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Is Tarah Mein

Is Tarah Mein

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  • Pages: 102
  • Year: 2017, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183618304
  •  
    पवन करण की कविताएँ जीवन की स्वाभाविक हरकत की तरह आती हैं। वे हर जगह कवि हैं। इसीलिए उनकी कविताएँ हर कहीं से उग आती हैं। न उन्हें विषयों के लिए दिमाग को किसी अनोखी दुनिया में दौड़ाना पड़ता है, न कविता को वाणी देने के लिए भाषा के साथ कोई शारीरिक-मानसिक अभ्यास करना पड़ता है। दुनिया में रहना-जीना जितना प्राकृतिक है, उनकी कविताएँ भी लगभग वैसी ही हैं। त्यौहार पर घर की जाते आदमी का उल्लास हो या शहर के सबसे पुराने बैंड का रुदन जो सिर्फ उसे सुनाई देता है, या घर वह पुरानी कैंची जो 'फिलहाल घर के कोष में नोट के दो टुकड़ों की तरह' रखी है। और ताला, 'यह राजदार हमारा अनुपस्थिति में हमारी कभी झुकता नहीं टूट भले जाए।' या फिर बिजली के खम्भे जो रात के सुनसान में 'जब उनके नीचे से गुजरता है चौकीदार उसके सिर पर हर बार रोशनी की उजली टोपी पहना देते हैं' और जब वह देर तक वापस नहीं आता तो उसे 'अपने नीचे लेटे कुत्तों में से किसी एक को भेजते हैं उसे देखने।' ये कविताएँ हमें व्याकुल करके किसी बदलाव की कसम खाने के लिए नहीं उकसातीं, बल्कि जहाँ हम हैं, जिस भी मुद्रा में वहीं हमारे भीतर आकर वहीं से हमें बदलना शुरू कर देती हैं, और इनसे गुजरकर जब हम वापस दुनिया के रूबरू होते हैं, सबसे पहले हमें अपनी दृष्टि नई लगती है, और दुनिया के अनेक कच्चे जोड़ अचानक हमें दिखाई देने लगते हैं जिन्हें फौरन रफू की या मरम्मत की जरूरत है।

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    Pawan Karan

    पवन करण

    जन्म : 18 जून, 1964; ग्वालियर (म.प्र.)।

    शिक्षा : पीएच.डी. (हिन्दी), जनसंचार एवं मानव संसाधन विकास में स्नातकोत्तर पत्रोपाधि।

    प्रकाशित काव्य-संग्रह : 'इस तरह मैं', 'स्त्री मेरे भीतर', 'अस्पताल के बाहर टेलीफ़ोन', 'कहना नहीं आता', 'कोट के बाज़ू पर बटन', 'कल की थकान' और 'स्त्रीशतक' खंड–एक एवं 'स्त्रीशतक' खंड–दो प्रकाशित ।

    अंग्रेजी, रूसी, नेपाली, तमिल, तेलगू, कन्नड़, गुजराती, असमिया, बांग्ला, पंजाबी, उड़िया तथा उर्दू में कविताओं के अनुवाद। कविताएँ विश्वविद्यालयीन पाठ्यक्रमों में शामिल।

    कविता-संग्रह 'स्त्री मेरे भीतर' मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, उर्दू तथा बांग्ला में प्रकाशित। संग्रह की कविताओं का नाट्य-मंचन।

    सम्मान : रामविलास शर्मा पुरस्कार, रजा पुरस्कार, वागीश्वरी सम्मान, शीला सिद्धांतकर स्मृति सम्मान, परम्परा ऋतुराज सम्मान, केदार सम्मान, स्पंदन सम्मान।

    सम्प्रति : 'नवभारत' एवं 'नई दुनिया' ग्वालियर में साहित्यिक पृष्ठ 'सृजन' का सम्पादन तथा साप्ताहिक साहित्यिक स्तम्‍भ 'शब्द-प्रसंग' का लेखन।

    सम्पर्क : 'सावित्री', आई-10, साइट नं.-01, सिटी सेंटर, ग्वालियर (म.प्र.)–474002

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