• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Hansa Ke Bain

Hansa Ke Bain

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 150

Special Price Rs. 135

10%

  • Pages: 135p
  • Year: 1997
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 10: 8171193080
  •  
    प्रस्तुत पुस्तक की भूमिका में गुलजार जी लिखते है : "पंडित अमरनाथ जी से एक ही मुलाकात हुई, और वह मुकम्मिल थी ! ऐसा कम होता है कि आप एक ही बार में पूरी की पूरी शख्सियत से मिल लें ! ऐसे खुले हुए इंसान वाकई ही कम होते हैं .... "बहुत देर तक बैठे हुए पंडित जी से संगीत की पुरानी बंदिशें सुनीं, जो अक्सर गुरुजन अंटी में दबाए रखते हैं, दिखाते नहीं, पंडित जी बहुत सखी (दानशील) थे इस मामले में ! मेवे-किशमिश की तरह ठुमरियां बांटते रहे ! बंदिशों के बल-पेच समझाते रहे ! खाने से पहले बघार के रहस्य और रस भी बता दिए ! फिर बात शायरी पर उतर आई, तो कविताएँ भी सुनीं उनसे... "...उनकी कविताओं में बिरहा की पीड़ा बहुत भरी हुई है ! कविता का रूप गीत-सा भी है और शास्त्रीय गायकी की बंदिशों का-सा भी है ! वह स्वाभाविक है ! क्योंकि गायक अगर कवि भी हो तो raag के साथ-साथ बोलों की उपज अपने आप होने लगती है ! जब वे कहते हैं-'जा जा रे बदरा जा रे, बरस-बरस काहे तरसावे'-तो लगता है कि कवि गा रहा है ! यक़ीनन गायक ज्यादा प्रबल लगता है.." सुप्रसिद्ध संगीकार स्वर्गीय पंडित अमरनाथ के भावभीने गीतों का महत्त्वपूर्ण संकलन है - हंसा के बैन!

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Pandit Amarnath

    हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में उस्ताद और अमीर खाँ साहब द्वारा स्थापित इंदौर घराने के प्रमुख स्तंभ, पंडित अमरनाथजी का जन्म 22 मार्च, सन् 1924 को पंजाब के जिला झंग (पाकिस्तान) में हुआ। बचपन में ही जब वे चार वर्ष के थे, माता का देहांत हो गया। ऐसे में सहारा बना, संगीत का शौक।

    इसी शौक ने आगे जाकर उन्हें भारत का एक बेहतरीन और बेजोड़ शास्त्रीय गायक बनाया। उनके द्वारा सोचे और खोजे कितने ही राग आज संगीत के क्षेत्र में अमिट यादगार बनकर रह गए हैं। इसके अलावा पंडित जी छोड़ गए हैं रागों की तकरीबन 300 बंदिशें जो उन्हेांने स्वयं स्वरबद्ध की थीं। उनके द्वारा अंग्रेजी में लिखित संगीत शब्दकोश ‘Living Idioms in Hindustatni Music’ के अब तक तीन संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं।

    संगीत निर्देशक के रूप में भी आप द्वारा किया कार्य उच्च कोटि का रहा। स्वर्गीय श्री राजेन्द्र सिंह बेदी की कहानी पर बनी फिल्म ‘गर्म कोट’ की धुनें आज अमर बनकर रह गई हैं। इसी फिल्म के बारे में कई बार इस बात का ज़िक्र आता था, कि सुश्री लता मंगेशकर ने जब आप द्वारा निर्देशित गाना ‘जोगिया से प्रीत किये दुख होय’ गाया तो वह इसकी धुन पर इतनी भावुक हो उठीं कि इस गाने की फीस यह कहकर नहीं ली कि ऐसा अच्छा गाना बरसों बाद गाने को मिला। इस बात की चर्चा उन दिनों अखबारों में बहुत हुई। बात यहीं खत्म नहीं हुई। जब लताजी ने अपनी पंसद के 12 गीतों का पहला कैसेट निकाला तो उसमें आपने यही गीत शामिल किया। इसी तरह संगीत निर्देशक के रूप में पंडितजी ने बेजोड़ गाने दूरदर्शन धारावाहिकों के लिए, आकाशवाणी तथा वृत्तचित्रों के लिए बनाए।

    स्वरमणि और साहित्य कला परिषद् पुरस्कार से अलंकृत पंडितजी का कला-प्रदर्शन न केवल इस देश के सभी प्रमुख सांस्कृतिक संस्थानों में हुआ बल्कि यूरोप और अमेरिका में भी इनके प्रदर्शनों को सराहा गया। पंडितजी पहले शास्त्रीय गायक थे जिनके संगीत में योगदान का प्रलेखन (documentation) इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, नई दिल्ली द्वारा किया जा रहा है।

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144