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Hindi Anusandhan

Hindi Anusandhan

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  • Pages: 301p
  • Year: 2007
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180312670
  •  
    स्वातन्त्र्योत्तर काल में हिन्दी-साहित्य की सभी विधाओं ने एक परिपक्वता और प्रौढ़ता प्राप्त की है। प्रसिद्ध समालोचक डॉ. विजयपाल सिंह की नवीनतम कृति 'हिन्दी-अनुसंधानà से यह स्पष्ट हो जाता है कि साहित्यिक शोध ने भी एक वैज्ञानिक परिष्कार पा लिया है। शोध संबंधी पद्धति और प्रक्रिया का वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक ज्ञान प्रस्तुतत करने के साथ ही 'हिन्दी-अनुसंधानà में पहली बार शोध की दो नवीन प्रणालियों-लोकतात्विक शोध व भाषातात्विक शोध पर विचार किया गया है। मर्मज्ञ साहित्य-मनीषी डॉ. विजयपाल सिंह का यह समसामयिक अध्ययन साहित्य के अध्येताओं और छात्रों को समान रूप से उपयोगी होगा।

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    Vijaypal Singh

    डॉ. विजयपाल सिंह

    जन्म: 21 जून, 1923, ग्राम बनवारीपुर, जलेसर, एटा (उ.प्र.)।

    शिक्षा: एम.ए. (हिंदी) प्रथम श्रेणी, एम.ए. (संस्कृत) प्रथम श्रेणी, पी-एच.डी., डी.लिट्.।

    कार्यक्षेत्र: श्री  वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय, तिरुपति (आंध्र) तथा काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के पूर्व प्रोफेसर एवं हिंदी विभागाध्यक्ष (सन् 1960-1983 ई.)।

    रचनाएँ: केशव और उनका साहित्य (दो बार पुरस्कृत), केशव का आचार्यत्व (पुरस्कृत), केशव की काव्य चेतना (पुरस्कृत), केशव-कोश (पुरस्कृत), केशव-समग्र, सामान्य हिंदी, रीतिकालीन साहित्य कोश, रामचन्द्रिका, कवि प्रिया तथा रसिक प्रिया की टीकाएँ, हिंदी अनुसंधान, पाश्चात्य काव्यशास्त्र, भारतीय काव्यशास्त्र, संस्कृत साहित्य का इतिहास।

    संपादन: कथा-एकादशी, श्रेष्ठ कहानियाँ, श्रेष्ठ एकांकी, रीतिकाव्य संग्रह, साहित्यिक रेखाचित्र, बिहारी वैभव, काशी हिंदी विश्वविद्यालय की शोध पत्रिका के अनेक वर्षों तक प्रधान संपादक।

    विदेश यात्राएँ: रूस 1974, मॉरिशस 1976, नेपाल की अनेक बार यात्राएँ।

    सम्मान: वेंकटेश्वर से विश्वनाथ: डॉ. विजयपाल सिंह अभिनंदन ग्रंथ।

    निधन: 29 दिसम्बर, 2008

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