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Kavita : Dukh Ki Nadi

Kavita : Dukh Ki Nadi

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  • Pages: 91p
  • Year: 2007
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 10: 8183611036
  •  
    कविता दुख की नदी आज का समाज जितने जटिल एवं हिंस्र पथ पर चल रहा है, वर्ग-संघर्ष जितना तीव्र से तीव्रतर हो रहा है, शिल्प व साहित्य अपने आभिजात्य का आवरण त्याग कर अभिव्यक्ति में उतना ही सहज व सशक्त रूप लेता जा रहा है।...ऐसा मैं उन लोगों के सन्दर्भ में कह रहा हूँ जो आसमान में नहीं उड़ते बल्कि जो इस धरती की धूसर मिट्टी पर निर्द्विधा विचरण करते हैं, और विचरण करते-करते वे कभी आसमान को अपनी मुट्ठियों में भर लेते हैं तो कभी धरती को अपने प्रेम व दर्द के अश्रुजल से सिंचित कर देते हैं। कुसुम जैन ऐसी ही एक कवयित्री हैं जो (अपनी कविता के) प्रत्येक शब्द को मुट्ठियों में ले कभी उनमें तपिश भरती हैं तो कभी उन्हें आँसुओं की तरह तरल व नर्म कर देती हैं।...और शब्द ही तो होते हैं कविता की प्राण-सम्पदा।...कवयित्री कुसुम जैन की कविता आम आदमी के दुःख व यंत्रणा से जुड़कर उसे नाना रूपों में मुखर अभिव्यक्ति देती है, इसीलिए उसकी कविता यंत्रणा की कविता है। कवयित्री कुसुम जैन की कविताओं पर उपरोक्त टिप्पणी है बांग्ला के प्रख्यात कवि-लेखक-अनुवादक स्व. कमलेश सेन की जबकि हिन्दी के मूर्णन्य साहित्यकार विष्णु प्रभाकर का कहना है कि, ‘‘कुसुम जैन के पास एक सुनिश्चित दृष्टि है और उसकी भाषा में भावों को अभिव्यक्त करने की क्षमता ही नहीं, उसमें एक सहज प्रवाह भी है।’’

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    Kusum Jain

    मूलतः कवयित्री कुसुम जैन का पहला काव्य-संकलन सच के साये में’ 1987 में प्रकाशित हुआ, फिर उनकी इकतीस कविताओं बांग्ला संस्करण ‘रूटी ओ कोबिता’ जिसका अनुवाद कमलेश सेन ने किया था का प्रकाशन 1998 में हुआ।

    इसी बीच 1996 में आपने स्वीडिश लेखक टॉमस एंडर्सन व गीतेश शर्मा के साथ मिलकर पुस्तक डबल फैन्टासी’ लिखी जिसका स्वीडिश अनुवाद ‘डुब्ला वार्ल्डर’ शीर्षक से प्रकाशित और चर्चित हुआ।

    विगत दो दशकों से आप जन-संसार से सहयोगी सम्पादक के रूप में जुड़ी हैं तथा इसके अन्तर्गत महानगर 77, नवलेखन, राहुल: मंथन एसं चिंतन, युवा: दुष्टि और दिशा आदि कई महत्त्वपूर्ण ग्रंथों का आपने सम्पादन किया।

    कवयित्री होने के साथ-साथ आप एक सक्रिय समाजकर्मी भी हैं। महिला संगठन ‘विमेन्स सहयोग’ की अध्यक्ष होने के अलावा संगठन द्वारा प्रकाशित वार्षिक त्रिभाषी पत्रिका की आप सम्पादक भी हैं।

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