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Kojagar

Kojagar

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  • Pages: 386p
  • Year: 2007
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180313383
  •  
    मनुष्य अगर अपना सिर ऊँचा न करे, अपने को सम्मानित न करे तो दूसरा कोई भी उसे उन्नत-मस्तक व सम्मानित नहीं कर सकता। अपनी मुक्ति अपने भीतर ही लिये घूमता है आदमी। उस प्रचंड शक्ति को वह स्वयं जब तक मुक्त नहीं कर सकता, तब तक उसे मुक्त करना किसी और के वश में नहीं है। सम्मान की तरह ही मुक्ति भी भीख में नहीं मिलती। बुल्कि और परेशनाथ के लिए भालुमार के हम सभी लोगों के आँसुओं को, हमारी संवेदना और औदार्य को सरासर झूठा प्रमाणित करके, मनि और मंजुरी फिर से चरम दारिद्र्य में भूख से तड़पते हुए, अशक्त शरीर अपने को धिक्कारते हुए, आपस मेें गालीगलौज और मारपीट करते हुए, जंगली सूअर और साही से लड़ते हुए कन्द-मूल खोदकर खाएँगे! मनि फिर से नशे में धुत्त होकर माँ-बहन की भद्दी गालियाँ बकते हुए हाट से लौटेगा, उस घर में, जहाँ उसे बापू कहकर कभी कोई नहीं पुकारेगा। -इसी पुस्तक से

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    Budhadev Guha

    जन्म: 29 जून, 1935 ई.। बांग्ला के शीर्ष कथाकारों में एक। बांग्ला पाठकों के बीच संप्रति सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासकार।

    शिक्षा: आरंभिक पढ़ाई-लिखाई अविभाजित बंगाल के रंगपुर और बड़िशाल में, जो अब बांग्लादेश में हैं। कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से उच्च शिक्षा।

    रचनाएँ: अब तक शताधिक उपन्यास, कथा संकलन एवं अन्य कृतियाँ प्रकाशित। इनमें ‘कोजागर’, ‘कोइल तीरे’, ‘अदल-बदल’, ‘मधुकरी’, ‘लंगड़ा पाहन’, ‘धूलो- बाली’, ‘चबूतरा’, ‘खेला जखोन’, ‘सविनय निवेदन’, ‘स्वगोक्ति’, ‘अभिलाष’, ‘प्रथम प्रवास’, ‘भोरेर आगे’, ‘हलुद बसंत’, ‘बनबीविर बने’, ‘निनी कुमारीर बाघ’, ‘पंचम प्रवास’, ‘जेठू मनी एंड कंपनी’, ‘हजार दुआरी’, ‘नग्न निर्जन/बाती घर’, ‘पंच प्रदीप’, ‘संधेर परे’ आदि विशेष उल्लेखनीय हैं।

    सम्मान: बांग्ला साहित्य जगत में सर्वाधिक प्रतिष्ठित ‘आनंद पुरस्कार’ समेत ‘शरत् पुरस्कार’, ‘विभूतिभूषण पुरस्कार’ एवं ‘शिरोमणि पुरस्कार’ आदि से सम्मानित। एक उपन्यास डॉ. जॉन विलियम हूड द्वारा अंग्रेजी में और कुछ कृतियाँ अन्यान्य भारतीय भाषाओं में अनूदित।

    वृत्ति: पेशे से एकाउंटेंट, इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के फेलो हैं। पश्चिम बंगाल सरकार के वन विभाग के अधीन वन्य जीवन सलाहकार बोर्ड के सदस्य, पश्चिम बंगाल पर्यटन विकास निगम के निदेशक, सांस्कृतिक केंद्र ‘नंदन’ के सलाहकार बोर्ड के सदस्य, शांतिनिकेतन स्थित विश्वभारती वि.वि. के रवीन्द्र भवन की प्रबंध समिति के सदस्य के रूप में दायित्व निर्वाह। रवीन्द्र संगीत के गहरे जानकार: आकाशवाणी कलकत्ता के रवीन्द्र संगीत आडिशन बोर्ड में पाँच साल तक रहे। श्री गुहा प्रतिभाशाली गायक व चित्रकार भी हैं। अब तक बांग्ला पुरातनी गान के दो कैसेट और पेंटिंग्स का एक एलबम जारी हो चुके हैं।

     

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