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Hindi Ki Lambi Kavitaon Ka Aalochana-Paksha

Hindi Ki Lambi Kavitaon Ka Aalochana-Paksha

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Special Price Rs. 180

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  • Pages: 100p
  • Year: 2011
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126720385
  •  
    जब पुराने काव्यरूप नए कथ्य को अभिव्यक्त करने में असमर्थ हो जाते हैं तो रचनाकार नए युग के अनुकूल भावाभिव्यक्ति के लिए नए काव्यरूप की तलाश करता है। पश्चिमी देशों में भी पूँजीवाद के उभार के दौर में नए काव्यरूप की तलाश रचनाकारों द्वारा की गई है। इसीलिए अंग्रेजी साहित्य में व्हिटमैन, वर्ड्सवर्थ, कीट्स आदि ने लंबी कविताएँ रचीं। आधुनिक हिंदी के छायावाद युग में भी नई संरचनाएँ अस्तित्व में आती हैं और नए काव्यरूप बनते हैं। लंबी कविता की अवधारणा छायावाद काल की है। कोई इसे ‘परिवर्तन’ से आरंभ मानता है तो कोई इसे ‘प्रलय की छाया’ से। माना जाता है कि कुछ आलोचक ‘राम की शक्ति-पूजा’ से लंबी कविता का आरंभ मानते हैं। बावजूद इसके इतना तो तय है कि लंबी कविताओं की एक सुदृढ़ एवं नियमित परंपरा मुक्तिबोध से आरंभ होती है। लंबी कविता की परंपरा को मुक्तिबोध के बाद, राजकमल चौधरी की ‘मुक्ति प्रसंग’ और धूमिल की ‘पटकथा’ आगे बढ़ाती है। राजकमल चौधरी की ‘मुक्ति प्रसंग’ कविता एक ऐसे आदमी के भटकाव की कविता है, जो सार्थकता की तलाश में निरर्थक होते जाने की पीड़ा को पीठ पर लादे घूम रहा है। धूमिल की कविता ‘पटकथा’ भी राजनीति-केंद्रित कविता है। यह कविता आजादी के बाद की हालत का बखान करती है। कविता का आरंभ आजादी के मोह और आकर्षण से होता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि हिंदी की लंबी कविताएँ युग-बोध की उपज हैं और इस काव्यरूप का भविष्य आगे भी उज्ज्वल है। आज भी लंबी कविताओं का लेखन जारी है। इस पुस्तक में चार कवियों की नौ लंबी कविताओं की विवेचना शामिल है। पहले कवि निराला हैं जिनकी चार कविताएँ आलोचना के लिए चुनी गई हैं। उनके बाद अज्ञेय, मुक्तिबोध और धूमिल की कविताओं का विश्लेषण किया गया है। मेवात का जोहड मेवात कैसे बना? मेवात का जनमानस आज क्या चाहता है? क्या कर रहा है? मेवात के संकट से जूझते लोग, बाजार की लूट, पानी और खेती की लूट रोकने की दिशा में हुए काम...कुदरत की हिफाजत के काम हैं। इन कुदरती कामों में आज भी महात्मा गांधी की प्रेरणा की सार्थकता है। युगपुरुष बापू के चले जाने के बाद भी युवाओं द्वारा उनसे प्रेरित होकर ग्राम स्वराज, ग्राम स्वावलम्बन के रचनात्मक कार्यों से लेकर सत्याग्रह तक की चरणबद्ध दास्तान इस पुस्तक में है। यह पुस्तक देश-दुनिया और मेवात को बापू के जौहर से प्रेरित करके सबकी भलाई का काम जोहड़ बनाने-बचाने पर राज-समाज को लगाने की कथा है; जौहर से जोहड़ तक की यात्रा है। यह पुस्तक आज के मेवात का दर्शन कराती है। इसमें जोहड़ से जुड़ते लोग, पानी की लूट रोकने का सत्याग्रह, मेवात के 40 शराब कारखाने बन्द कराना तथा मेवात के पानीदार बने गाँवों का वर्णन है। मेवात की पानी, परम्परा और खेती का वर्णन बापू के जौहर से जोहड़ तक किया है। बापू कुदरत के करिश्मे को जानते और समझते थे। इसलिए उन्होंने कहा था ‘‘कुदरत सभी की जरूरत पूरी कर सकती है लेकिन एक व्यक्ति के भी लालच को पूरा नहीं कर सकती है।’’ वे कुदरत का बहुत सम्मान करते थे। उन्हें माननेवाले भी कुदरत का सम्मान करते हैं। मेवात में उनकी कुछ तरंगें काम कर रही थीं। इसलिए मेवात में समाज-श्रम से जोहड़ बन गए। मेवात में बापू का जौहर जारी है। यह पुस्तक बापू के जौहर को मेवात में जगाएगी। - प्रस्तावना से

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    Dr. Rajendra Prasad Singh

    राजेन्द्रप्रसाद सिंह

    अन्तरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त भाषावैज्ञानिक, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से पीएच.डी.।

    प्रकाशित कृतियाँ : भाषा का समाजशास्त्र, भारत में नाग परिवार की भाषाएँ, भोजपुरी के भाषाशास्त्र, भोजपुरी व्याकरण, शब्दकोश आ अनुवाद के समस्या, हिन्दी साहित्य का सबाल्टर्न इतिहास, हिन्दी साहित्य प्रसंगवश।

    सम्पादित पुस्तकें : कहानी के सौ साल : चुनी हुई कहानियाँ, काव्यतारा, काव्य रसनिधि, दलित साहित्य का इतिहास-भूगोल, भोजपुरी-हिन्दी-इंग्लिश लोक शब्दकोश, पिचानवे भाषाओं का समेकित पर्याय शब्दकोश, साहित्य में लोकतंत्र की आवाज।

    अंग्रेजी में अनूदित पुस्तकें : दि री-राइटिंग प्रॉब्लम्स ऑव भोजपुरी ग्रामर, डिक्शनरी एंड ट्रांसलेशन, लैंग्वेजेज ऑव नाग फैमिली इन इंडिया।

    इग्नू की पाठ्य पुस्तकें : भोजपुरी भाषा और लिपि, भोजपुरी व्याकरण, भोजपुरी अनुवाद।

    मॉरीशस सरकार के विशेष अतिथि एवं वहाँ सात दिवसीय व्याख्यान; बी.बी.सी. लंदन तथा एम.बी.सी., पोर्ट लुई सहित देश के कई आकाशवाणी केन्द्रों से साक्षात्कार एवं वार्ताएँ प्रसारित।

    कई राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलनों, सेमिनारों एवं कार्यशालाओं में सहभागिता तथा व्याख्यान।

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