• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Jeevan Prabandhan : Life Managemant

Jeevan Prabandhan : Life Managemant

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 195

Special Price Rs. 175

10%

  • Pages: 231p
  • Year: 2018, 11th Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183614252
  •  
    करोड़ों लोगों के लिए श्री हमनुमान चालीसा नित्य परायण का साधन है । बहुतों को यह कण्ठस्थ है पर अधिकांश ने यह जानने का प्रयत्न नहीं किया होगा कि इन पंक्तियों का गूढ़ अर्थ क्या है । गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपना सारा साहित्य प्रभु को साक्षात सामने रखकर लिखा है । उनका सारा सृजन एक तरह से वार्तालाप है । श्री हनुमानजी से उनकी ऐसी ही एक निजी बातचीत का एक लोकप्रिय जनस्वीकृत नाम है श्री हनुमान चालीसा । आज के मानव को अच्छा, सहज, सरल और सफल जीवन जीने के सारे संकेत हैं इस चालीसा में । ज्ञान के सागर में डुबकी लगाकर, भक्ति के मार्ग पर चलते हुए, निष्काम कार्य–योग को कैसे साधा जाए, जीवन में इसका सन्तुलन बनाती है श्री हनुमान चालीसा । जिसे पढ़ने के बाद यह समझ में आ जाता है कि श्री हनुमान जीवन–प्रबंधन के गुरु हैं । जीवन–प्रबंधन का आधार है स्वभाव और व्यवहार । आज के समय में बच्चों को जो सिखाया जा रहा है, युवा जिस पर चल रहे हैं, प्रौढ़ जिसे जी रहे हैं और वृद्धावस्था जिसमें अपना जीवन काट रही है वह समूचा प्रबंधन ‘‘व्यवहार’’ पर आधारित है । जबकि जीवन– प्रबंधन के मामले में श्रीहनुमान चालीसा ‘‘स्वभाव’’ पर जोर देती है । व्यवहार से स्वभाव बनना आज के समय की रीत है । जबकि होना चाहिए स्वभाव से व्यवहार बने । जिसका स्वभाव सधा है उसका हर व्यवहार सर्वप्रिय और सर्वस्वीकृत होता है । स्वभाव को कैसे साधा जाए, ऐसे जीवन–प्रबंधन के सारे सूत्र हैं श्रीहनुमान चालीसा की प्रत्येक पंक्ति में–––

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Vijayshankar Mehta

    पं. विजयशंकर मेहता

    जन्म: 2 जुलाई, 1957 को प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो. डॉ. वल्लभदासजी मेहता एवं माता सुमित्रा देवी के घर हुआ।

    रसायन शास्त्र में एम.एससी करने के बाद पं. मेहता ने 20 वर्षों तक भारतीय स्टेट बैंक में अपनी सेवाएँ दी थीं। भारत के प्रतिष्ठित हिन्दी समाचार पत्र दैनिक भास्कर समूह से भी आप 20 वर्षों तक जुड़े रहे तथा ब्यूरो प्रमुख, सम्पादक और ब्यूरो सलाहकार के पद पर अपनी सेवाएँ देते हुए अप्रैल 8 में सेवानिवृत्त हुए।

    पिछले 15 वर्षों से पंडितजी विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दे रहे थे किन्तु 2004 में सिंहस्थ के पश्चात् स्वामी सत्यमित्रानन्दजी और माँ प्रेमापांडुरंगजी के आशीर्वाद से आपने अपने व्याख्यान के विषयों को जीवन प्रबन्धन से जोड़ा। इसके पश्चात आपको जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्दगिरीजी का शिष्यत्व प्राप्त हुआ।

    पिछले 7 वर्षों में पं. विजयशंकर मेहता ने लगभग 900 व्याख्यान देश और विदेश में दिए हैं। श्रीरामकथा, श्रीमद्भागवत, महाभारत, श्रीहनुमानचलीसा, गीता आदि अन्य 25 विषयों पर आपकी सीड़ी देखी व सुनी जा रही तथा उपलब्ध पुस्तकें पढ़ी जा रही हैं।

    पं. विजयशंकर मेहता पिछले दिनों पाकिस्तान यात्रा पर गए थे जहाँ उन्होंने मजहब को जिस्मानी और रूहानी तौर पर अलग-अलग उपयोग के साथ अपने 13 व्याख्यानों में समझाया। पाकिस्तान में हर मजहब के लोगों ने इसे पसन्द किया।

    आधुनिक प्रबन्धन में जो सूत्र आते हैं उन पर अध्यात्म की दृष्टि से बोलने के लिए पंडित मेहता को 2010 एवं 2011 में अफ्रीका बुलाया गया था।

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144