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Jadoon Ki Aakhiri Pakar Tak

Jadoon Ki Aakhiri Pakar Tak

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  • Pages: 83p
  • Year: 2000
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 8171195954
  •  
    युवा कविता का जो चरित्र पिछले दिनों विशिष्ट शक्ति और आवेग के साथ उभरा है, रवीन्द्र भारती की कविताएँ उसके विविध आयामों का स्वस्थ निर्देशन करती हैं। युवा कविता अपनी जातीय पहचान को पुनः प्राप्त करने की कोशिश है और इस प्रक्रिया में उसने ठेठ भारतीय किसानी चेहरे को उसकी समग्र वस्तुनिष्ठ छवि के साथ मूर्त करने की व्यग्रता दिखलाई है। रवीन्द्र भारती का कवि गाँव का कवि है। ठेठ देहाती। देहात के जीवन, उसके वृक्ष, वहाँ के चरवाहे, कुएँ, नदी का किनारा, किनारे पर जलती चिता से उठता धुआँ, लू से भरी पछया हवा, सूखे हुए गाछ के पत्ते, जलती हवा में टनटनाते पत्ते, यानी पूरा देहाती वातावरण - इन कविताओं में साँस लेता और धड़कता प्रतीत होता है। रवीन्द्र की ये कविताएँ औसत भारतीय जनमानस के उन उपेक्षित धूल-धूसरित खंडित व्यक्तित्व-बिम्बों को बिना किसी कालगत कलात्मक व पारिभाषिक जॉगर्नस में पहचान करवाने की ईमानदार कोशिश है। रवीन्द्र ने अपनी विषय-वस्तु के साथ एक अत्यन्त आत्मीय सम्बद्धता का अहसास कराते हुए भी पूरी सतर्कता के साथ उन अभिव्यक्ति-रूढ़ियों से बचने की कोशिश की है, जिनकी उपस्थिति का मुख्य प्रभाव युवा कविता द्वारा उपस्थित मनुष्य की आदिम और ऐतिहासिक भावनाओं, आकांक्षाओं और हर्ष-विवाद को एक विशिष्ट कलात्मक मुद्रा में परिणत कर उनके वस्तुनिष्ठ द्वंद्व की तपिश को कुंद कर देता है। रवीन्द्र भारती ग्रामीण जीवन की प्रशंसा नहीं करते, उसका उपहास भी नहीं करते, सहानुभूति भी नहीं दिखाते, बल्कि उसे अपनी संवेदना का अंग बनाते हैं। यानी, ये कविताएँ निजता, संलग्नता की सहज उपज हैं। कवि अपनी अभिव्यक्ति के प्रति ईमानदार है और उसके माध्यम से वह भाषा को नई ऊर्जा प्रदान करता है; कवि की हृदयस्पर्शी और अंतरंग कविताओं में गुल्लू, माँ का किस्सा, स्मृति-1, स्मृति-2, सूर्य की ज्योति, पेड़, रात का किस्सा, पिछली बार जैसी एक से एक कविता जड़ों की आखिरी पकड़ तक में संगृहीत हैं। ये कविताएँ बार-बार पढ़ने के लिए विवश करती हैं। संक्षेप में कहना हो, तो कहेंगे कि रवीन्द्र भारती के कविता- संसार से गुजरना अभूतपूर्व अनुभव से गुजरना है।

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    Ravindra Bharti

    जन्म: 1951

    कविता-संग्रह : जड़ों की आखिरी पकड़ तक, धूप के और करीब, यह मेरा ही अंश है, नचनिया !

    कविताएँ कई भाषाओँ में अनूदित !

    नाटक : कंपनी उस्ताद, फूकन का सुथन्ना, जनवासा, अगिन तिरिया अरु कौआहंकनी (फिल्म निर्माण) !सम्मान और पुरस्कार : बिहार राष्ट्रभाषा परिषद् से विशिष्ट साहित्य सेवा सम्मान, मानव संसाधन मत्रालय, भारत सरकार से सीनियर फेलोशिप !

    1975 में आपातकाल के दौरान कविता पर कारावास !

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