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Hindi Kavita : Naye-Purane Paridrishya

Hindi Kavita : Naye-Purane Paridrishya

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  • Pages: 122p
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789388211642
  •  
    लोकगीतों से शुरू होकर आदिकाल, भक्तिकाल और रीतिकाल के विभिन्न परिवेशों से गुजरकर आधुनिक काल तक पहुँच गयी हिन्दी कविता अपनी विकास-यात्रा की विविध मंजिलों को तय करके संप्रति इक्सीसवीं शदी के दूसरे दशक के अन्तिम चरण तक पहुँच चुकी है । इस लम्बी विकास यात्रा के दौरान हिन्दी कविता स्थल और काल के परिवेश के अनुकूल नूतन प्रवृतियों को आत्मसात कर कई आन्दोलनों से होकर गुजरी है । प्रचलित प्रवृतियों से भिन्न प्रवृत्तियाँ जब काव्यक्षेत्र में घर कर लेती हैं तथा कविता उनके अनुकूल परिभाषित होती है तभी तो नये काव्यान्दोलनों का प्रादुर्भाव होता है । इन काव्यान्दोलनो ने समय-समय पर कविता की संवेदना औरा संरचना में परिवर्तन और परिवर्द्धन उपस्थित कर दिये हैं । सुखद आश्चर्य की ही बात है कि ‘कवि की मौत', 'कविता की मौत' जैसे वेश्विक नारों और चुनौतियों का सामना करते हुए, अपनी संजीवनी शक्ति के बल पर कविता अब भी संपूर्ण मानवराशि को तथा प्रकृति और पर्यावरण को बचाये रखने की कोशिश में लगी हुयी है । विनष्ट होते अथवा क्षरित होते श्रेष्ठ मानव मूल्यों को बचाने की चिंता ही समकालीन विविध विमशों में मुखरित होती हैं । तभी मुक्तिबोध ये पक्तियाँ सार्थक सिद्ध होती हैं-- "नहीं होती । कहीं भी खत्म कविता नहीं होती कि वह कि वह आवेग त्वरित काल यात्री है... हिन्दी कविता की यात्रा अभी जारी है-वर्तमान सामाजिक-सांस्कृतिक समस्याओँ से जूझते हुए...मानव हित की चिन्ता करते हुए ।

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    Tankmanni Amma

    डा. एस. तंकमणि अम्मा

    जन्म : 18 मार्च 1950, तिरुवनन्तपुरम ।

    शैक्षिक योग्यताएँ : एम.ए., पीएच. डी. (हिन्दी)

    कार्यक्षेत्र : सन् 1973 से केरल के कॉलेजों में अध्यापन, 1979 से केरल विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में अध्यापन, प्रोफेसर अध्यक्ष तथा डीन । 25 शोधार्थी पीएच. डी उपाधि प्राप्त । 2010 में सेवानिवृति । विजिटिंग प्रोफेसर-कालिकट विश्वविद्यालय ।

    प्रकाशित ग्रंथ :

    मौलिक : मलयालम के खंडकाव्य, आधुनिक हिन्दी खण्डकाव्य, संस्कृति के स्वर, भारतीय संस्कृति : एक झलक, संप्रेषण की हिन्दी ।

    अनुदित : मोहन राकेश, गोत्रयान, स्वयंवर, कर्मयोगी, कठगुलाब, अन्दर कोई , बरसी, एक धरती, एक आसमान, एक सूरज, एन. कृष्ण-पिल्ले, करारनामा, आवाँ, अग्निसामर से अमृत, मलयालम की लोकप्रिय कहानियाँ आदि । 300 से ज्यादा आलेख प्रकाशित ।

    सदस्यता : पूर्व सदस्य विद्या-परिषद एवं कार्य परिषद, महात्मागांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा । अध्यक्षता-अखिल भारतीय हिन्दी अकादमी तिरुवनंतपुरम ।

    पुरस्कार/सम्मान : उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थापन, साहित्य पुरस्कार 1976, केन्दीय हिन्दी निदेशालय पुरस्कार 1990, द्विवागीश पुरस्कार, भारतीय अनुवाद परिषद, नई दिल्ली (1999), सौहार्द पुरस्कार, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थापन (2000), विश्वहिन्दी सम्मान-सातवां विश्व हिन्दी सम्मेलन, सूरीनाम, प्रयाग-2012, सूर्या अंतर भारती भाषा सम्मान (2015) ओजस्विनी अलंकरण गोपाल (2015)

    पता : मणि मंदिरम, आनयरा, तिरुवनंतपुरम-695029

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