• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Hariyal Ki Lakdi

Hariyal Ki Lakdi

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 195

Special Price Rs. 175

10%

  • Pages: 223p
  • Year: 2006
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8126711345
  •  
    इक्कीसवीं सदी के जगमग विकास के दौर की यह विडम्बना ही है कि जहाँ वैश्विक धरातल पर अमरीकी दादागीरी सर चढ़कर बोल रही है वहीं भारतीय समाज की तलछट में रह रहे लोगों की जिन्दगी भ्रष्ट नौकरीशाही और सरकारी प्रपंचों में फँसकर और भी दूभर होती जा रही है। हरियल की लकड़ी तलछट में रह रहे ऐसे ही लोगों की कहानियाँ बयान करती है। उपन्यास की मुख्य पात्र बसमतिया जीवट और दृढ़ चरित्र की स्त्री है जिसका पति उसे छोड़कर कहीं चला गया और लौटकर नहीं आया। फिर भी ससुराल में वह उसका इन्तजार करती अपनी बूढ़ी सासू की देखभाल और मेहनत-मजदूरी करती है। माता-पिता की समझदार सन्तान होने के कारण उसे पिता के सहयोग के लिए बार-बार मायके आना पड़ता है। सामाजिक जीवन की विभिन्न छवियों, विद्रूपताओं, विडम्बनाओं को बारीकी से रेखांकित करनेवाली यह कृति प्रेम-घृणा, सुख-दुख, वासना और भ्रष्टाचार की अविकल कथा को प्रवाहमान भाषा और शिल्प में प्रस्तुत करती है। गाँव के उच्चवर्ग के लोगों व सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष करती बसमतिया जीवन की बीहड़ अनुभवों से गुजरती है लेकिन झुकना या हार मानना उसने नहीं सीखा। इस क्रम में उसे कई लोगों से सहयोग भी मिलता है और ताने-उलाहने भी सुनने पड़ते हैं। क्या बसमतिया को न्याय मिला? क्या उसका पति लौटा? गाँव के विकास के लिए उसके संघर्ष का क्या हुआ? - इन सवालों की जिज्ञासाओं को लेखक ने उपन्यास में बेहद दिलचस्प विन्यास में प्रस्तुत किया है। निश्चय ही पाठक इसे हाथों-हाथ लेंगे, ऐसा हमारा विश्वास है।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Ramnath Sivendra

    जन्म: ग्राम - खड़घई, पो. - पन्नूगंज, सोनभद्र (उ.प्र.)।

    शिक्षा: एम.ए.एस. (समाज कार्य), एल.एल.बी.।

    कार्य: एक साल तक कल्याण अधिकारी की नौकरी, आठ साल तक वकालत। अब कृषि कार्य (किसानी) एवं असुविधा त्रैमासिक पत्रिका का विगत 25 वर्षों से प्रकाशन।

    प्रकाशन: सहपुरवा (उपन्यास), पनसाल (कहानी-संग्रह) 1980 के पहले प्रकाशित। सहपुरवा का असुविधा के अंक अक्टूबर-दिसम्बर 1995 में पुनः प्रकाशन।

    ‘सोनभद्र प्राचीन’ सोनभद्र के इतिहास की एक पुस्तक इसी वर्ष जुलाई के अंत तक प्रकाश्य।

    ‘सोनभद्र का भूमि प्रबंधन’ शीघ्र प्रकाश्य।

    संपर्क: अक्षर घर, पूरब मोहाल, रावटर््सगंज, सोनभद्र (उ.प्र.)।

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144