • Pages: 344p
  • Year: 2019, 3rd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8126704969
  • ISBN 13: 9788126704965
  •  
    पचास सालों से रचनारत कथाकार कृष्ण बलदेव वैद अपने कलात्मक तेवर और प्रयोगधर्मी लेखन के लिए सुप्रसिद्ध हैं ! वह लीक से हटकर लिखते हैं, इसीलिए उनकी हर कृति सुधि पाठकों और लेखकों के लिए एक नया अनुभव् बन जाति है ! गुजरा हुआ ज़माना उनकी रचंशीलता का एक विशेष आयाम है ! 1957 में प्रकाशित उनका पहला उपन्यास उसका बचपन आज भी अपने शिल्प और शैली के आधार पर हिंदी के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में गिना जाता है ! उसमे श्री वैद ने एक अति संवेदनशील बच्चे के दृष्टिकोण से पश्चिमी पंजाब के एक निर्धन परिवार की कलह और पीड़ा का संयत और साफ़ चित्रण करके कथा साहित्य को एक नई गहराई दी थी, एक नया स्वर दिया था ! 1981 में प्रकाशित गुजरा हुआ ज़माना उसी उपन्यास की अगली कड़ी है ! इसमें उसका बचपन का केन्द्रीय पत्र बीरू अपनी परिवार की सीमाओं से बाहर की दुनिया को भी देखता है, उससे उलझता है ! इसमें अनेक घटनाओं, पत्रों और पीडाओं से एक प्यारे और पेचीदा कस्बे का सामूहिक चित्र तैयार किया गया है ! इस चित्र को देखकर दहशत भी होती है और श्री वैद की निराली नजर के दर्शन भी ! इसमें देश विभाजन सम्बन्धी सांप्रदायिक पागलपन को उभरा भी गया है और लताड़ा भी ! गुजरा हुआ जमाना देशविभाजन को लेकर लिखे गए उपन्यासों में एक अलग और विशिष्ट स्थान पिछले दो दशकों से बनाए हुए है ! इसका यह संस्करण, आशा है, उस स्थान को और स्थिरता प्रदान करेगा !

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    Krishna Baldev Vaid

    जन्म: 27 जुलाई, 1927, डिंगा (पंजाब)। शिक्षा: एम.ए. (अंग्रेज़ी), पंजाब विश्वविद्यालय (1949), पी-एच.डी., हार्वर्ड विश्वविद्यालय (1961)।

    अध्यापन: हंसराज कॉलिज, दिल्ली विश्वविद्यालय (1950- 62); अंग्रेज़ी विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ (1962- 66); अंग्रेज़ी विभाग, न्यूयॉर्क स्टेट विश्वविद्यालय (1966- 85); अंग्रेज़ी विभाग, ब्रेंडाइज़ विश्वविद्यालय (1968-69)। अन्य अनुभव: अध्यक्ष, निराला सृजन पीठ, भारत भवन, भोपाल (1985-88)।

    प्रकाशित कृतियाँ: उपन्यास: उसका बचपन, बिमल उपऱ्$ जाएँ तो जाएँ कहाँ, नसरीन, दूसरा न कोई, दर्द ला दवा, गुज़रा हुआ ज़माना, काला कोलाज, नर-नारी, मायालोक, एक नौकरानी की डायरी। कहानी-संग्रह: बीच का दरवाज़ा, मेरा दुश्मन, दूसरे किनारे से, लापता, उसके बयान, मेरी प्रिय कहानियाँ, वह और मैं, ख़ामोशी, आलाप, प्रतिनिधि कहानियाँ, लीला, चर्चित कहानियाँ, पिता की परछाइयाँ, दस प्रतिनिधि कहानियाँ, सम्पूर्ण कहानियाँ (दो जिल्दों में): मेरा दुश्मन, रात की सैर, बोधिसत्व की बीवी, ‘बदचलन’ बीवियों का द्वीप। नाटक: भूख आग है, हमारी बुढ़िया, सवाल और स्वप्न, परिवार अखाड़ा। समीक्षा: टेकनीक इन दि टेल्ज़ ऑफ़ हेनरी जेम्ज़।

    अनुवाद: अंग्रेज़ी में: स्टेप्स इन डार्कनेस (उसका बचपन), बिमल इन बाग (बिमल उपऱ्$ जाएँ तो जाएँ कहाँ), डाइंग अलोन (दूसरा न कोई और दस कहानियाँ), द ब्रोकन मिरर (गुज़रा हुआ ज़माना), सायलेंस (चुनी हुई कहानियाँ), इन द डार्क (मुक्तिबोध: अँधेरे में), फ़ायर इन दि बैली / आवर ओल्ड वोमन (भूख आग है / हमारी बुढ़िया)।

    हिन्दी में: गॉडो के इन्तज़ार में (बेकिट), आखि़री खेल (बेकिट), फ़ेड्रा (रासीन), एलिस अजूबों की दुनिया में (लुईस केरल)।

    अनेक रचनाओं के अनुवाद बंगला, उर्दू, गुजराती, तमिल, मलयाली, मराठी आदि अन्य भारतीय भाषाओं और अंग्रेज़ी के अलावा जर्मन, इतालवी, हिस्पानवी, फ्रांसीसी, नार्विजियन, स्वीडिश और पोलिश में प्रकाशित हो चुके हैं।

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