• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Hriday Ki Hatheli

Hriday Ki Hatheli

Availability: Out of stock

Regular Price: Rs. 150

Special Price Rs. 135

10%

  • Pages: 127p
  • Year: 2007
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183611787
  •  
    ‘शब्द बनकर रहती हैं ऋतुएँ’, ‘अक्षत’ और ‘ईश्वराशीष’ के बाद ‘हृदय की हथेली’ से पुष्पिता अवस्थी ने प्रणय, प्रतीक्षा, विरह, आतुरता, समर्पण और आराधना की लौकिक अनुभूतियों को लोकेषणा के सँकरे दायरे से बाहर निकाल कर जैसे एक आध्यात्मिक सिहरन में बदल दिया है। ‘आँसू दुनिया के लिए आँख का पानी है/लेकिन तुम्हारे लिए दुख की आग है’ कहते हुए कवयित्री ने प्रबंधन-पटु समय में प्रेम की एक सरल रेखा खींचनी चाही है। उसके यहाँ ‘प्रेम के रूपक’ नहीं हैं, प्रणय का पिघलता ताप है, आँखों की चौखट में विश्वास की अल्पना है, अन-जी आकांक्षाओं की प्यास है, प्रेम का धन-धान्य है, स्मृति के कुठले में सँजोए अन्न की तरह अतीत का वैभव है। अचरज नहीं कि कवयित्री खुद यह कहती है - ‘इन कविताओं की व्यंजना आकाश की तरह निस्सीम है और आकाश गंगा की तरह अछोर भी। इनके अन्दर की यात्रा मन के रंगों-रचावों की यात्रा है, रस-कलश की छलकन है। सृजन के राग का आरोहण और कृत्रिमता के तिमिर का तिरोहण है।’ प्रेम के उद्दाम आदिम संगीत से होती - प्रेम का गान करने और उसका मान रखनेवाले कवियों - कालिदास, जयदेव, विद्यापति, घनानंद की परंपरा की ही धात्री पुष्पिता फिर एक बार पुण्य के पारावार में संतरण करना चाहती हैं, अपनी गंगा में प्रिय की यमुना को जीते हुए कृष्ण को राधा-भाव और राधा को कृष्ण-भाव में जीते हुए देखना चाहती हैं। उनकी पदावलियों में अनुरक्त और विदग्ध अनुभवों - दोनों की उमगती कसक भरी है, रचनेवाले के भीतर जैसे अकेलेपन की पिघलती मोमबत्ती। शब्दों के ताप में प्रणय की तपश्चर्या है, प्रेम को पृथ्वी की पहली और अन्तिम चाहत की तरह महसूस करने की उत्कंठा है। प्यार की पवित्र जाद्दवी को दिनोदिन मैला कर रहे समय के बावजूद देह की आकाश गंगा में तैरकर आँखें पार उतर जाना चाहती हैं ठहरे हुए समय से मोक्ष के लिए। इन कविताओं का सलीकेदार अपनत्व मन पर एक ऐसी छाप छोड़ता है जैसे इन अनुभूतियों के साथ, पढ़नेवाला भी सह-यात्रा कर रहा हो।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Pushpita Awasthi

    प्रो. पुष्पिता अवस्थी

    जन्म: कानपुर, उत्तर प्रदेश (भारत)। राष्ट्रीयता: नीदरलैंड।

    शिक्षा: एम.ए. (हिन्दी) व शोध (आधुनिक काव्यालोचन की भाषा)।

    2001-2005 तक सूरीनाम स्थित भारतीय राजदूतावास की प्रथम सचिव एवं भारतीय संस्कृति केन्द्र, पारामारिबो में हिन्दी प्रोफेसर। इसके पूर्व बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के बसंत कॉलेज फॉर विमेन में हिन्दी विभागाध्यक्ष। 2006 से नीदरलैंड स्थित ‘हिन्दी यूनिवर्स फाउंडेशन’ की निदेशक। 2010 में गठित अन्तर्राष्ट्रीय भारतवंशी सांस्कृतिक परिषद की महासचिव।

    प्रकाशन व प्रसारण: गोखरू, जन्म (कहानी संग्रह); अक्षत; शब्द बनकर रहती हैं ऋतुएँ, ईश्वराशीष, हृदय की हथेली, अन्तर्ध्वनि, देववृक्ष, शैल प्रतिमाओं से (कविता-संग्रह); आधुनिक हिन्दी काव्यालोचना (आलोचना); संस्कृति,  भाषा और साहित्य (प्रो. विद्यानिवास मिश्र से साक्षात्कार)। सूरीनाम देश पर केन्द्रित सूरीनाम, सूरीनाम का सृजनात्मक साहित्य; विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ, कहानियाँ, निबन्ध व लेख प्रकाशित।

    अनुवाद: श्रीलंका वार्ताएँ, स्कूलों के नाम पत्र: भाग 2 (जे. कृष्णमूर्ति), काँच का बक्सा (नीदरलैंड की परीकथाओं का हिन्दी अनुवाद)। सम्पादन: दादा धर्माधिकारी की सूक्तियाँ; सर्वोदय दैनन्दिनी; परिसंवाद (कृष्णमूर्ति के दर्शन पर आधारित त्रैमासिक); सर्वोदय। सूरीनाम में ‘हिन्दीनामा’ और ‘शब्द शक्ति’ पत्रिकाओं के प्रकाशन की शुरुआत व अतिथि संपादन।

    सूरीनाम में ‘हिन्दीनामा’ प्रकाशन संस्थान तथा ‘साहित्य मित्र’ संस्था की स्थापना।

    सम्मान व पुरस्कार: ‘भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थान’ द्वारा कविता के लिए पुरस्कृत (1987); अन्तर्राष्ट्रीय अज्ञेय साहित्य सम्मान पुरस्कार (2002); सूरीनाम  राष्ट्रीय  हिन्दी सेवा पुरस्कार (2002); कविता के लिए ‘शमशेर सम्मान’ (2008)। एनसीईआरटी में पाठ्यक्रम निर्धारण समिति की सदस्य।

    अन्य: बांग्ला, फ्रेंच, हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी व डच भाषाओं की जानकार।

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144