• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Maharaja Surajmal

Maharaja Surajmal

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 495

Special Price Rs. 446

10%

  • Pages: 180
  • Year: 2018, 5th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183610575
  •  
    18वीं सदी में जब मुग़ल साम्राज्य पतन की ओर था, मराठों, सिखों और जाटों ने न केवल अपनी-अपनी प्रभावशाली राजसत्ता स्थापित कर ली थी, बल्कि दिल्ली सल्तनत को एक तरह से घेर लिया था ! उन दिनों इन रियासतों में कुछ ऐसे शासक पैदा हुए जिन्होंने अपनी बहादुरी तथा राजनय के बल पर न केवल उस समय की सियासत, बल्कि समाज पर भी गहरा असर डाला ! भरतपुर के जाट नरेश महाराजा सूरजमल इनमे अव्वल थे ! महज 56 वर्ष के जीवन-काल में उन्होंने आगरा और हरियाणा पर विजय प्राप्त करके अपने राज्य का विस्तार ही नहीं किया, बल्कि प्रशासनिक ढाँचे में भी उल्लेखनीय बदलाव किए ! जात समुदाय में आज भी उनका नाम बहुत गौरव और आदर के साथ लिया जाता है ! विद्वान राजनेता कुंवर नटवर सिंह ने प्रमाणिक सूचनाओं और दस्तावेजो को आधार बनाकर महाराजा सूरजमल की सियासत और संघर्ष की महागाथा लिखी है ! अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हो चुकी इस पुस्तक का यह अनुवाद हिंदी के पाठकों की सामने उनके प्रेरणादायी व्यक्तित्व को रखने का अपनी तरह का पहला उपक्रम है !

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Kunwar Natwar Singh

    जन्म: 16 मई, 1931, भरतपुर (राजस्थान) में। 

    शिक्षा: बी.ए. (ऑनर्स) सेंट स्टीफन कॉलेज, नई दिल्ली; कॉरपस क्रिस्टी कॉलेज, कैम्ब्रिज; बी¯ज़ग यूनिवर्सिटी, बीज़िंग; फैलो-कॉरपस क्रिस्टी कॉलेज, कैम्ब्रिज।

    भारतीय विदेश सेवा: 1953 में भारतीय विदेश सेवा में शामिल। बीजिं़ग (चीन) में 1956-58; संयुक्त राष्ट्र संघ (न्यूयॉर्क) में स्थायी भारतीय मिशन के तहत 1961-66; प्रधानमंत्राी कार्यालय में 1966-71; पोलैंड में राजदूत 1971-73; लन्दन में उप उच्चायुक्त 1973-77; जाम्बिया में उच्चायुक्त 1977-80; पाकिस्तान में राजदूत 1980-82। 

    राजनीति: विदेश सेवा से मुक्त होकर सक्रिय राजनीति में शामिल हुए। 1984 में पहली बार सांसद बने। 1984-89 तथा 1998-99 के दौरान लोकसभा के सदस्य रहे। 2002 में राज्यसभा के लिए चुने गए। 

    इस्पात राज्यमंत्राी  1985, उर्वरक राज्यमंत्राी 1985-86, विदेश राज्यमंत्राी 1986-89। मई 2004 से दिसम्बर 2005 तक केन्द्रीय विदेश मंत्राी। 

    प्रकाशित कृतियाँ: ई.एम. फॉर्स्टर: ए ट्रिब्यूट (1964); द लैगेसी ऑफ नेहरू (1965); टेल्स फ्रॉम माडर्न इंडिया (1966); स्टोरीज फ्रॉम इंडिया (1971); महाराजा सूरजमल 1707-1763 (1981); कर्टेन राइज़र (1984); प्रोफाइल एंड लेटर्स (1997); द मैग्नीफिकेंट महाराजा भूपिन्दर सिंह ऑफ पटियाला: 1891-1938 (1997); हर्ट टू हर्ट (2003); इनके अतिरिक्त ढेर सारी पुस्तक समीक्षाएँ एवं आलेख राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय पत्रा-पत्रिकाओं में प्रकाशित।

    सम्मान: पद्म भूषण (1984); ई.एम. फॉर्स्टर लिट्रेसी अवार्ड (1989); क्यंूग ही यूनिवर्सिटी, सियोल से राजनीतिशास्त्रा में डॉक्टर की मानद उपाधि। सिनेगल गणराज्य द्वारा सम्मान।

    पता: 19, तीन मूर्ति लेन, नई दिल्ली-110 011 (भारत)। 

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144