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Kot Ke Bajoo Par Batan

Kot Ke Bajoo Par Batan

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  • Pages: 124p
  • Year: 2013
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183615853
  •  
    पवन करण ने कविता का पाठ जीवन की पाठशाला से सीखा है । पवन करण के यहाँ कुम्हार के आवाँ से निकले घड़े की तरह आंच सोखकर, भीतर तलहटी में स्मृतियों की राख चिपकाए, अनपढ़ मुँह के बाहर आती बोली के झिझकते शब्दों में, अभाव का उत्सव खेलते जीवन के दृश्य दिखाई देते हैं । भले ही तकनॉलोजी और मैनेजमेंट के प्रशिक्षण ने बहुत जगहों पर आदमी को ही हाशिये पर सरका दिया हो किंतु मध्यवर्गीय भद्रलोक की वर्जनाओं से भिड़ंत की धमक वाली ये कविताएँ पाठक के संवेदनतंत्र में कुछ अलग ही प्रकार से हलचल पैदा करती है क्योंकि भारतीय समाज अभी अपना नग्न फोटोशेसन कराने को उत्सुक प्रेमिका तथा बेटी और प्रेमिका के बीच पिता के प्यार के अंतर तथा विवाह की तैयारी करती प्रेमिका से पति की 'आंतरिकता को जानने को उत्सुक आहत प्रेमी को अपने संस्कारों के बीच जगह नहीं दे पाया है । 'कोट के बाजू पर बटन' की भी कुछ कविताएँ भद्रलोक के काव्य-वितान में छेद करते हुए प्रेम और देह के बीच खड़ी की गई झीनी, रोमांटिक चादर को किनारे सरकाती हैं । पवन करण के कहने की कला भाषा के सहज संबोधन में निहित है जिसके कारण पाठक चालाक शब्दों और उनकी चमक में चौंधियाने से बचता है । भाषा के स्तर पर कथ्य के बारीक यथार्थ को पवन करण ने बहुत सहजता से व्यक्त कर दिया है । निर्मल वर्मा जिस यथार्थ को कहानी में 'झाड़ी में छिपे पक्षी' की तरह बताते हैं उस यथार्थ को पवन करण बहुत सरलता से पकड़कर झाड़ी के ऊपर बिठा देते हैं कि यह है देखो । उन्होंने अपनी कहन के शब्द, मुहावरे और औजार सड़क और गलियों से उठाए हैं अत: भाषा में भद्रकाव्य के घूँघट न होने से वह नये अनुभव का आस्वाद देती हैं । कविताएँ कहीं भी कवि के 'मैं को अस्वीकार नहीं करती अत: रचनात्मक संघर्ष द्विस्तरीय हो जाता है-व्यक्तिगत जो आतरिक है और बाह्य जो सामाजिक है ।

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    Pawan Karan

    पवन करण

    जन्म : 18 जून, 1964; ग्वालियर (म.प्र.)।

    शिक्षा : पीएच.डी. (हिन्दी), जनसंचार एवं मानव संसाधन विकास में स्नातकोत्तर पत्रोपाधि।

    प्रकाशित काव्य-संग्रह : 'इस तरह मैं', 'स्त्री मेरे भीतर', 'अस्पताल के बाहर टेलीफ़ोन', 'कहना नहीं आता', 'कोट के बाज़ू पर बटन', 'कल की थकान' और 'स्त्रीशतक' खंड–एक एवं 'स्त्रीशतक' खंड–दो प्रकाशित ।

    अंग्रेजी, रूसी, नेपाली, तमिल, तेलगू, कन्नड़, गुजराती, असमिया, बांग्ला, पंजाबी, उड़िया तथा उर्दू में कविताओं के अनुवाद। कविताएँ विश्वविद्यालयीन पाठ्यक्रमों में शामिल।

    कविता-संग्रह 'स्त्री मेरे भीतर' मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, उर्दू तथा बांग्ला में प्रकाशित। संग्रह की कविताओं का नाट्य-मंचन।

    सम्मान : रामविलास शर्मा पुरस्कार, रजा पुरस्कार, वागीश्वरी सम्मान, शीला सिद्धांतकर स्मृति सम्मान, परम्परा ऋतुराज सम्मान, केदार सम्मान, स्पंदन सम्मान।

    सम्प्रति : 'नवभारत' एवं 'नई दुनिया' ग्वालियर में साहित्यिक पृष्ठ 'सृजन' का सम्पादन तथा साप्ताहिक साहित्यिक स्तम्‍भ 'शब्द-प्रसंग' का लेखन।

    सम्पर्क : 'सावित्री', आई-10, साइट नं.-01, सिटी सेंटर, ग्वालियर (म.प्र.)–474002

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